फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   Navratri begins, mother's cheers

नवरात्र शुरू, लगे मां के जयकारे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 03 Apr 2022 02:03 AM IST
विज्ञापन
Navratri begins, mother's cheers
पानीपत। नवरात्र के उपक्षय में देवी मंदिर में देवी मां के दर्शन कर मन्नत मांगती हुई युवतियां व मह? - फोटो : Panipat
पानीपत। चैत्र नवरात्र के पहले दिन शनिवार को भक्तों ने मां शैलपुत्री की पूजा पूरे विधि विधान से की। जिले भर के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। दिन भर मंदिरों में माता के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना कर मत्था टेका और घर-परिवार व समाज में सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। वैदिक मंत्रोच्चारण के कारण चारों तरफ भक्ति की अविरल धारा बहती रही।
विज्ञापन

श्रद्धालुओं ने अपने घर में शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित कर माता की पूजा अर्चना की। मंदिरों में मां की पूजा अर्चना करने के लिए सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। मंदिरों में पूजा-अर्चना करने पहुंचे भक्तों की लंबी कतारें लगी रही। मां के जयकारों से मंदिर गुंजायमान रहे।
विज्ञापन

आज होगी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
नवरात्र के दूसरे दिन रविवार को भगवती मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। इस दिन माता के भक्त अपने मन को भगवती मां के चरणों में एकाग्रचित्त करके स्वाधिष्ठान चक्र में स्थित कर मां की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। ब्रह्मचारिणी देवी भगवती दुर्गा की नौ शक्तियों का दूसरा स्वरूप है। मां ने भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इस देवी को तपश्चारिणी अर्थात ब्रह्मचारिणी नाम से भी जाना जाता है। ब्रह्म का अर्थ है, तपस्या, तप का आचरण करने वाली भगवती, जिस कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य है स्वरूप
अवध धाम मंदिर से पंडित राधे-राधे महाराज ने बताया कि ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य है। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएं हाथ में कमंडल रहता है। देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए सर्वप्रथम अपने जिन देवी-देवताओं एवं गणों व योगिनियों को कलश में आमंत्रित किया है, उनकी फूल, अक्षत, रोली, चंदन से पूजा करें। उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत व मधु से भोग कराएं और देवी को जो कुछ भी प्रसाद अर्पित कर रहे हैं। उसमें से एक अंश इन्हें भी अर्पण करें। प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारी भेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें। कलश देवता की पूजा के पश्चात इसी प्रकार नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता की पूजा करें। इनकी पूजा के बाद माता ब्रह्मचारिणी की पूजा करें।

पंडित जयपाल शर्मा ने बताया कि देवी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर प्रार्थना करें। इसके बाद देवी को पंचामृत का भोग लगाएं और फिर फूल खासतौर पर लाल, अक्षत, कुमकुम, सिंदुर अर्पित करें। घी व कपूर मिलाकर देवी की आरती करें। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है व मनुष्य को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed