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कॉलोनियों में सौ रुपये गज का विकास शुल्क, पार्षदों तक रोष, 20 की बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा

Wed, 18 Jan 2017 12:09 AM IST
amar ujala beuro panipat
amar ujala beuro panipat Updated Wed, 18 Jan 2017 12:09 AM IST
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panipat, vikas ki bat
d - फोटो : amar ujala
शहर की बाहरी कालोनियों में एक हजार रुपये प्रति गज विकास शुल्क लगने के बाद विकास का पहिया थम सा गया है। बाहर की 79 कालोनी के लोगों समेत इनके पार्षदों में भी रोष है। इसी बीच शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय के सख्त होने पर नगर निगम द्वारा 20 जनवरी को हाउस की मीटिंग तय की है। ऐसे में हाउस की मीटिंग में प्रस्तावित मुद्दों के अलावा विकास शुल्क बड़ा मुद्दा हो सकता है। ऐसे में बैठक हंगामे की भेंट चढ़ने का पहले ही अंदेशा लगाया जाने लगा है।
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शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय नगर निगम के हाउस की लंबे समय से बैठक न होने को लेकर गंभीर हो गया है और कमिश्नर ने सभी निगम आयुक्त को पत्र जारी कर इसकी हिदायत दी है। निदेशालय के आदेशों के बाद निगम आयुक्त ने हाउस की बैठक को लेकर 20 जनवरी तय की है। मेयर ने इसको लेकर मसौदा तैयार कर लिया है। निगम द्वारा बैठक का समय निर्धारित होने पर सत्तापक्ष के पार्षदों ने भी कमर कस ली है।
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एक साल बाद होगी हाउस की बैठक
नगर निगम को बने तीन साल हो गए हैं और पिछले एक साल से शहर के विकास को लेकर हाउस की बैठक नहीं हो सकी है। मेयर पिछले कई माह से बैठक का समय व मसौदा तय कर रहे हैं, लेकिन निगम आयुक्त के न पहुंचने पर हर बार बैठक ऐन वक्त या फिर कुछ समय पहले ही रद्द कर दी जाती है। पिछली दो बार की बैठकों का समय न मिल पाने के चलते पार्षदों में रोष व्याप्त था। हर कोई अपने-अपने वार्ड में विकास के मुद्दों को बैठक में पास कराने की मांग रखने की तैयारी में है।
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पार्षदों में एक हजार प्रति गज का शुल्क बना है रोष का कारण
प्रदेश सरकार द्वारा बाहरी कॉलोनियों में विकास के लिए रेजिडेंट वेलफेयर बनाकर एक हजार रुपये प्रति गज के हिसाब से विकास कराने का फैसला लिया है। ये आदेश नगर निगम में लागू कर दिए गए हैं। बताया जा रहा है इसके लागू होने पर शहर की 79 बाहरी कॉलोनियों में विकास का पहिया थम गया है। अमर उजाला माई सिटी ने गत सप्ताह इस मशले को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। पार्षदों में इसको लेकर रोष व्याप्त है। वार्ड-14 पार्षद मंजू कादियान के पति रामचंद्र कादियान ने बताया कि पिछले छह माह से इन कॉलोनियों में विकास कार्य बंद पड़े हैं। कॉलोनियों में रहने वाले अधिकतर लोग पूरा दिन मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का मुश्किल से गुजारा कर पा रहे हैं। इन परिस्थितियों में प्रति गज एक हजार रुपये विकास शुल्क नहीं दे सकते। एक पचास वर्ग गज के प्लाटधारक को पहले अपनी जेब से नगर निगम को 50 हजार रुपये विकास शुल्क के नाम पर जमा कराने होंगे। इसके बाद ही सरकार लोगों को सड़क, नाली व पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा मुहैया कराई जाएंगी। ऐसे में यह मुद्दा भी बैठक में हंगामा खड़ा कर सकता है।


नगर निगम हाउस की बैठक 20 जनवरी को लघु सचिवालय में तीन बजे तय की गई है। नगर निगम कमिश्नर द्वारा इसकी मंजूरी दे दी है। सभी पार्षदों को बैठक का नोटिस भी जारी कर दिया है। बैठक में शहर के विकास के एजेंडों पर चर्चा कर फाइनल रूप दिया जाएगा।
सुरेश वर्मा, मेयर, नगर निगम पानीपत।
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