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पानीपत के बाद समालखा की फैक्टरियों में टीबी के रोगियों को चिह्नित करने का अभियान शुरू
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समालखा। उद्यमियों की मदद से स्वास्थ्य विभाग 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का प्रयास कर रहा है। अधिक से अधिक लोगों की टीबी जांच करने और टीबी रोगियों को चिह्नित करने के लिए उद्यमियों की मदद ली जा रही है। उद्यमी अपने श्रमिकों को टीबी के खिलाफ जागरूक कर रहे हैं। एक माह के दौरान पानीपत के औद्योगिक क्षेत्रों के 40 हजार श्रमिकों की जांच हो चुकी है। इनमें टीबी के 25 रोगी मिले हैं। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग ने समालखा के इंडस्ट्रियल एरिया में कैंप लगाकर श्रमिकों की जांच की। बलगम के नमूने लिए गए। मंगलवार को लगभग 300 श्रमिकों की जांच हुई है। विभाग अब पानीपत के बाद समालखा, इसराना, बापौली और मतलौडा क्षेत्र में श्रमिकों की जांच करेगा। कैंप में डॉ. संजय आंतिल और डॉ. आशीष कुमार मौजूद रहे।
सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कादियान ने कहा कि भारत को 2025 तक टीबी मुक्त बनाना है। टीबी रोग किसी भी आयु में हो सकता है। दो सप्ताह से खांसी वाले मरीजों को टीबी की जांच अवश्य करानी चाहिए। जिले में सवा चार साल में 14 हजार 357 पाजिटिव मरीज मिले हैं। इतने ही समय में 560 मरीजों की मौत भी हुई है। हर साल विभिन्न ड्राइव के जरिए जिला में 10 लाख से अधिक लोगों की टीबी जांच की जाती है। फिलहाल करीब चार हजार मरीज दवा खा रहे हैं। जिले में 10 हजार से अधिक कंपनियां-फैक्टिरियां हैं। इनमें करीब 250 डाई हाउस हैं। कारखानों में लाखों श्रमिक काम करते हैं। कारखानों के मालिकों से अपील है कि वे श्रमिकों को इतना समय जरूर दें ताकि वे टीबी जांच कराकर, टीम का सहयोग कर सकें।
पाजिटिव रोगी तलाशने पर भत्ता
500 रुपये मासिक पोषण भत्ता मरीज को।
500 भत्ता, पाजिटिव मरीज को तलाशने पर।
500 रुपये निजी अस्पताल को निश्चय पोर्टल पर डिटेल देने पर।
1500 रुपये ट्रीटमेंट सपोर्टर को।
5000 रुपये एमडीआर मरीज को दवा खिलाने पर।
दो साल की सजा का प्रावधान :
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की है। टीबी रोगियों की संख्या छिपाने और डाटा स्वास्थ्य विभाग को नहीं देने वाले निजी चिकित्सकों को अब छह माह से दो साल तक की सजा हो सकती है। जुर्माना भी चुकाना पड़ सकता है।
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सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कादियान ने कहा कि भारत को 2025 तक टीबी मुक्त बनाना है। टीबी रोग किसी भी आयु में हो सकता है। दो सप्ताह से खांसी वाले मरीजों को टीबी की जांच अवश्य करानी चाहिए। जिले में सवा चार साल में 14 हजार 357 पाजिटिव मरीज मिले हैं। इतने ही समय में 560 मरीजों की मौत भी हुई है। हर साल विभिन्न ड्राइव के जरिए जिला में 10 लाख से अधिक लोगों की टीबी जांच की जाती है। फिलहाल करीब चार हजार मरीज दवा खा रहे हैं। जिले में 10 हजार से अधिक कंपनियां-फैक्टिरियां हैं। इनमें करीब 250 डाई हाउस हैं। कारखानों में लाखों श्रमिक काम करते हैं। कारखानों के मालिकों से अपील है कि वे श्रमिकों को इतना समय जरूर दें ताकि वे टीबी जांच कराकर, टीम का सहयोग कर सकें।
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पाजिटिव रोगी तलाशने पर भत्ता
500 रुपये मासिक पोषण भत्ता मरीज को।
500 भत्ता, पाजिटिव मरीज को तलाशने पर।
500 रुपये निजी अस्पताल को निश्चय पोर्टल पर डिटेल देने पर।
1500 रुपये ट्रीटमेंट सपोर्टर को।
5000 रुपये एमडीआर मरीज को दवा खिलाने पर।
दो साल की सजा का प्रावधान :
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की है। टीबी रोगियों की संख्या छिपाने और डाटा स्वास्थ्य विभाग को नहीं देने वाले निजी चिकित्सकों को अब छह माह से दो साल तक की सजा हो सकती है। जुर्माना भी चुकाना पड़ सकता है।
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