{"_id":"68016d0eadf1e1492008a6db","slug":"panipat-museum-495-years-old-story-is-fading-away-panipat-news-c-244-1-pnp1007-135436-2025-04-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"पानीपत संग्रहालय : 495 साल पुरानी दास्तां हो रही धूमिल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पानीपत संग्रहालय : 495 साल पुरानी दास्तां हो रही धूमिल
विज्ञापन
पानीपत। पानीपत की तीनों लड़ाइयों के इतिहास को संजोए पानीपत संग्रहालय उपेक्षा का शिकार है। पुरातत्व विभाग इसकी देखरेख नहीं कर पा रहा है। प्रशासन का भी इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। जीटी रोड से प्रतिमाओं को संग्रहालय में स्थानांतरित होने के बाद हर कोई इसको भूल गया है। शहर के एक कोने में स्थित संग्रहालय तक पहुंचने का दिशा बोर्ड तक शहर में नहीं लगाए जा सके हैं।
पानीपत में तीन लड़ाइयां लड़ी गईं। तीनों लड़ाइयों की याद ताजा करने के लिए जीटी रोड पर योद्धाओं की प्रतिमा बनाई गई थी। एलिवेटेड हाईवे निर्माण के समय इसको सिंचाई विभाग के रेस्ट हाउस में स्थानांतरित किया गया। उस समय इसको नई पहचान देने के दावे प्रशासन और पुरातत्व विभाग ने किए थे। आज 20 साल बाद भी इसकी बेहतर रख रखाव नहीं की जा सकी है। गोहाना रोड से लगते दिल्ली पैरलल नहर के बाईपास पर सिंचाई विभाग के दफ्तर के साथ बना पानीपत संग्रहालय इतिहास के 495 सालों की दास्तां संजोए हुए है लेकिन अब यह उपेक्षा का शिकार हो रहा है। संग्रहालय के रखरखाव के लिए प्रशासन का ध्यान नहीं है। इसलिए यह अब पर्यटकों को लुभा नहीं पा रहा है। यहां कभी कभार ही कोई पर्यटक आता है। शेष दिनों में यह वीरान रहता है।
बॉक्स
बाबर और अकबरनामा के चित्र संग्रहित
संग्रहालय का एक मुख्य आकर्षण लघु चित्रों की तस्वीरें हैं। ये लघु चित्र बाबरनामा और अकबरनामा से संबंधित हैं। पानीपत संग्रहालय की स्थापना के पीछे मुख्य उद्देश्य हरियाणा के पुरातत्व, इतिहास, कला और शिल्प के बारे में जानकारी देना और जागरुकता पैदा करना था। यहां प्राचीन वस्तुएं, शिलालेख, मूर्तियां, हथियार और कवच, मिट्टी के बर्तन, पुराने और मूल्यवान दस्तावेज, आभूषण, कला और शिल्प की वस्तुएं प्रदर्शित हैं। यह संग्रहालय पानीपत की लड़ाई में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों और देशभक्त योद्धाओं की बहादुरी से संबंधित लेखों, तस्वीरों और ट्रांस-स्लाइड्स के माध्यम से देखने का एक दुर्लभ अवसर भी प्रदान करता है। ये लघुचित्र बाबरनामा और अकबरनामा से लिए गए हैं। इन लघु चित्रों को नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय, ब्रिटिश लाइब्रेरी और लंदन के विक्टोरिया और अल्बर्ट संग्रहालय जैसे महत्वपूर्ण स्थानों से प्राप्त किया गया है। पहले इस संग्रहालय को नि:शुल्क देखा जा सकता था लेकिन अब पुरातत्व और संग्रहालय विभाग हरियाणा ने यहां टिकट सिस्टम लागू कर दिया है। स्कूली बच्चों के लिए 10, वयस्क के लिए 25 और विदेशी पर्यटकों के लिए 75 रुपये की टिकट निर्धारित की गई है।
विज्ञापन
वर्जन :
जिला संग्रहालय को काला आंब में स्थानांतरित किया जाना है। काला आंब का अलग से प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इसके बाद संग्रहालय मूर्त रूप लेगा।
डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया, उपायुक्त।
विज्ञापन
पानीपत में तीन लड़ाइयां लड़ी गईं। तीनों लड़ाइयों की याद ताजा करने के लिए जीटी रोड पर योद्धाओं की प्रतिमा बनाई गई थी। एलिवेटेड हाईवे निर्माण के समय इसको सिंचाई विभाग के रेस्ट हाउस में स्थानांतरित किया गया। उस समय इसको नई पहचान देने के दावे प्रशासन और पुरातत्व विभाग ने किए थे। आज 20 साल बाद भी इसकी बेहतर रख रखाव नहीं की जा सकी है। गोहाना रोड से लगते दिल्ली पैरलल नहर के बाईपास पर सिंचाई विभाग के दफ्तर के साथ बना पानीपत संग्रहालय इतिहास के 495 सालों की दास्तां संजोए हुए है लेकिन अब यह उपेक्षा का शिकार हो रहा है। संग्रहालय के रखरखाव के लिए प्रशासन का ध्यान नहीं है। इसलिए यह अब पर्यटकों को लुभा नहीं पा रहा है। यहां कभी कभार ही कोई पर्यटक आता है। शेष दिनों में यह वीरान रहता है।
विज्ञापन
बॉक्स
बाबर और अकबरनामा के चित्र संग्रहित
संग्रहालय का एक मुख्य आकर्षण लघु चित्रों की तस्वीरें हैं। ये लघु चित्र बाबरनामा और अकबरनामा से संबंधित हैं। पानीपत संग्रहालय की स्थापना के पीछे मुख्य उद्देश्य हरियाणा के पुरातत्व, इतिहास, कला और शिल्प के बारे में जानकारी देना और जागरुकता पैदा करना था। यहां प्राचीन वस्तुएं, शिलालेख, मूर्तियां, हथियार और कवच, मिट्टी के बर्तन, पुराने और मूल्यवान दस्तावेज, आभूषण, कला और शिल्प की वस्तुएं प्रदर्शित हैं। यह संग्रहालय पानीपत की लड़ाई में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों और देशभक्त योद्धाओं की बहादुरी से संबंधित लेखों, तस्वीरों और ट्रांस-स्लाइड्स के माध्यम से देखने का एक दुर्लभ अवसर भी प्रदान करता है। ये लघुचित्र बाबरनामा और अकबरनामा से लिए गए हैं। इन लघु चित्रों को नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय, ब्रिटिश लाइब्रेरी और लंदन के विक्टोरिया और अल्बर्ट संग्रहालय जैसे महत्वपूर्ण स्थानों से प्राप्त किया गया है। पहले इस संग्रहालय को नि:शुल्क देखा जा सकता था लेकिन अब पुरातत्व और संग्रहालय विभाग हरियाणा ने यहां टिकट सिस्टम लागू कर दिया है। स्कूली बच्चों के लिए 10, वयस्क के लिए 25 और विदेशी पर्यटकों के लिए 75 रुपये की टिकट निर्धारित की गई है।
विज्ञापन
वर्जन :
जिला संग्रहालय को काला आंब में स्थानांतरित किया जाना है। काला आंब का अलग से प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इसके बाद संग्रहालय मूर्त रूप लेगा।
डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया, उपायुक्त।