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Panipat News: प्री मैच्योग डिलीवरी में बहरेपन संग जन्म ले रहे नवजात
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पानीपत। प्री मैच्योर डिलीवरी बहरेपन का बड़ा कारण बन रही है। प्री मैच्योर डिलीवरी में नवजात के कानों के परदे पूर्ण रूप से विकसित नहीं होते। इसलिए वो जन्म के साथ बहरे पैदा होते हैं। इसलिए अब डॉक्टर प्री मैच्योर डिलीवरी के मामले में जन्म के बाद से ही बच्चों के कानों के परदों की जांच कर रहे हैं। ईयरफोन का अधिक इस्तेमाल करने वाले युवा बहरेपन का शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा डीजे पर काम करने वाले युवा व यातायात में ड्यूटी करने वाले पुलिस कर्मचारी भी बहरेपन की चपेट में आ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जिले की छह प्रतिशत आबादी को कान संबंधी बीमारी है। तीन प्रतिशत आबादी बहरेपन की चपेट में है। अब जिला नागरिक अस्पताल में ओपीडी 100 पार कर चुकी है। मंगलवार को विश्व श्रवण दिवस पर नागरिक अस्पताल में विशेष शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. शिवाजंलि ने छह साल के 35 बच्चें के कानों की जांच की। बच्चों के परिजनों को बेहरेपन के खिलाफ जागरूक किया गया है।
डॉ. शिवाजंलि ने बताया कि प्री मैच्योर डिलीवरी के केस में नवजात के बहरे होने का खतरा बढ़ जाता है। प्री मैच्योर डिलीवरी के अधिकतर केसों में नवजातों के कानों के परदे विकसित नहीं मिलते । इसलिए अभिभावकों को अपने बच्चों के कानों की जांच करानी चाहिए। बच्चों को मोबाइल लीड का प्रयोग न करने दें। डीजे पर अधिक समय तक न रुकने दें। उन्होंने कहा कि अगर तेज आवाज के कारण कान में झरझराहट हो और चक्कर आने लगे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाए। ये भी बहरेपन का एक लक्षण है। बुधवार को नागरिक अस्पताल में बुजुर्गों के कानों की जांच करने के लिए विशेष शिविर लगेगा।
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जानकारी के अनुसार जिले की छह प्रतिशत आबादी को कान संबंधी बीमारी है। तीन प्रतिशत आबादी बहरेपन की चपेट में है। अब जिला नागरिक अस्पताल में ओपीडी 100 पार कर चुकी है। मंगलवार को विश्व श्रवण दिवस पर नागरिक अस्पताल में विशेष शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. शिवाजंलि ने छह साल के 35 बच्चें के कानों की जांच की। बच्चों के परिजनों को बेहरेपन के खिलाफ जागरूक किया गया है।
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डॉ. शिवाजंलि ने बताया कि प्री मैच्योर डिलीवरी के केस में नवजात के बहरे होने का खतरा बढ़ जाता है। प्री मैच्योर डिलीवरी के अधिकतर केसों में नवजातों के कानों के परदे विकसित नहीं मिलते । इसलिए अभिभावकों को अपने बच्चों के कानों की जांच करानी चाहिए। बच्चों को मोबाइल लीड का प्रयोग न करने दें। डीजे पर अधिक समय तक न रुकने दें। उन्होंने कहा कि अगर तेज आवाज के कारण कान में झरझराहट हो और चक्कर आने लगे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाए। ये भी बहरेपन का एक लक्षण है। बुधवार को नागरिक अस्पताल में बुजुर्गों के कानों की जांच करने के लिए विशेष शिविर लगेगा।
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