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36 बिरादरी के आराध्य है भगवान परशुराम
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पानीपत। वार्ड नंबर-3 में परशुराम मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए संत व मंच पर मौजूद अन्य?
- फोटो : Panipat
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पानीपत। समस्त ब्राह्मण समाज द्वारा भगवान परशुराम जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में सेक्टर-18 स्थित परशुराम धर्मशाला में 11 ब्राह्मणों के साथ विधिवत रूप से हवन यज्ञ किया गया। सभी ब्राह्मणों ने भगवान विष्णु जी के छठे अवतार, शस्त्र और शास्त्र के ज्ञाता, अजर-अमर भगवान परशुराम जी का गुणगान किया।
इस अवसर पर सर्व ब्राह्मण समाज जिला पानीपत के प्रधान राम रतन शर्मा ने बताया कि वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया जो कि अक्षय तृतीया के नाम से प्रसिद्ध है, इस दिन भगवान परशुराम जी का जन्म हुआ और भगवान शिव द्वारा प्रदत्त परशु धारण किए रहने के कारण भगवान परशुराम कहलाए। भगवान परशुराम जी का उल्लेख रामायण, महाभारत, श्रीमद्भागवत पुराण और कल्कि पुराण इत्यादि अनेक ग्रंथों में किया गया है। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम ने 21 बार अहंकारी राजाओं का संहार कर उन्हें दंडित करके पृथ्वी पर सत्य, दया, करूणा, धर्म की स्थापना की और संपूर्ण मानव जाति को निर्भय किया।
ब्राह्मण समाज पूर्व प्रधान सुरेंद्र सनौली ने बताया कि आज के दिन को अक्षय तृतीया के रूप में इसलिए मनाया जाता है। यह दिन वर्ष के सबसे शुभ मुहूर्त में से एक होता है। आज के दिन बिना मुहूर्त कोई भी मांगलिक कार्य संपन्न किए जा सकते हैं।
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इस अवसर पर पं. सुरेंद्र शास्त्री, बाबू राम कौशिक, जेपी गौड़, एडवोकेट डीके पंडित, जयदेव कौशिक, वीरेंद्र एडवोकेट, मोहित शर्मा, एडवोकेट मनोज शर्मा, अमित आजाद, संदीप कौशिक, राजू पहलवान, अंकित गौतम, एडवोकेट अरविंद, नरेंद्र शर्मा उग्राखेड़ी, सोनू शर्मा, अनिल शर्मा, राधे श्याम शर्मा, जय भगवान शर्मा, राधेश्याम बडौली समेत तमाम ब्राह्मण समाज के लोग उपस्थित थे।
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इस अवसर पर सर्व ब्राह्मण समाज जिला पानीपत के प्रधान राम रतन शर्मा ने बताया कि वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया जो कि अक्षय तृतीया के नाम से प्रसिद्ध है, इस दिन भगवान परशुराम जी का जन्म हुआ और भगवान शिव द्वारा प्रदत्त परशु धारण किए रहने के कारण भगवान परशुराम कहलाए। भगवान परशुराम जी का उल्लेख रामायण, महाभारत, श्रीमद्भागवत पुराण और कल्कि पुराण इत्यादि अनेक ग्रंथों में किया गया है। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम ने 21 बार अहंकारी राजाओं का संहार कर उन्हें दंडित करके पृथ्वी पर सत्य, दया, करूणा, धर्म की स्थापना की और संपूर्ण मानव जाति को निर्भय किया।
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ब्राह्मण समाज पूर्व प्रधान सुरेंद्र सनौली ने बताया कि आज के दिन को अक्षय तृतीया के रूप में इसलिए मनाया जाता है। यह दिन वर्ष के सबसे शुभ मुहूर्त में से एक होता है। आज के दिन बिना मुहूर्त कोई भी मांगलिक कार्य संपन्न किए जा सकते हैं।
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इस अवसर पर पं. सुरेंद्र शास्त्री, बाबू राम कौशिक, जेपी गौड़, एडवोकेट डीके पंडित, जयदेव कौशिक, वीरेंद्र एडवोकेट, मोहित शर्मा, एडवोकेट मनोज शर्मा, अमित आजाद, संदीप कौशिक, राजू पहलवान, अंकित गौतम, एडवोकेट अरविंद, नरेंद्र शर्मा उग्राखेड़ी, सोनू शर्मा, अनिल शर्मा, राधे श्याम शर्मा, जय भगवान शर्मा, राधेश्याम बडौली समेत तमाम ब्राह्मण समाज के लोग उपस्थित थे।