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Panipat News: पति की मौत के बाद नहीं छोड़ा हौसला, अब ताइक्वांडो में बेटियों को बना रहीं आत्मनिर्भर

Mon, 12 Oct 2026 03:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत Updated Mon, 12 Oct 2026 03:42 AM IST
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Did not lose heart after husband's death; now empowering daughters to become self-reliant through Taekwondo.
ताइक्वांडो कोच पूनम। स्वय
पानीपत। मूलरूप से यूपी के आगरा से संबंध रखने वाली पूनम ने जीवन में कई मुश्किल दौर देखे। बचपन में खेल के प्रति लगाव, लोगों के ताने, शादी के बाद पति को खोने का असहनीय दुख और फिर खुद को संभालकर आगे बढ़ने का सफर आसान नहीं था लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दोबारा ताइक्वांडो का अभ्यास शुरू किया और आज ताइक्वांडो में बेटियों को प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही हैं। वह फिलहाल खेल विभाग में ताइक्वांडो कोच है।
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पूनम ने बताया कि उन्होंने नौवीं कक्षा में पढ़ने के दौरान ताइक्वांडो खेलना शुरू किया था। उस समय खेलों में लड़कियों की भागीदारी कम होती थी। उन्हें प्रशिक्षण लेने के लिए घर से करीब नौ किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। उन्होंने नियमित अभ्यास जारी रखा। शुरुआत में आसपास के लोगों की बातें भी सुननी पड़ती थीं पर माता-पिता ने उनका साथ दिया और खेल के प्रति उनके जुनून को समझते हुए प्रोत्साहित किया। 2007 में शादी हुई और 14 महीने बाद ही उनके पति का निधन हो गया। यह उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था। पति को खोने के दुख से उनका हौसला टूटने लगा। इसी समय उनके एक सीनियर ने उन्हें दोबारा प्रशिक्षण के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने फिर से खेलने का फैसला किया और दो राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। खेल के साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखी और बीपीएड की पढ़ाई पूरी करने के बाद हरियाणा में खेल विभाग में सरकारी कोच के पद पर अपनी सेवाएं देना शुरू किया। आज वह अपने संघर्ष और अनुभव के दम पर दूसरी लड़कियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। फिलहाल उनके मार्गदर्शन में 25 लड़कियां ताइक्वांडो का प्रशिक्षण ले रही हैं। इनमें पांच साल की छोटी बच्चियों से लेकर 21 साल तक की लड़कियां शामिल हैं। वह लड़कियों को खेल की तकनीक सिखाने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास और मुश्किल परिस्थितियों से लड़ना सिखाती है। उन्होंने कहा कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आ जाएं, महिलाओं को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने और आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करना चाहिए। संवाद
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