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शराब फैक्टरी के लेबर ठेकेदारों ने नहीं बल्कि अवैध पिस्तौल से रविंद्र ने खुद को मारी थी गोली, पत्नी समेत तीनों गिरफ्तार
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समालखा स्थित हरियाणा आर्गेनिक स्प्रिट प्राइवेट लिमिटेड शराब फैक्टरी में लेबर ठेकेदार रविंद्र ने पत्नी और दोस्त के साथ मिलकर फैक्ट्री के अधिकारियों को फंसाने और उनसे 35 लाख रुपये एेंठने के लिए खुद को गोली मारी थी। फिर कंपनी के अधिकारियों और दूसरे ठेकेदारों पर आरोप लगाया था, लेकिन पुलिस की जांच में साजिश का पर्दाफाश होने के बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
सीआईए प्रभारी अनिल छिल्लर ने बताया कि रविंद्र ने साजिश के तहत पत्नी प्रीति और जामनी के ही निवासी दोस्त प्रदीप को शामिल किया था। प्रदीप फैक्टरी में ही रविंद्र के पास काम करता है और रविंद्र के बाद काम की देखरेख प्रदीप ही करता है। आठ अप्रैल को शाम साढ़े छह बजे रविंद्र अपनी पत्नी प्रीति को लेकर समालखा नहर के पास पहुंचा। जहां पर खड़े होकर उन्होंने प्रदीप को फोन कर बुलाया। इसके बाद मास्टरमाइंड रविंद्र ने गन्ने का जूस पीते-पीते प्रीति और प्रदीप को पूरे षडयंत्र का प्लान बताया। इसके तहत प्रदीप को कहा कि वह उनसे एक किलोमीटर आगे चलेगा और खाली लोकेशन देखकर बताएगा। प्रदीप आगे चला और वह उसके पीछे पीछे चलता रहा। प्रदीप ने किवाना और चुलकाना के बीच एक खेत में लगे सफेदे के पेड़ की लोकेशन बताई और खेत के दूसरे कोने पर जाकर खड़ा हो गया। सड़क पर रविंद्र ने बाइक खड़ी की और प्रीति के साथ अंदर खेत में चला गया, जहां पर उसने खुद को गोली मारी। इसके बाद योजना के तहत प्रीति ने फोन कर प्रदीप को बुलाया और पिस्तौल उठाकर ले जाने के लिए कहा। प्रदीप आया और पिस्तौल को उठाकर ले गया और अपने किराए के कमरे में जाकर छिपा दी। इसी बीच रविंद्र घायल अवस्था में रेंगते रेंगते सड़क तक पहुंच गया, जिसके बाद प्रीति ने पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर फायरिंग होने की झूठी सूचना दी।
इसलिए रची पूरी प्लानिंग-
रविंद्र ने पूछताछ में खुलासा किया कि फैक्टरी में लेबर के कुल 6 ठेके हैं, जिनमें से दो उसके नाम थे और चार ठेके जिनमें एक अमित, दूसरा अनिल निवासी चुलकाना, तीसरा प्रदीप निवासी समालखा और चौथा जितेंद्र निवासी किवाना के नाम पर चल रहे थे। एक ठेके में उसको करीब ढाई लाख रुपये की बचत हो जाती थी। यही कारण है कि सभी ठेके अपने नाम लेने के लिए उसने योजना बनाई। इन सभी ठेकेदार, फैक्टरी के प्रोडक्शन मैनेजर अखिलेश और वॉइस प्रेसीडेंट अक्षय ललन के खिलाफ जानलेवा हमला करने का मुकदमा दर्ज होने पर उपरोक्त सभी जेल चले जाएंगे तो वह फैक्टरी के सभी ठेके अपने नाम छुड़वा लेगा।
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पत्नी से पूछताछ में पुलिस को हुआ शक, फिर पति ने किया खुलासा
इंस्पेक्टर अनिल छिल्लर ने बताया कि प्रीति से पूछताछ हुई तो उसने किवाना और चुलकाना के बीच एक खेत में वारदात होने की बात कही थी। प्रीति ने कहा था कि गाड़ी सामने से आई थी। पुलिस मौके पर पहुंची तो सब विपरीत मिला। वहां पर जिस खेत की प्रीति बात कर रही थी, उसमें सफेदे के पेड़ लगे हुए थे। प्रीति का कहना था कि वह खेत के अंदर शौच करने गई थी, पति उसके पास था, ऐसे में किसी भी कार चालक को ये पता नहीं चल सकता कि खेत के अंदर कौन है। इसके बाद शक के आधार पर रविंद्र को बुलाकर पूछताछ की गई तो उसने कबूल लिया कि उसी ने षडयंत्र के तहत पत्नी और दोस्त के साथ मिलकर झूठी कहानी रची थी।
वारदात के डेढ़ माह तक छिपाई दूसरी गोली लगने की सूचना तो गहराया शक
प्रभारी अनिल छिल्लर ने बताया कि एसपी शशांक कुमार ने उन्हें वारदात के डेढ़ माह बाद मामले की जांच सौंपी थी। उन्होंने घटनास्थल पर जाकर जांच की तो आसपास के एक किसान से पता चला कि उन्होंने एक नहीं बल्कि दो फायरिंग की आवाज सुनी थी। जिसके बाद उन्होंने रविंद्र को बुलाया और शरीर की जांच की तो खुलासा हुआ कि छाती के अलावा उसके पैर के घुटने के पीछे गोली लगी थी। उन्होंने पूछताछ की तो रविंद्र ने कहा कि उसे दर्द में पता नहीं चला कि उसे दूसरी गोली भी लगी है, जिसके बाद शक गहरा गया।
पैर में गोली मारने के बाद सोचा-आरोपियों पर नहीं लगेगी 307 तो सीने में मारी-
आरोपी ने पहले पैर के घुटने के पीछे गोली मारी, जो छूकर निकल गई, फिर उसने सोचा कि ऐसे आरोपियों पर धारा 307 नहीं लगेगी। पुलिस पैर के नीचे गोली लगने पर आर्म्स एक्ट और अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लेगी। इससे उसकी प्लानिंग कामयाब नहीं होगी। फिर उसने अपने सीने के ऊपर चमड़ी को दो हिस्सों से पकड़कर गोली मारी, जो आर पार हो गई।
पुलिस जांच नहीं कर रही ऐसी शिकायत लेकर गृह मंत्री के पास भी पहुंचा-
आरोपी रविंद्र ने शराब फैक्टरी के वॉइस प्रेसीडेंट, प्रोडक्शन मैनेजर और लेबर ठेकेदार पर दबाव बनाने के लिए पूरा खेल रचा। वह पुलिस पर आरोपियों की गिरफ्तारी का दबाव बनाने के लिए गृहमंत्री अनिल विज से भी मिला और पुलिस पर कार्रवाई न करने के आरोप लगाए। यही नहीं जब भी तफ्तीश जांच के लिए रविंद्र को पुलिस थाने बुलाती तो वह अधिकारियों से शिकायत करता था। साथ ही आरोपी रविंद्र बिचौलियों के माध्यम से फैक्टरी के लोगों पर समझौते के नाम पर 35 लाख का दबाव बना रहा था।
यह था मामला : -
समालखा थाने में नौ अप्रैल 2021 में जींद के गांव जामनी निवासी ठेकेदार रविंद्र की पत्नी प्रीति ने शिकायत दे बताया था कि उसके पति रविंद्र ने समालखा स्थित शराब फैक्टरी में लेबर का ठेका लिया हुआ है। फैक्टरी में ठेकेदार अमित, अनिल निवासी चुलकाना, प्रदीप निवासी समालखा, जितेंद्र निवासी किवाना, फैक्टरी के प्रोडक्शन मैनेजर अखिलेश और वॉइस प्रेसीडेंट अक्षय ललन उसके पति रविन्द्र पर काफी समय से ठेका छोड़ने का दबाव बना रहे थे। वह पति रविंद्र के साथ जामनी से बाइक पर सवार होकर समालखा आ रही थी तो नामुंडा और किवाना के बीच शौच के लिए रोड किनारे बाइक रोका। इसी दौरान सामने से एक कार आकर रुकी, जिसमें 5-6 युवक सवार थे। कार से दो युवक नीचे उतरे और पति रविंद्र को पिस्तौल से गोली मारकर सभी आरोपी फरार हो गए। प्रीति ने उपरोक्त सभी के खिलाफ 307 की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पत्नी को भेजा जेल, रविंद्र और प्रदीप को चार दिन के रिमांड पर लिया
झूठी शिकायत देने वाली आरोपी रविंद्र की पत्नी प्रीति को पुलिस ने जेल भेज दिया है, जबकि आरोपी रविंद्र और उसके दोस्त प्रदीप को चार दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। रिमांड के दौरान पूछताछ और आरोपियों से अवैध पिस्तौल बरामद की जाएगी।
- पूजा वशिष्ठ, एएसपी, पानीपत
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सीआईए प्रभारी अनिल छिल्लर ने बताया कि रविंद्र ने साजिश के तहत पत्नी प्रीति और जामनी के ही निवासी दोस्त प्रदीप को शामिल किया था। प्रदीप फैक्टरी में ही रविंद्र के पास काम करता है और रविंद्र के बाद काम की देखरेख प्रदीप ही करता है। आठ अप्रैल को शाम साढ़े छह बजे रविंद्र अपनी पत्नी प्रीति को लेकर समालखा नहर के पास पहुंचा। जहां पर खड़े होकर उन्होंने प्रदीप को फोन कर बुलाया। इसके बाद मास्टरमाइंड रविंद्र ने गन्ने का जूस पीते-पीते प्रीति और प्रदीप को पूरे षडयंत्र का प्लान बताया। इसके तहत प्रदीप को कहा कि वह उनसे एक किलोमीटर आगे चलेगा और खाली लोकेशन देखकर बताएगा। प्रदीप आगे चला और वह उसके पीछे पीछे चलता रहा। प्रदीप ने किवाना और चुलकाना के बीच एक खेत में लगे सफेदे के पेड़ की लोकेशन बताई और खेत के दूसरे कोने पर जाकर खड़ा हो गया। सड़क पर रविंद्र ने बाइक खड़ी की और प्रीति के साथ अंदर खेत में चला गया, जहां पर उसने खुद को गोली मारी। इसके बाद योजना के तहत प्रीति ने फोन कर प्रदीप को बुलाया और पिस्तौल उठाकर ले जाने के लिए कहा। प्रदीप आया और पिस्तौल को उठाकर ले गया और अपने किराए के कमरे में जाकर छिपा दी। इसी बीच रविंद्र घायल अवस्था में रेंगते रेंगते सड़क तक पहुंच गया, जिसके बाद प्रीति ने पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर फायरिंग होने की झूठी सूचना दी।
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इसलिए रची पूरी प्लानिंग-
रविंद्र ने पूछताछ में खुलासा किया कि फैक्टरी में लेबर के कुल 6 ठेके हैं, जिनमें से दो उसके नाम थे और चार ठेके जिनमें एक अमित, दूसरा अनिल निवासी चुलकाना, तीसरा प्रदीप निवासी समालखा और चौथा जितेंद्र निवासी किवाना के नाम पर चल रहे थे। एक ठेके में उसको करीब ढाई लाख रुपये की बचत हो जाती थी। यही कारण है कि सभी ठेके अपने नाम लेने के लिए उसने योजना बनाई। इन सभी ठेकेदार, फैक्टरी के प्रोडक्शन मैनेजर अखिलेश और वॉइस प्रेसीडेंट अक्षय ललन के खिलाफ जानलेवा हमला करने का मुकदमा दर्ज होने पर उपरोक्त सभी जेल चले जाएंगे तो वह फैक्टरी के सभी ठेके अपने नाम छुड़वा लेगा।
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पत्नी से पूछताछ में पुलिस को हुआ शक, फिर पति ने किया खुलासा
इंस्पेक्टर अनिल छिल्लर ने बताया कि प्रीति से पूछताछ हुई तो उसने किवाना और चुलकाना के बीच एक खेत में वारदात होने की बात कही थी। प्रीति ने कहा था कि गाड़ी सामने से आई थी। पुलिस मौके पर पहुंची तो सब विपरीत मिला। वहां पर जिस खेत की प्रीति बात कर रही थी, उसमें सफेदे के पेड़ लगे हुए थे। प्रीति का कहना था कि वह खेत के अंदर शौच करने गई थी, पति उसके पास था, ऐसे में किसी भी कार चालक को ये पता नहीं चल सकता कि खेत के अंदर कौन है। इसके बाद शक के आधार पर रविंद्र को बुलाकर पूछताछ की गई तो उसने कबूल लिया कि उसी ने षडयंत्र के तहत पत्नी और दोस्त के साथ मिलकर झूठी कहानी रची थी।
वारदात के डेढ़ माह तक छिपाई दूसरी गोली लगने की सूचना तो गहराया शक
प्रभारी अनिल छिल्लर ने बताया कि एसपी शशांक कुमार ने उन्हें वारदात के डेढ़ माह बाद मामले की जांच सौंपी थी। उन्होंने घटनास्थल पर जाकर जांच की तो आसपास के एक किसान से पता चला कि उन्होंने एक नहीं बल्कि दो फायरिंग की आवाज सुनी थी। जिसके बाद उन्होंने रविंद्र को बुलाया और शरीर की जांच की तो खुलासा हुआ कि छाती के अलावा उसके पैर के घुटने के पीछे गोली लगी थी। उन्होंने पूछताछ की तो रविंद्र ने कहा कि उसे दर्द में पता नहीं चला कि उसे दूसरी गोली भी लगी है, जिसके बाद शक गहरा गया।
पैर में गोली मारने के बाद सोचा-आरोपियों पर नहीं लगेगी 307 तो सीने में मारी-
आरोपी ने पहले पैर के घुटने के पीछे गोली मारी, जो छूकर निकल गई, फिर उसने सोचा कि ऐसे आरोपियों पर धारा 307 नहीं लगेगी। पुलिस पैर के नीचे गोली लगने पर आर्म्स एक्ट और अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लेगी। इससे उसकी प्लानिंग कामयाब नहीं होगी। फिर उसने अपने सीने के ऊपर चमड़ी को दो हिस्सों से पकड़कर गोली मारी, जो आर पार हो गई।
पुलिस जांच नहीं कर रही ऐसी शिकायत लेकर गृह मंत्री के पास भी पहुंचा-
आरोपी रविंद्र ने शराब फैक्टरी के वॉइस प्रेसीडेंट, प्रोडक्शन मैनेजर और लेबर ठेकेदार पर दबाव बनाने के लिए पूरा खेल रचा। वह पुलिस पर आरोपियों की गिरफ्तारी का दबाव बनाने के लिए गृहमंत्री अनिल विज से भी मिला और पुलिस पर कार्रवाई न करने के आरोप लगाए। यही नहीं जब भी तफ्तीश जांच के लिए रविंद्र को पुलिस थाने बुलाती तो वह अधिकारियों से शिकायत करता था। साथ ही आरोपी रविंद्र बिचौलियों के माध्यम से फैक्टरी के लोगों पर समझौते के नाम पर 35 लाख का दबाव बना रहा था।
यह था मामला : -
समालखा थाने में नौ अप्रैल 2021 में जींद के गांव जामनी निवासी ठेकेदार रविंद्र की पत्नी प्रीति ने शिकायत दे बताया था कि उसके पति रविंद्र ने समालखा स्थित शराब फैक्टरी में लेबर का ठेका लिया हुआ है। फैक्टरी में ठेकेदार अमित, अनिल निवासी चुलकाना, प्रदीप निवासी समालखा, जितेंद्र निवासी किवाना, फैक्टरी के प्रोडक्शन मैनेजर अखिलेश और वॉइस प्रेसीडेंट अक्षय ललन उसके पति रविन्द्र पर काफी समय से ठेका छोड़ने का दबाव बना रहे थे। वह पति रविंद्र के साथ जामनी से बाइक पर सवार होकर समालखा आ रही थी तो नामुंडा और किवाना के बीच शौच के लिए रोड किनारे बाइक रोका। इसी दौरान सामने से एक कार आकर रुकी, जिसमें 5-6 युवक सवार थे। कार से दो युवक नीचे उतरे और पति रविंद्र को पिस्तौल से गोली मारकर सभी आरोपी फरार हो गए। प्रीति ने उपरोक्त सभी के खिलाफ 307 की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पत्नी को भेजा जेल, रविंद्र और प्रदीप को चार दिन के रिमांड पर लिया
झूठी शिकायत देने वाली आरोपी रविंद्र की पत्नी प्रीति को पुलिस ने जेल भेज दिया है, जबकि आरोपी रविंद्र और उसके दोस्त प्रदीप को चार दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। रिमांड के दौरान पूछताछ और आरोपियों से अवैध पिस्तौल बरामद की जाएगी।
- पूजा वशिष्ठ, एएसपी, पानीपत