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महाराणा प्रताप ने मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की : तंवर
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पानीपत। महाराणा प्रताप की 483वीं जयंती सेक्टर छह स्थित राजपूत धर्मशाला में रविवार को उत्साह के साथ मनाई गई। इससे पहले समाज के लोगों ने देवी मंदिर से आयोजन स्थल तक शोभायात्रा निकाली। यात्रा को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र सिंह तंवर और किसान यूनियन उत्तर प्रदेश के प्रधान ठाकुर घासीराम और पार्षद विजय जैन ने झंडी दिखाकर रवाना किया।
यशपाल राणा, प्रधान नरेंद्र राणा और सतपाल राणा, राजकुमार राणा और पार्षद विजय जैन ने महाराणा प्रताप और दानवीर सेठ भामाशाह की मूर्ति पर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजपूत सभा के प्रधान नरेंद्र राणा ने की। मुख्यातिथि महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप सर्वसमाज के थे। उन्होंने जंगलों में रहकर घास की रोटियां खाई, लेकिन मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की। हल्दी घाटी के युद्ध में मुगल सेना को नाकों चने चबा दिए थे। घासीराम ने कहा कि महाराणा के संदेशों को युवा आगे लेकर जाएं और युवाओं में जोश भरना चाहिए।
पार्षद विजय जैन ने कहा कि युवाओं को महाराणा प्रताप से सीख लेकर देश सेवा करनी चाहिए। महाराणा प्रताप ने कभी भी जीवन में हार नहीं मानी। सतपाल राणा ने कहा कि महाराणा प्रताप के साथ-साथ उस दानवीर सेठ भामाशाह को भी याद करना चाहिए। इस अवसर पर युवा प्रधान पिंटू राणा, राजू राणा, प्रदीप राणा, अक्षय राणा, सागर राणा, योगेश राणा, रामलाल भाटिया, कंवरपाल खोखर, डॉ. सिताब सैनी, आशु सैनी व करण शर्मा मौजूद रहे।
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यशपाल राणा, प्रधान नरेंद्र राणा और सतपाल राणा, राजकुमार राणा और पार्षद विजय जैन ने महाराणा प्रताप और दानवीर सेठ भामाशाह की मूर्ति पर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजपूत सभा के प्रधान नरेंद्र राणा ने की। मुख्यातिथि महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप सर्वसमाज के थे। उन्होंने जंगलों में रहकर घास की रोटियां खाई, लेकिन मुगलों की अधीनता स्वीकार नहीं की। हल्दी घाटी के युद्ध में मुगल सेना को नाकों चने चबा दिए थे। घासीराम ने कहा कि महाराणा के संदेशों को युवा आगे लेकर जाएं और युवाओं में जोश भरना चाहिए।
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पार्षद विजय जैन ने कहा कि युवाओं को महाराणा प्रताप से सीख लेकर देश सेवा करनी चाहिए। महाराणा प्रताप ने कभी भी जीवन में हार नहीं मानी। सतपाल राणा ने कहा कि महाराणा प्रताप के साथ-साथ उस दानवीर सेठ भामाशाह को भी याद करना चाहिए। इस अवसर पर युवा प्रधान पिंटू राणा, राजू राणा, प्रदीप राणा, अक्षय राणा, सागर राणा, योगेश राणा, रामलाल भाटिया, कंवरपाल खोखर, डॉ. सिताब सैनी, आशु सैनी व करण शर्मा मौजूद रहे।
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