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भगवान महावीर ने मानवता को दिया अहिंसा का संदेश : कोविंद
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पानीपत। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि भगवान महावीर ने मानवता को अहिंसा का संदेश दिया। उनके दिखाए मार्ग पर चलकर हम बड़ी से बड़ी चुनौती से पार पा सकते हैं। अहिंसा और सर्वकल्याण की भावना देश की बढ़ी ताकत है। कोविंद मंगलवार को टीडीआई सिटी स्थित द सेंटेनियल स्कूल में महावीर जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत करने पहुंचे थे। इस दौरान पूर्व राष्ट्रपति ने सेंटेनियल स्कूल की जूनियर विंग का उद्धाटन भी किया।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जैन परंपरा के तीन सिद्धांत सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक आचरण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वीरों में वीर भगवान महावीर हैं। जिस कालखंड में भगवान महावीर हुए, उसी कालखंड में भगवान बुद्ध भी हुए। बिहार के राज्यपाल रहते हुए इन दोनों विभूतियों के बारे में उन्हें जानने का अवसर मिला। दोनों ने लोक कल्याण के लिए जीवन समर्पित किया। सभी 24 तीर्थंकरों ने मानवता को जनकल्याण की बड़ी सीख दी। जीओ और जीने दो के सिद्धांत की शिक्षा दी।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि भगवान महावीर की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। उनका अनुसरण करते हुए मानव को अपने मन को स्थिर रख हमेशा आगे बढ़ना चाहिए। मानव को आत्मा की शुद्धि के लिए लोभ, लालच, माया, मोह आदि का त्याग करना चाहिए। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर पूर्व राष्ट्रपति की पत्नी सविता कोविंद, जैन मुनि समर्पण सागर महाराज, पानीपत ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा, शहरी विधायक प्रमोद विज, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता, भगवान महावीर विश्वविद्यालय के चांसलर नंद किशोर व पवन जिंदल मौजूद रहे।
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पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि पहले भारत के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री विदेश जाते थे तो उनको लेने मंत्री आते थे, लेकिन 2017 के बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री रिसीव करने आते हैं। यह भारत के बढ़ते प्रभाव के कारण हो रहा है।
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इस अवसर पर संबोधित करते हुए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जैन परंपरा के तीन सिद्धांत सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक आचरण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वीरों में वीर भगवान महावीर हैं। जिस कालखंड में भगवान महावीर हुए, उसी कालखंड में भगवान बुद्ध भी हुए। बिहार के राज्यपाल रहते हुए इन दोनों विभूतियों के बारे में उन्हें जानने का अवसर मिला। दोनों ने लोक कल्याण के लिए जीवन समर्पित किया। सभी 24 तीर्थंकरों ने मानवता को जनकल्याण की बड़ी सीख दी। जीओ और जीने दो के सिद्धांत की शिक्षा दी।
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कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि भगवान महावीर की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। उनका अनुसरण करते हुए मानव को अपने मन को स्थिर रख हमेशा आगे बढ़ना चाहिए। मानव को आत्मा की शुद्धि के लिए लोभ, लालच, माया, मोह आदि का त्याग करना चाहिए। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर पूर्व राष्ट्रपति की पत्नी सविता कोविंद, जैन मुनि समर्पण सागर महाराज, पानीपत ग्रामीण विधायक महिपाल ढांडा, शहरी विधायक प्रमोद विज, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता, भगवान महावीर विश्वविद्यालय के चांसलर नंद किशोर व पवन जिंदल मौजूद रहे।
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पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि पहले भारत के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री विदेश जाते थे तो उनको लेने मंत्री आते थे, लेकिन 2017 के बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री रिसीव करने आते हैं। यह भारत के बढ़ते प्रभाव के कारण हो रहा है।