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Panipat News: दो बीमा कंपनी को घर के कागजात लौटाने और क्लेम देने का आदेश
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पानीपत। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ऋण सुरक्षा बीमा के एक मामले की सुनवाई के बाद एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज और एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस को मकान के गिरवी कागजात लौटाने, क्लेम राशि का समायोजन करने व हर्जाना देने का आदेश सुनाया है।
आयोग ने दोनों कंपनियों को 45 दिनों के भीतर 11 हजार रुपये का हर्जाना, अदालती खर्च और गिरवी रखे मकान की रजिस्ट्री वापस करने का आदेश दिया है। काबड़ी रोड कच्चा फाटक निवासी मनोज कुमार ने इस सबंध में याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में उनके पिता मिथु प्रसाद ने अपने घर पर एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज से पांच लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया था।
लोन स्वीकृत करते समय कंपनी ने प्रीमियम के रूप में 6590 रुपये काट लिए और एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस की पॉलिसी जारी कर दी। उनके पिता का 11 अप्रैल 2019 को निधन हो गया। उन्होंने लोन चुकाने के लिए बीमा क्लेम से मांग की तो कंपनियों ने क्लेम खारिज कर दिया। उनको कहा कि कागजों में बीमित व्यक्ति बेटा है और पिता केवल नॉमिनी दर्ज हैं। कंपनियों का तर्क था कि बीमित व्यक्ति (बेटा) जीवित है, इसलिए पिता की मृत्यु पर क्लेम नहीं बनता।
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आयोग के अध्यक्ष डॉ. आर.के. डोगरा व सदस्यों ने दस्तावेजों की गहनता से जांच की। इसमें दोनों पक्षों को सुना। आयोग के सामने आया कि लोन पिता के नाम पर स्वीकृत हुआ था और प्रीमियम भी उन्हीं के खाते से काटा गया था। बेटे को महज गारंटर बनाया गया था।
आयोग ने माना कि एचडीबी फाइनेंशियल खुद मास्टर पॉलिसी होल्डर है। उनके कर्मचारियों ने गलत नाम दर्ज किया है तो उसकी लापरवाही का खामियाजा उपभोक्ता नहीं भुगत सकता। पिता ने 60 किश्तों में से करीब 33-34 किश्तें जमा करा दी थी। आयोग ने बैंक के बकाया लोन लगभग 1.50 लाख रुपये को क्लेम राशि से समायोजित कर शेष बची राशि मृतक के बेटे को लौटाने के निर्देश दिए। ब्यूरो
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आयोग ने दोनों कंपनियों को 45 दिनों के भीतर 11 हजार रुपये का हर्जाना, अदालती खर्च और गिरवी रखे मकान की रजिस्ट्री वापस करने का आदेश दिया है। काबड़ी रोड कच्चा फाटक निवासी मनोज कुमार ने इस सबंध में याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में उनके पिता मिथु प्रसाद ने अपने घर पर एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज से पांच लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया था।
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लोन स्वीकृत करते समय कंपनी ने प्रीमियम के रूप में 6590 रुपये काट लिए और एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस की पॉलिसी जारी कर दी। उनके पिता का 11 अप्रैल 2019 को निधन हो गया। उन्होंने लोन चुकाने के लिए बीमा क्लेम से मांग की तो कंपनियों ने क्लेम खारिज कर दिया। उनको कहा कि कागजों में बीमित व्यक्ति बेटा है और पिता केवल नॉमिनी दर्ज हैं। कंपनियों का तर्क था कि बीमित व्यक्ति (बेटा) जीवित है, इसलिए पिता की मृत्यु पर क्लेम नहीं बनता।
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आयोग के अध्यक्ष डॉ. आर.के. डोगरा व सदस्यों ने दस्तावेजों की गहनता से जांच की। इसमें दोनों पक्षों को सुना। आयोग के सामने आया कि लोन पिता के नाम पर स्वीकृत हुआ था और प्रीमियम भी उन्हीं के खाते से काटा गया था। बेटे को महज गारंटर बनाया गया था।
आयोग ने माना कि एचडीबी फाइनेंशियल खुद मास्टर पॉलिसी होल्डर है। उनके कर्मचारियों ने गलत नाम दर्ज किया है तो उसकी लापरवाही का खामियाजा उपभोक्ता नहीं भुगत सकता। पिता ने 60 किश्तों में से करीब 33-34 किश्तें जमा करा दी थी। आयोग ने बैंक के बकाया लोन लगभग 1.50 लाख रुपये को क्लेम राशि से समायोजित कर शेष बची राशि मृतक के बेटे को लौटाने के निर्देश दिए। ब्यूरो