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Panipat News: संसद में उठी आवाज पर दिल्ली एनसीआर से बाहर नहीं हो पाया पानीपत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 17 May 2024 06:15 AM IST
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Panipat could not be removed from Delhi NCR due to voice raised in Parliament
पानीपत। पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने पर ग्रैप के दिल्ली एनसीआर के नियम लागू होने पर पानीपत के उद्यमियों को परेशानी होती है। हर साल सर्दी के मौसम में दिल्ली से बेहतर पर्यावरण होने के बाद भी उनके नियमों पर काम करना पड़ता है। उद्यमी अपनी एसोसिएशन और सामूहिक रूप से इनको लेकर आवाज उठा चुके हैं। इनकी आवाज संसद और राज्यसभा में भी उठी। सांसद संजय भाटिया और उनके बाद राज्यसभा सांसद कृष्णलाल पंवार ने सदन में आवाज उठा कर उस समय खूब वाहवाही भी बटोरी, लेकिन इसका कोई रास्ता आज तक नहीं निकल पाया। उद्यमियों को आज भी दिल्ली एनसीआर के नियमों पर चलना पड़ रहा है।
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पानीपत में करीब 20 हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। यहां से करीब 80 हजार करोड़ का घरेलू और करीब 15 हजार करोड़ का निर्यात है। पानीपत दिल्ली एनसीआर में आता है। सर्दी के मौसम में दिल्ली एनसीआर का एयर क्वालिटी इंडेक्स दिल्ली एनसीआर में ग्रैप लागू कर दिया जाता है। ऐसे में प्रदूषण नियंंत्रण बोर्ड भी सख्त हो जाता है। कई बार कार्रवाई भी की जाती है। उद्यमी लंबे समय से ग्रैप के नियमों को लेकर छूट की मांग उठा रहे हैं और विधायक व सांसद तक मिल चुके हैं। उनको हर जगह भरोसा भी मिला, लेकिन समाधान आज तक नहीं है। ऐसे में लोकसभा-2024 के आम चुनाव में उद्यमी प्रत्याशियों ने इसके समाधान की उम्मीद से देख रहे हैं।
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कोट्स फोटो- 24
उद्यमियों पर पड़ता है अतिरिक्त बोझ
हैंडलूम एक्सपोर्ट मैन्यूफैक्चरर एसोसिएशन के प्रधान रमेश वर्मा ने बताया कि पानीपत का एक्यूआई दिल्ली से बहुत कम होता है। जबकि ग्रैप के नियम दिल्ली के लागू किए जाते हैं। ऐसे में उद्यमियों को अपने प्रतिष्ठान बंद भी करने पड़ते हैं। इसके अलावा अलग-अलग नियमों का पालन करना पड़ता है। जिसका उद्यमियों पर अतिरिक्त बोझ भी पड़ता है।
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कोट्स फोटो- 26
छोटी सी चूक उद्यमियों पर भारी
कुटानी रोड इंडस्टि्यल एसोसिएशन के प्रधान राकेश चुघ ने बताया कि उद्यमियों को स्थानीय समस्याओं से जूझना पड़ता है। सर्दी के मौसम में ग्रैप के नियम लागू कर दिए जाते हैं। इनमें छोटी सी चूक उद्यमियों पर भारी पड़ती है। इनको लागू करने में उद्यमियों को अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ता है। सबसे बड़ी चुनौती जेनरेटर की होती है। बिजली जाने पर इसका सहारा लेना जरूरी होता है, लेकिन एक्यूआई अधिक होने पर इसको चालू नहीं कर सकते हैं।



कोट्स फोटो-25
सिर्फ समाधान का मिला भरोसा
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स पानीपत चैप्टर के प्रधान विनोद धमीजा ने बताया कि उद्यमियों की समस्याओं को स्थानीय अधिकारियों से लेकर नेताओं तक पहुंचा चुके हैं। उनको हर मंच पर इनके समाधान का भरोसा मिला है। पानीपत को दिल्ली एनसीआर से बाहर नहीं किया जा सकता है तो ग्रैप के नियमों में एक्यूआई के आधार पर छूट दी जानी चाहिए।
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