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मकर संक्रांति पर महासंयोग, बन रहे ब्रह्म-व्रज योग
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पानीपत। मकर संक्रांति का पर्व ढेर सारी खुशियां और उत्साह लेकर आ रहा है। इस साल यह पर्व इसलिए और भी ज्यादा खास हो गया है क्योंकि इस दिन चार योगों का महासंयोग बन रहा है। ये किस्मत बदलने वाले साबित हो सकते हैं। शैव संप्रदाय के लोग जहां 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाएंगे वहीं वैष्णव संप्रदाय के लोग 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाएंगे।
कुछ विद्वानों के अनुसार, सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व मकर सक्रांति इस बार 14 जनवरी को होगा। इस दिन सूर्य देवता धनु राशि निकलकर मकर राशि में दोपहर 2:32 बजे प्रवेश करेंगे। इसके चलते पुण्यकाल सूर्य अस्त 5:55 बजे तक 3:37 घंटे रहेगा। इस बार सक्रांति का वाहन बाघ, उपवाहन अश्व और हाथों में गदा रूपी शस्त्र है।
ज्योतिषाचार्य पंडित राधे-राधे के अनुसार मकर संक्रांति पर धनुर्मास का समापन होगा। इसके साथ ही नववर्ष के पहले मांगलिक कार्यों के सीजन का श्रीगणेश होगा। इसमें जनवरी से लेकर जुलाई तक वैवाहिक आयोजन के लिए करीब 60 मुहूर्त है। जनवरी में 22, 23, 24 व 25 को शादी के शुभ मुहुर्त हैं।
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14 जनवरी को रोहिणी नक्षत्र
14 जनवरी की शाम को रोहिणी नक्षत्र रहेगा। यह नक्षत्र पूजा, दान-धर्म के लिए बेहद शुभ माना गया है। वहीं इसी दिन सूर्यदेव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य दक्षिणायण से उत्तरायण होंगे।
चार शुभ संयोग बनाएंगे मकर संक्रांति को विशेष
वहीं ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक मकर संक्रांति पर ब्रह्म योग, व्रज योग और आनंदादि योग बन रहे हैं। इसके अलावा बुधादित्य योग भी रहेगा। इन संयोगों को शुभ और सुख-शांति दायक काम करने के लिए बहुत अच्छा माना गया है। ऐसे योग में काम शुरू करने से काम निर्विघ्न संपन्न होते हैं और सफलता भी मिलती है। वहीं इस महासंयोग में किए गए दान-पुण्य का फल कई जन्मों तक मिलता है। मकर संक्रांति के दिन रोहिणी नक्षत्र और ब्रह्म योग बन रहा है।
29 साल बाद बनेगा तीन ग्रहों का संयोग
सूर्य के मकर राशि में आने से मकर संक्रांति के दिन 29 वर्ष बाद तीन ग्रहों का संयोग बनेगा। जिसमें सूर्य, बुध और शनि तीन ग्रहों की युति से त्रिगृही योग बनेगा। महाभारत की कथा के अनुसार, भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रांति का दिन ही चुना था। कहा जाता है कि आज ही के दिन गंगा जी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी, इसलिए आज के दिन गंगा स्नान व तीर्थ स्थलों पर स्नान दान का विशेष महत्व माना गया है।
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कुछ विद्वानों के अनुसार, सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व मकर सक्रांति इस बार 14 जनवरी को होगा। इस दिन सूर्य देवता धनु राशि निकलकर मकर राशि में दोपहर 2:32 बजे प्रवेश करेंगे। इसके चलते पुण्यकाल सूर्य अस्त 5:55 बजे तक 3:37 घंटे रहेगा। इस बार सक्रांति का वाहन बाघ, उपवाहन अश्व और हाथों में गदा रूपी शस्त्र है।
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ज्योतिषाचार्य पंडित राधे-राधे के अनुसार मकर संक्रांति पर धनुर्मास का समापन होगा। इसके साथ ही नववर्ष के पहले मांगलिक कार्यों के सीजन का श्रीगणेश होगा। इसमें जनवरी से लेकर जुलाई तक वैवाहिक आयोजन के लिए करीब 60 मुहूर्त है। जनवरी में 22, 23, 24 व 25 को शादी के शुभ मुहुर्त हैं।
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14 जनवरी को रोहिणी नक्षत्र
14 जनवरी की शाम को रोहिणी नक्षत्र रहेगा। यह नक्षत्र पूजा, दान-धर्म के लिए बेहद शुभ माना गया है। वहीं इसी दिन सूर्यदेव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य दक्षिणायण से उत्तरायण होंगे।
चार शुभ संयोग बनाएंगे मकर संक्रांति को विशेष
वहीं ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक मकर संक्रांति पर ब्रह्म योग, व्रज योग और आनंदादि योग बन रहे हैं। इसके अलावा बुधादित्य योग भी रहेगा। इन संयोगों को शुभ और सुख-शांति दायक काम करने के लिए बहुत अच्छा माना गया है। ऐसे योग में काम शुरू करने से काम निर्विघ्न संपन्न होते हैं और सफलता भी मिलती है। वहीं इस महासंयोग में किए गए दान-पुण्य का फल कई जन्मों तक मिलता है। मकर संक्रांति के दिन रोहिणी नक्षत्र और ब्रह्म योग बन रहा है।
29 साल बाद बनेगा तीन ग्रहों का संयोग
सूर्य के मकर राशि में आने से मकर संक्रांति के दिन 29 वर्ष बाद तीन ग्रहों का संयोग बनेगा। जिसमें सूर्य, बुध और शनि तीन ग्रहों की युति से त्रिगृही योग बनेगा। महाभारत की कथा के अनुसार, भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रांति का दिन ही चुना था। कहा जाता है कि आज ही के दिन गंगा जी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी, इसलिए आज के दिन गंगा स्नान व तीर्थ स्थलों पर स्नान दान का विशेष महत्व माना गया है।