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PET Yarn: प्लास्टिक की बोतलों को रिसाइक्लिंग कर धागे बना पर्यावरण संरक्षण कर रहा पानीपत, विदेशों में भी धूम
Thu, 09 Feb 2023 07:01 AM IST
भूपेंद्र सिंह
कुशाग्र मिश्र, अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत (हरियाणा)
कुशाग्र मिश्र, अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Thu, 09 Feb 2023 07:01 AM IST
सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में आसमानी रंग की जैकेट पहनकर पहुंचे। इसकी खासियत ये थी कि इसे प्लास्टिक की बोतलों को रिसाइकिल कर बनाए गया था। पानीपत से प्लास्टिक की बोतलों को रिसाइक्लिंग कर बने धागे के उत्पादों की विदेशों में धूम है। अमेरिका, यूरोप, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में इस धागे से बने उत्पाद की बढ़िया मांग है।
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प्लास्टिक की बोतलों को रिसाइक्लिंग कर धागे बनाए।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
संसद में बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आसमानी रंग की जैकेट पहनकर पहुंचे। इसकी खासियत ये थी कि इसे प्लास्टिक की बोतलों को रिसाइकिल कर बनाए गए धागे से तैयार किया गया था। इस जैकेट को पहनकर उन्होंने संसद के पटल से देशवासियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। पानीपत भी प्लास्टिक की बोतलों को रिसाइकिल कर बनाए जा रहे धागे और उसके बने उत्पादों के उत्पाद में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। अमेरिका, यूरोप, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में इसकी अच्छी मांग है।
बीते एक दशक में रिसाइक्लिंग धागे और उससे बने उत्पादों का बाजार दो हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। प्लास्टिक की बोतलों को रिसाइकिल कर इससे बने धागे को पेट यार्न कहा जाता है। पेट से मतलब कोक-पेप्सी आदि की बोतलें हैं और यार्न यानी धागा।
इस धागे से पानीपत में कारपेट, बाथमेट, दरियां और कंबल बनाए जाते हैं, जिन्हें विदेशों में एक्सपोर्ट किया जाता है। पेट यार्न से बने उत्पादों की खासियत यह है कि यह आसानी से खराब नहीं होता। घर के अंदर और बाहर इसके इस्तेमाल में उत्पाद पर कोई फर्क नहीं पड़ता। पानी पड़ने पर खराब भी नहीं होता है।
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बाकी धागों से करीब 20 फीसदी सस्ता होता है पेट यार्न
पुराने कपड़ों की कतरनों को रिसाइकिल कर बन रहे धागे से प्लास्टिक की बोतलों से बन रहा पेट यार्न करीब 20 प्रतिशत तक सस्ता होता है। इसके साथ ही यह मजबूत भी होता है। इसमें रेशे भी नहीं आते हैं। इसे रंगना भी आसान है। इस धागे की कीमत करीब 160 से 200 रुपये प्रतिकिलो है। कीमत में यह फर्क धागे की मोटाई और उसकी गुणवत्ता पर निर्भर करता है।
पानीपत में प्लास्टिक की बोतलों को रिसाइकिल कर बने फाइबर से पेट यार्न बनाने की करीब सात से आठ इकाइयां हैं। एक अनुमान के मुताबिक इन यूनिटों में प्रतिदिन करीब 20 हजार किलोग्राम पेट यार्न का उत्पादन होता है।
प्लास्टिक की बोतलों को रिसाइकिल कर बनाए गए धागे से बने उत्पादों का ग्लोबल रिसाइकिल स्टैंडर्ड (जीआरएस) सर्टिफाइड होना जरूरी है। इसके प्रमाणपत्र के बिना इससे बने उत्पादों को विदेश नहीं भेजा जा सकता है। जीआरएस सर्टिफाइड का टैग लगते ही उत्पाद की विश्वसनीयता बढ़ जाती है। जीआरएस यह बताता है कि कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद के बनने तक कितना रिसाइकिल मैटेरियल इस्तेमाल किया गया है। जीआरएस सर्टिफिकेट भी तभी मिलेगा, जब उत्पाद में रिसाइकिल मैटेरियल की मात्रा 40 प्रतिशत से अधिक हो।
पेट यार्न से बने उत्पादों को लोग कर रहे पसंद
करीब 12 वर्ष से प्लास्टिक की बोतलों को पेट यार्न बना रहा हूं। इस प्रक्रिया में प्लास्टिक की बोतलों के चिप्स बनाकर प्लांट में फाइबर बनाया जाता है। फाइबर से धागा बनाया जाता है। जिससे कारपेट, दरी, बाथमेट यहां तक की शॉल भी बनती है। अब पेट यार्न के साथ ऊन को मिलाकर भी धागा तैयार किया जा रहा है। पेट यार्न से बने उत्पादों की अच्छी मांग है, इसे लोग पसंद कर रहे हैं। - भूपेंद्र जैन, पेट यार्न उत्पादक
आने वाला वक्त प्लास्टिक को रिसाइकिल कर बने उत्पादों का ही है। अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में इसकी बढ़िया मांग है। बाकी देश भी इसे पसंद कर रहे हैं। आगे मांग और बढ़ेगी। सबसे अहम है जीआरएस सर्टिफिकेशन, इसके साथ ही उत्पाद को हाथों हाथ लिया जाता है। - धीरज मिगलानी, निर्यातक
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बीते एक दशक में रिसाइक्लिंग धागे और उससे बने उत्पादों का बाजार दो हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। प्लास्टिक की बोतलों को रिसाइकिल कर इससे बने धागे को पेट यार्न कहा जाता है। पेट से मतलब कोक-पेप्सी आदि की बोतलें हैं और यार्न यानी धागा।
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इस धागे से पानीपत में कारपेट, बाथमेट, दरियां और कंबल बनाए जाते हैं, जिन्हें विदेशों में एक्सपोर्ट किया जाता है। पेट यार्न से बने उत्पादों की खासियत यह है कि यह आसानी से खराब नहीं होता। घर के अंदर और बाहर इसके इस्तेमाल में उत्पाद पर कोई फर्क नहीं पड़ता। पानी पड़ने पर खराब भी नहीं होता है।
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बाकी धागों से करीब 20 फीसदी सस्ता होता है पेट यार्न
पुराने कपड़ों की कतरनों को रिसाइकिल कर बन रहे धागे से प्लास्टिक की बोतलों से बन रहा पेट यार्न करीब 20 प्रतिशत तक सस्ता होता है। इसके साथ ही यह मजबूत भी होता है। इसमें रेशे भी नहीं आते हैं। इसे रंगना भी आसान है। इस धागे की कीमत करीब 160 से 200 रुपये प्रतिकिलो है। कीमत में यह फर्क धागे की मोटाई और उसकी गुणवत्ता पर निर्भर करता है।
पानीपत में प्लास्टिक की बोतलों को रिसाइकिल कर बने फाइबर से पेट यार्न बनाने की करीब सात से आठ इकाइयां हैं। एक अनुमान के मुताबिक इन यूनिटों में प्रतिदिन करीब 20 हजार किलोग्राम पेट यार्न का उत्पादन होता है।
प्लास्टिक की बोतलों को रिसाइकिल कर बनाए गए धागे से बने उत्पादों का ग्लोबल रिसाइकिल स्टैंडर्ड (जीआरएस) सर्टिफाइड होना जरूरी है। इसके प्रमाणपत्र के बिना इससे बने उत्पादों को विदेश नहीं भेजा जा सकता है। जीआरएस सर्टिफाइड का टैग लगते ही उत्पाद की विश्वसनीयता बढ़ जाती है। जीआरएस यह बताता है कि कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पाद के बनने तक कितना रिसाइकिल मैटेरियल इस्तेमाल किया गया है। जीआरएस सर्टिफिकेट भी तभी मिलेगा, जब उत्पाद में रिसाइकिल मैटेरियल की मात्रा 40 प्रतिशत से अधिक हो।
पेट यार्न से बने उत्पादों को लोग कर रहे पसंद
करीब 12 वर्ष से प्लास्टिक की बोतलों को पेट यार्न बना रहा हूं। इस प्रक्रिया में प्लास्टिक की बोतलों के चिप्स बनाकर प्लांट में फाइबर बनाया जाता है। फाइबर से धागा बनाया जाता है। जिससे कारपेट, दरी, बाथमेट यहां तक की शॉल भी बनती है। अब पेट यार्न के साथ ऊन को मिलाकर भी धागा तैयार किया जा रहा है। पेट यार्न से बने उत्पादों की अच्छी मांग है, इसे लोग पसंद कर रहे हैं। - भूपेंद्र जैन, पेट यार्न उत्पादक
आने वाला वक्त प्लास्टिक को रिसाइकिल कर बने उत्पादों का ही है। अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में इसकी बढ़िया मांग है। बाकी देश भी इसे पसंद कर रहे हैं। आगे मांग और बढ़ेगी। सबसे अहम है जीआरएस सर्टिफिकेशन, इसके साथ ही उत्पाद को हाथों हाथ लिया जाता है। - धीरज मिगलानी, निर्यातक