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निगम पर वर्चस्व की लड़ाई में एक बार फिर विधायक और मेयर आमने-सामने, सदन में फैसला कल
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नगर निगम पर वर्चस्व जमाने की लड़ाई में अब शहरी विधायक और मेयर एक बार फिर आमने सामने आ चुके हैं। अधूरे पड़े शहर के विकास कार्यों को अमलीजामा पहनाने के लिए पिछली निगम की बैठक को नौ माह बाद सात सितंबर को हुई, वहीं अब इसे महज 17 दिन बाद यानी 24 सितंबर को बुलाया गया है। पत्राचार में यह आपातकालीन बैठक नहीं है और न ही इस बैठक का एजेंडा ही किसी पार्षद को भेजा गया है। यानी बैठक के दौरान ही एजेंडा पेश किया जाएगा। माना जा रहा है कि यह बैठक सेक्टर-25 में दो हजार गज भूमि की रिजेक्ट हो चुकी सीएलयू को पास करवाने के लिए बुलाई जा रही है।
पिछली सदन की बैठक में कुछ पार्षदों ने सीएलयू के प्रस्ताव को सदन के पटल पर रखकर पास करवाने की प्लानिंग तैयार की थी, जिसकी सहमति 12 पार्षदों ने हस्ताक्षर कर दी थी। जिसपर विधायक ने नाराजगी जाहिर की थी। तब पार्षदों ने अपने सहमति पत्र वापस ले लिए थे। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव के पक्ष में मेयर भी हैं। अब हालात ये हैं कि पार्षदों का एक गुट मेयर पक्ष की तरफ सदन में इस मुद्दे को रख एक तिहाई बहुमत से विधायक के खिलाफ पास करवाना चाहता है, जबकि दूसरा गुट इसे विधायक के फेवर में रखते हुए रिजेक्ट करने का प्रयास कर रहा है।
पिछली बैठक में अधिकारियों तक को सीएलयू का प्रस्ताव रखने का नहीं पता था
सात सितंबर को हुई बैठक में पास कराने के लिए रखे गए सीएलयू के एजेंडे की जानकारी अधिकारियों तक को नहीं थी। विधायक प्रमोद विज ने सवाल उठाया था। जिसके बाद एजेंडे को रिजेक्ट कर दिया गया था।
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सदन में पूछेेंगे बैठक बुलाने की ऐसी क्या इमरजेंसी थी
पार्षद दुष्यंत भट्ट ने कहा कि सदन में मेयर और निगम आयुक्त से पूछा जाएगा कि ऐसी क्या इमरजेंसी थी जो महज 48 घंटे के नोटिस पर ही बैठक बुला ली गई। ऐसा क्या स्पेशल एजेंडा रखा जा रहा है, जिसके बारे में बताया तक नहीं गया।
24 सिंतबर की सदन बैठक के लिए पत्राचार हुआ है, लेकिन अभी तक कोई एजेंडा सामने नहीं आया है। हो सकता है मेयर की तरफ से एजेंडा प्रस्तुत किया जा रहा हो।
सुशील कुमार, आयुक्त, नगर निगम, पानीपत।
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पिछली सदन की बैठक में कुछ पार्षदों ने सीएलयू के प्रस्ताव को सदन के पटल पर रखकर पास करवाने की प्लानिंग तैयार की थी, जिसकी सहमति 12 पार्षदों ने हस्ताक्षर कर दी थी। जिसपर विधायक ने नाराजगी जाहिर की थी। तब पार्षदों ने अपने सहमति पत्र वापस ले लिए थे। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव के पक्ष में मेयर भी हैं। अब हालात ये हैं कि पार्षदों का एक गुट मेयर पक्ष की तरफ सदन में इस मुद्दे को रख एक तिहाई बहुमत से विधायक के खिलाफ पास करवाना चाहता है, जबकि दूसरा गुट इसे विधायक के फेवर में रखते हुए रिजेक्ट करने का प्रयास कर रहा है।
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पिछली बैठक में अधिकारियों तक को सीएलयू का प्रस्ताव रखने का नहीं पता था
सात सितंबर को हुई बैठक में पास कराने के लिए रखे गए सीएलयू के एजेंडे की जानकारी अधिकारियों तक को नहीं थी। विधायक प्रमोद विज ने सवाल उठाया था। जिसके बाद एजेंडे को रिजेक्ट कर दिया गया था।
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सदन में पूछेेंगे बैठक बुलाने की ऐसी क्या इमरजेंसी थी
पार्षद दुष्यंत भट्ट ने कहा कि सदन में मेयर और निगम आयुक्त से पूछा जाएगा कि ऐसी क्या इमरजेंसी थी जो महज 48 घंटे के नोटिस पर ही बैठक बुला ली गई। ऐसा क्या स्पेशल एजेंडा रखा जा रहा है, जिसके बारे में बताया तक नहीं गया।
24 सिंतबर की सदन बैठक के लिए पत्राचार हुआ है, लेकिन अभी तक कोई एजेंडा सामने नहीं आया है। हो सकता है मेयर की तरफ से एजेंडा प्रस्तुत किया जा रहा हो।
सुशील कुमार, आयुक्त, नगर निगम, पानीपत।