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आरटीआई में गलत सूचना देने पर थाना सनौली के तत्कालीन एचएचओ पर कार्रवाई के आदेश
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आशाराम केस के मुख्य गवाह महेंद्र चावला की मां की तरफ से लगाई गई आरटीआई में गलत सूचना देने पर सूचना आयोग ने एसपी को पत्र भेज तत्कालीन थाना सनौली एसएचओ सुरेंद्र दहिया पर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। साथ ही लिखा है कि तीन माह में कार्रवाई की रिपोर्ट सूचना आयोग के कार्यालय में पेश करनी है।
सनौली खुर्द निवासी महेंद्र चावला ने बताया कि नवंबर 2019 में पुरानी रंजिश के चलते सनौली खुर्द की सरपंच ससुर ने उनके सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में उनपर हमला किया था। उनकी आंख पर मुक्का मारा था और मुंह पर काट लिया था। मामले में उन्होंने सनौली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसके बाद उनकी मां गोपाली देवी ने आरटीआई के माध्यम से पानीपत पुलिस से दर्ज रिपोर्ट से संबंधित कुछ दस्तावेजों की मांग की थी। पानीपत पुलिस की तरफ से जवाब दिया गया कि मांगे गए दस्तावेज केस फाइल के साथ ही कोर्ट में जमा करा दिए गए हैं। जिसके बाद उन्होंने संबंधित न्यायाधीश की अदालत से रिकॉर्ड लेने के लिए नकल फार्म जमा कराया। कोर्ट की तरफ से लिखकर दिया गया कि संबंधित जांच अधिकारी ने उपरोक्त दस्तावेज केस फाइल में लगाकर जमा नहीं कराए हैं। कोर्ट की तरफ से पत्र मिलते ही उन्होंने सूचना आयोग में आरटीआई के जवाब में गलत रिपोर्ट देने की शिकायत दर्ज कराई।
विभागीय कार्रवाई करने के लिए आदेश
पूर्व डीजीपी एवं मुख्य सूचना आयुक्त यशपाल सिंघल ने फाइल पर उपलब्ध सभी तथ्यों के आधार पर फैसला सुनाया कि थाने का रिकॉर्ड कीपर थाना इंचार्ज होता है। उसी के द्वारा सूचना संबंधी दस्तावेजों को छिपाया गया है। यह गलत सूचना आवेदनकर्ता को दी गई है। जिसके बाद एसपी को थाना प्रभारी पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
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सनौली खुर्द निवासी महेंद्र चावला ने बताया कि नवंबर 2019 में पुरानी रंजिश के चलते सनौली खुर्द की सरपंच ससुर ने उनके सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में उनपर हमला किया था। उनकी आंख पर मुक्का मारा था और मुंह पर काट लिया था। मामले में उन्होंने सनौली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसके बाद उनकी मां गोपाली देवी ने आरटीआई के माध्यम से पानीपत पुलिस से दर्ज रिपोर्ट से संबंधित कुछ दस्तावेजों की मांग की थी। पानीपत पुलिस की तरफ से जवाब दिया गया कि मांगे गए दस्तावेज केस फाइल के साथ ही कोर्ट में जमा करा दिए गए हैं। जिसके बाद उन्होंने संबंधित न्यायाधीश की अदालत से रिकॉर्ड लेने के लिए नकल फार्म जमा कराया। कोर्ट की तरफ से लिखकर दिया गया कि संबंधित जांच अधिकारी ने उपरोक्त दस्तावेज केस फाइल में लगाकर जमा नहीं कराए हैं। कोर्ट की तरफ से पत्र मिलते ही उन्होंने सूचना आयोग में आरटीआई के जवाब में गलत रिपोर्ट देने की शिकायत दर्ज कराई।
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विभागीय कार्रवाई करने के लिए आदेश
पूर्व डीजीपी एवं मुख्य सूचना आयुक्त यशपाल सिंघल ने फाइल पर उपलब्ध सभी तथ्यों के आधार पर फैसला सुनाया कि थाने का रिकॉर्ड कीपर थाना इंचार्ज होता है। उसी के द्वारा सूचना संबंधी दस्तावेजों को छिपाया गया है। यह गलत सूचना आवेदनकर्ता को दी गई है। जिसके बाद एसपी को थाना प्रभारी पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
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