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इलेक्ट्रॉनिक रथ पर भाई-बहन संग बिराजे भगवान जगन्नाथ
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पानीपत। भगवान जगन्नाथ की 127वीं रथयात्रा सोमवार को इलेक्ट्रॉनिक रथ पर निकाली गई। रथ पर भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा संग भगवान जगन्नाथ विराजे। 127 साल में ऐसा पहली बार हुआ जब रथयात्रा इलेक्ट्रॉनिक रथ से निकाली गई। इससे पहले रथयात्रा हर साल रथ से निकाली गई थी। इस बार एक जिप्सी को रथ का आकार दिया गया था।
रथयात्रा से पहले सोमवार सुबह 8 बजे गणपति तथा देवी-देवताओं का पूजन किया गया। पूजन कार्यक्रम में पानीपत शहरी विधायक प्रमोद विज भी मुख्य रूप से मौजूद रहे। मंदिर समिति द्वारा विधायक का स्वागत किया गया। सुबह साढ़े 8 बजे मेयर अवनीत कौर तथा सरदार भूपेंद्र सिंह पहुंचे। उनके द्वारा देवी-देवताओं की प्रतिमा पर फूलमाला अर्पित की गई व पूजन किया गया। सुबह 9 बजे स्वामी मुक्तानंद महाराज व करनाल लोकसभा सांसद संजय भाटिया ने भगवान जगन्नाथ को रथ पर विराजमान किया और यात्रा आरंभ की गई। भगवान जगन्नाथ रथयात्रा मंदिर से चलकर देवी मंदिर तक पहुंची। वहां, नारियल भेंट कर पूजा-अर्चना की गई। वहीं, वापसी जगन्नाथ मंदिर में ही आकर समापन हुई। लगातार दूसरी बार यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल नहीं हो पाए। पिछली बार भी हाथों में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा की प्रतिमा रखकर देवी मंदिर तक ले गए थे।
इस अवसर पर प्रधान राजिंद्र गुप्ता, दिलीप गुप्ता, कन्हैया लाल गुप्ता, भूषण गुप्ता, हितेंद्र कंसल, दिनेश मित्तल, जयपाल कंसल, प्रदीप तायल, लालचंद तायल, सुरेंद्र कंसल, अशोक कैलाशी, सुधीर जिंदल, नरेंद्र जिंदल, कमल गुप्ता, सुबोध गुप्ता, योगेश गुप्ता, सुरिंदर गुप्ता, शशिकांत मित्तल मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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श्रद्धालुओं ने किए भगवान जगन्नाथ के दर्शन
रथयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए। हालांकि इस बार यात्रा में सीमित संख्या में ही श्रद्धालु शामिल हो पाए। प्रधान राजिंद्र गुप्ता ने बताया कि जगन्नाथ मंदिर समिति ने फैसला लिया था कि कोविड-19 को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाए। हालांकि भक्तों के दर्शनों पर कोई रोक नहीं रही। उन्हें रथयात्रा के साथ चलने की अनुमति नहीं थी।
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रथयात्रा से पहले सोमवार सुबह 8 बजे गणपति तथा देवी-देवताओं का पूजन किया गया। पूजन कार्यक्रम में पानीपत शहरी विधायक प्रमोद विज भी मुख्य रूप से मौजूद रहे। मंदिर समिति द्वारा विधायक का स्वागत किया गया। सुबह साढ़े 8 बजे मेयर अवनीत कौर तथा सरदार भूपेंद्र सिंह पहुंचे। उनके द्वारा देवी-देवताओं की प्रतिमा पर फूलमाला अर्पित की गई व पूजन किया गया। सुबह 9 बजे स्वामी मुक्तानंद महाराज व करनाल लोकसभा सांसद संजय भाटिया ने भगवान जगन्नाथ को रथ पर विराजमान किया और यात्रा आरंभ की गई। भगवान जगन्नाथ रथयात्रा मंदिर से चलकर देवी मंदिर तक पहुंची। वहां, नारियल भेंट कर पूजा-अर्चना की गई। वहीं, वापसी जगन्नाथ मंदिर में ही आकर समापन हुई। लगातार दूसरी बार यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल नहीं हो पाए। पिछली बार भी हाथों में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा की प्रतिमा रखकर देवी मंदिर तक ले गए थे।
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इस अवसर पर प्रधान राजिंद्र गुप्ता, दिलीप गुप्ता, कन्हैया लाल गुप्ता, भूषण गुप्ता, हितेंद्र कंसल, दिनेश मित्तल, जयपाल कंसल, प्रदीप तायल, लालचंद तायल, सुरेंद्र कंसल, अशोक कैलाशी, सुधीर जिंदल, नरेंद्र जिंदल, कमल गुप्ता, सुबोध गुप्ता, योगेश गुप्ता, सुरिंदर गुप्ता, शशिकांत मित्तल मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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श्रद्धालुओं ने किए भगवान जगन्नाथ के दर्शन
रथयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए। हालांकि इस बार यात्रा में सीमित संख्या में ही श्रद्धालु शामिल हो पाए। प्रधान राजिंद्र गुप्ता ने बताया कि जगन्नाथ मंदिर समिति ने फैसला लिया था कि कोविड-19 को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाए। हालांकि भक्तों के दर्शनों पर कोई रोक नहीं रही। उन्हें रथयात्रा के साथ चलने की अनुमति नहीं थी।