{"_id":"615b6c068ebc3e62975501a4","slug":"now-entrepreneurs-will-not-have-to-take-permission-from-the-authority-to-exploit-groundwater-panipat-news-knl854626141","type":"story","status":"publish","title_hn":"उद्योगपतियों की सबसे बड़ी मांग पूरी, अब उद्यमियों के लिए हुआ राज्य भूजल प्राधिकरण का गठन, अगले माह तक लेनी होगी सभी को अनुमति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उद्योगपतियों की सबसे बड़ी मांग पूरी, अब उद्यमियों के लिए हुआ राज्य भूजल प्राधिकरण का गठन, अगले माह तक लेनी होगी सभी को अनुमति
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकार ने वाटर रिसोर्सेज अथॉरिटी का गठन कर उद्यमियों की सबसे बड़ी मांग पूरी कर दी है। अब उद्यमियों को भूजल प्राधिकरण से भूजल का दोहन करने की अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी। अब राज्य सरकार की अथॉरिटी से ही अनुमति मिलेगी। इसके तहत सभी उद्यमियों से 31 अक्तूबर तक भूजल का दोहन करने की अनुमति के लिए आवेदन मांगे हैं। 31 अक्तूबर के बाद पुराने आवेदन नहीं लिए जाएंगे। साथ ही बिना एनओसी के भूजल का दोहन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अथॉरिटी के चेयरमैन की ओर से ये नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है।
दरअसल, पानीपत के उद्यमी पिछले 10 साल से तमिलनाडु की तर्ज पर प्रदेश में राज्य प्राधिकरण के गठन की मांग कर रहे थे, क्योंकि केंद्रीय भूजल प्राधिकरण से अनुमति लेने की प्रक्रिया काफी जटिल थी। देश भर से यहां आवेदन आते हैं, इसलिए अनुमति लेना काफी मुश्किल हो रहा था। फिलहाल केंद्रीय भूजल प्राधिकरण में जिले के 40 बड़े उद्योगों ने आवेदन किया है। इनमें 30 इंडस्ट्री टेक्सटाइल की हैं। ये आवेदन एक साल पहले किए गए थे, लेकिन अब तक इनको अनुमति नहीं मिली है।
अब भी जिले में 2 हजार से अधिक उद्योग बिना एनओसी के अवैध रूप से हर रोज 8 करोड़ लीटर भूमिगत जल का दोहन कर रहे हैं। अब तक मात्र 7 उद्योगों के पास ही भूमिगत जल के दोहन की अनुमति है। इससे पानीपत का भूमिगत जल स्तर लगातार गिर रहा है। पानीपत में पिछले 10 साल में 10 फुट भूमिगत जल स्तर गिर चुका है।
विज्ञापन
110 इंडस्ट्री को क्लोजर नोटिस जारी किया
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय भूजल बोर्ड इन दिनों जल दोहन और पर्यावरण प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्री पर लगातार कार्रवाई कर रहा है। अब तक करीब 110 इंडस्ट्री में खामियां मिलने पर क्लोजर नोटिस थमाए जा चुके हैं। इनमें से 30 प्रतिशत इंडस्ट्री पर अनुमति के बिना जल दोहन के तहत कार्रवाई की गई है। 31 अक्तूबर तक उद्यमी ऑनलाइन एनओसी के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद उद्यमियों को जुर्माना देना होगा।
सिर्फ एक रियल एस्टेट कंपनी के पास अनुमति
पानीपत में करीब 20 हजार छोटी-बड़ी इंडस्ट्री हैं। अब तक सात इंडस्ट्री और एक रियल एस्टेट कंपनी जल दोहन की अनुमति से चल रही हैं। बड़ी संख्या में इंडस्ट्री अवैध रूप से पानी का दोहन कर रही हैं। इनमें पानीपत रिफाइनरी, एनएफएल और थर्मल समेत बड़ी इंडस्ट्री शामिल हैं। सबसे हैरान करने वाला विषय रियल एस्टेट कंपनियों की अनुमति नहीं लेना है। अब तक केवल एक ही कंपनी एनओसी ले पाई है।
किसी भी डाइंग यूनिट के पास नहीं अनुमति
एक साल पहले दिल्ली के शैलेश कुमार की शिकायत पर सीपीसीबी ने पानीपत की 55 इंडस्ट्रीज के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। सेक्टर-29 के पार्ट-टू में 550 से अधिक डाइंग यूनिट हैं, जो बिना अनुमति के पानी निकाल रही हैं। इस ओर तो बोर्ड का अभी ध्यान ही नहीं गया है।
ग्राउंड वाटर की क्वालिटी खराब होने पर सील होंगे सभी ट्यूबवेल
पिछले साल सीपीसीबी ने नगर निगम को पेयजल के लिए उपयोग हो रहे ग्राउंड वाटर की जांच करने का आदेश दिया था। साथ ही कहा कि जो विभाग पानी की सप्लाई कर रहा है। उस पानी के सैंपल की जांच होनी चाहिए। यह जांच पानी जांचने वाली किसी एजेंसी से कराई जाए। अगर पानी की क्वॉलिटी खराब है तो उस ट्यूबवेल को सील कर दिया जाए, लेकिन इस संबंध में भी उचित कदम नहीं उठाए गए।
सरकार ने राज्यस्तर पर भूजल प्राधिकरण का गठन किया है। ये अच्छी बात है अब जल्द एनओसी मिलेगी। पहले एनओसी की प्रक्रिया बहुत जटिल थी। उनकी लंबे समय से मांग थी कि राज्यस्तर पर प्राधिकरण का गठन किया जाए। उद्यमी एनओसी के लिए आवेदन कर रहे थे लेकिन अनुमति नहीं मिल रही थी। अब उद्यमी आसानी से अनुमति ले सकते हैं।
- भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
विज्ञापन
दरअसल, पानीपत के उद्यमी पिछले 10 साल से तमिलनाडु की तर्ज पर प्रदेश में राज्य प्राधिकरण के गठन की मांग कर रहे थे, क्योंकि केंद्रीय भूजल प्राधिकरण से अनुमति लेने की प्रक्रिया काफी जटिल थी। देश भर से यहां आवेदन आते हैं, इसलिए अनुमति लेना काफी मुश्किल हो रहा था। फिलहाल केंद्रीय भूजल प्राधिकरण में जिले के 40 बड़े उद्योगों ने आवेदन किया है। इनमें 30 इंडस्ट्री टेक्सटाइल की हैं। ये आवेदन एक साल पहले किए गए थे, लेकिन अब तक इनको अनुमति नहीं मिली है।
विज्ञापन
अब भी जिले में 2 हजार से अधिक उद्योग बिना एनओसी के अवैध रूप से हर रोज 8 करोड़ लीटर भूमिगत जल का दोहन कर रहे हैं। अब तक मात्र 7 उद्योगों के पास ही भूमिगत जल के दोहन की अनुमति है। इससे पानीपत का भूमिगत जल स्तर लगातार गिर रहा है। पानीपत में पिछले 10 साल में 10 फुट भूमिगत जल स्तर गिर चुका है।
विज्ञापन
110 इंडस्ट्री को क्लोजर नोटिस जारी किया
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय भूजल बोर्ड इन दिनों जल दोहन और पर्यावरण प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्री पर लगातार कार्रवाई कर रहा है। अब तक करीब 110 इंडस्ट्री में खामियां मिलने पर क्लोजर नोटिस थमाए जा चुके हैं। इनमें से 30 प्रतिशत इंडस्ट्री पर अनुमति के बिना जल दोहन के तहत कार्रवाई की गई है। 31 अक्तूबर तक उद्यमी ऑनलाइन एनओसी के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद उद्यमियों को जुर्माना देना होगा।
सिर्फ एक रियल एस्टेट कंपनी के पास अनुमति
पानीपत में करीब 20 हजार छोटी-बड़ी इंडस्ट्री हैं। अब तक सात इंडस्ट्री और एक रियल एस्टेट कंपनी जल दोहन की अनुमति से चल रही हैं। बड़ी संख्या में इंडस्ट्री अवैध रूप से पानी का दोहन कर रही हैं। इनमें पानीपत रिफाइनरी, एनएफएल और थर्मल समेत बड़ी इंडस्ट्री शामिल हैं। सबसे हैरान करने वाला विषय रियल एस्टेट कंपनियों की अनुमति नहीं लेना है। अब तक केवल एक ही कंपनी एनओसी ले पाई है।
किसी भी डाइंग यूनिट के पास नहीं अनुमति
एक साल पहले दिल्ली के शैलेश कुमार की शिकायत पर सीपीसीबी ने पानीपत की 55 इंडस्ट्रीज के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। सेक्टर-29 के पार्ट-टू में 550 से अधिक डाइंग यूनिट हैं, जो बिना अनुमति के पानी निकाल रही हैं। इस ओर तो बोर्ड का अभी ध्यान ही नहीं गया है।
ग्राउंड वाटर की क्वालिटी खराब होने पर सील होंगे सभी ट्यूबवेल
पिछले साल सीपीसीबी ने नगर निगम को पेयजल के लिए उपयोग हो रहे ग्राउंड वाटर की जांच करने का आदेश दिया था। साथ ही कहा कि जो विभाग पानी की सप्लाई कर रहा है। उस पानी के सैंपल की जांच होनी चाहिए। यह जांच पानी जांचने वाली किसी एजेंसी से कराई जाए। अगर पानी की क्वॉलिटी खराब है तो उस ट्यूबवेल को सील कर दिया जाए, लेकिन इस संबंध में भी उचित कदम नहीं उठाए गए।
सरकार ने राज्यस्तर पर भूजल प्राधिकरण का गठन किया है। ये अच्छी बात है अब जल्द एनओसी मिलेगी। पहले एनओसी की प्रक्रिया बहुत जटिल थी। उनकी लंबे समय से मांग थी कि राज्यस्तर पर प्राधिकरण का गठन किया जाए। उद्यमी एनओसी के लिए आवेदन कर रहे थे लेकिन अनुमति नहीं मिल रही थी। अब उद्यमी आसानी से अनुमति ले सकते हैं।
- भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन