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Panipat News: नारद मोह लीला के मंचन से अहंकार त्यागने और विनम्रता अपनाने का दिया संदेश
Mon, 12 Oct 2026 03:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Mon, 12 Oct 2026 03:36 AM IST
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रामलीला में नारद लीला का मंचन करते कलाकार। संवाद
समालखा। काठ मंडी स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में श्री आदर्श मित्र ड्रामेटिक क्लब के तत्वावधान में आयोजित रामलीला के पहले दिन रविवार को नारद मोह लीला का मंचन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना और हनुमान चालीसा के पाठ के साथ हुआ। कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की गई शानदार प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
लीला के माध्यम से दिखाया गया कि देवर्षि नारद हिमालय की वादियों में कठिन तपस्या करते हैं। उनकी तपस्या को भंग करने में कामदेव भी असफल रहते हैं, जिसके परिणामस्वरूप नारद जी को अपनी विजय पर अहंकार हो जाता है। वे अपने तप के प्रभाव का बखान भगवान ब्रह्मा और भगवान शिव के सामने करते हैं। नारद जी का यही अहंकार दूर करने के लिए भगवान विष्णु एक विशेष माया की रचना करते हैं।
लीला के अगले प्रसंग में नारद राजा शीलनिधि की पुत्री राजकुमारी विश्वमोहिनी के रूप पर अत्यधिक मोहित हो जाते हैं और भगवान विष्णु से उनके जैसा रूप मांग बैठते हैं। भगवान विष्णु उन्हें वानर जैसा मुख प्रदान कर देते हैं। स्वयंवर के दौरान राजकुमारी विश्वमोहिनी भगवान विष्णु को वरमाला पहना देती हैं। जब नारद को अपना अपमान महसूस होता है तो वे क्रोधित होकर भगवान विष्णु को स्त्री वियोग का श्राप दे देते हैं। बाद में भगवान विष्णु की माया समाप्त होने पर नारद को अपनी भूल का अहसास होता है और वे पश्चाताप करते हैं।
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कलाकारों ने इस सुंदर मंचन के जरिए दर्शकों को यह गहरा संदेश दिया कि मनुष्य को कभी भी अपने बल या सफलता पर घमंड नहीं करना चाहिए। अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है, इसलिए जीवन में हमेशा विनम्रता अपनानी चाहिए।
इस दौरान मंच पर नारद की भूमिका अशोक शर्मा, शिव की भूमिका प्रवीण सिंगला, विष्णु की भूमिका महेश मित्तल और ब्रह्मा की भूमिका मनोज राठौर ने निभाई। इस अवसर पर राधेश्याम जिंदल, अनिल बंसल, अंकुश गुप्ता, रविंदर धीमान, डॉ. रविंदर, संजय गर्ग और प्रदीप शर्मा मौजूद रहे। संवाद
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लीला के माध्यम से दिखाया गया कि देवर्षि नारद हिमालय की वादियों में कठिन तपस्या करते हैं। उनकी तपस्या को भंग करने में कामदेव भी असफल रहते हैं, जिसके परिणामस्वरूप नारद जी को अपनी विजय पर अहंकार हो जाता है। वे अपने तप के प्रभाव का बखान भगवान ब्रह्मा और भगवान शिव के सामने करते हैं। नारद जी का यही अहंकार दूर करने के लिए भगवान विष्णु एक विशेष माया की रचना करते हैं।
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लीला के अगले प्रसंग में नारद राजा शीलनिधि की पुत्री राजकुमारी विश्वमोहिनी के रूप पर अत्यधिक मोहित हो जाते हैं और भगवान विष्णु से उनके जैसा रूप मांग बैठते हैं। भगवान विष्णु उन्हें वानर जैसा मुख प्रदान कर देते हैं। स्वयंवर के दौरान राजकुमारी विश्वमोहिनी भगवान विष्णु को वरमाला पहना देती हैं। जब नारद को अपना अपमान महसूस होता है तो वे क्रोधित होकर भगवान विष्णु को स्त्री वियोग का श्राप दे देते हैं। बाद में भगवान विष्णु की माया समाप्त होने पर नारद को अपनी भूल का अहसास होता है और वे पश्चाताप करते हैं।
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कलाकारों ने इस सुंदर मंचन के जरिए दर्शकों को यह गहरा संदेश दिया कि मनुष्य को कभी भी अपने बल या सफलता पर घमंड नहीं करना चाहिए। अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है, इसलिए जीवन में हमेशा विनम्रता अपनानी चाहिए।
इस दौरान मंच पर नारद की भूमिका अशोक शर्मा, शिव की भूमिका प्रवीण सिंगला, विष्णु की भूमिका महेश मित्तल और ब्रह्मा की भूमिका मनोज राठौर ने निभाई। इस अवसर पर राधेश्याम जिंदल, अनिल बंसल, अंकुश गुप्ता, रविंदर धीमान, डॉ. रविंदर, संजय गर्ग और प्रदीप शर्मा मौजूद रहे। संवाद