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युवाओं में शास्त्रों की जानकारी व महापुरूषों के चरित्र का अभाव
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पानीपत। भगवान परशुराम जन्मोत्सव, ऋषि पाराशर जयंती एवं शंकराचार्य जयंती के अवसर पर रविवार को विचार गोष्ठी का आयोजन सनौली रोड, गंगापुरी रोड स्थित शास्त्री अस्पताल में किया गया। गोष्ठी की शुरुआत हनुमान चालीसा से हुई। सभा के अध्यक्ष विजय कुमार पराशर त्रिखा का पुष्पमालाओं से स्वागत किया गया।
सर्वप्रथम संजय शर्मा ने आज की युवा पीढ़ी के शास्त्रों की जानकारी का अभाव और महापुरुषों के चरित्रों से अनभिज्ञता के बारे में विचार रखे। तत्पश्चात युधिष्ठिर शर्मा ने वर्तमान परिस्थिति में ब्राह्मणों की दशा के बारे में बताते हुए कहा कि जब तक भारत में शास्त्र और शस्त्र की पूजा की जाती रहेगी, तब तक हमारी संस्कृति अक्षुण्ण रहेगी।
अशोक शर्मा ने कहा इंटरनेट के जमाने में सब शास्त्रों को जानते हैं लेकिन शस्त्र पूजा समय की आवश्यकता है। यह भारत देश तभी तक है, जब तक यहां सनातन धर्म है। जब धर्म नष्ट हो जाएगा, तब निस्संदेह यह देश तो क्या विश्व भी नहीं बचेगा।
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विजय शर्मा ने संस्कृत शिक्षा के संबंध में प्रश्न उठाया। कहा कि आज के समय में संस्कृत के माध्यम से वेद शिक्षा ग्रहण करने पर रोजगार के साधनों का अभाव है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह इस संबंध में शिक्षा नीति बनाए।
पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि संतोष को भले ही शास्त्रों में एक धन माना गया है लेकिन आज के समय में तभी न्याय मिलता है जब उसकी मांग की जाए। ब्राह्मण समाज के पीछे रहने का कारण उसका परंपरागत रूप से उसका संतोषी जीवन जीना भी है।
पं. निरंजन पाराशर ने कहा कि एक 10 सदस्यीय शिष्ट मंडल बनाया जाए जो सरकार से मिलकर मांग करे कि संस्कृत में धार्मिक विषयों को विश्वविद्यालय से संबद्धता मिलनी चाहिए। क्योंकि आज के समय में पूरे देश में ऐसे संस्थान न के बराबर हैं जहां संस्कृत भाषा में शास्त्रों के अध्ययन को मान्यता मिली हो।
अंत में डॉ. महेंद्र शर्मा ने परशुराम के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने शास्त्र के साथ आवश्यकता पड़ने पर शस्त्र भी उठाया। इस विषय में अपने भाइयों एवं परिवार से विवाद होने के कारण वह महेंद्र पर्वत पर एकांत साधना में चले गए। अन्यायी और अत्याचारी राजाओं को दंडित करते हुए उन्होंने 21 बार धरती को मुक्ति दिलवाकर धर्म की स्थापना की।
इस मौके पर रमेश शास्त्री, अश्विनी भारद्वाज, मदन लाल शर्मा, लालचंद गोस्वामी, चंद्रशेखर शर्मा, सतनारायण शर्मा, जितेंद्र गुप्ता, दैवेंद्र तूफान, विजय वशिष्ठ, नवीन वैद्य, विकास टुटेजा, राजेंद्र टुटेजा, विजय गौड़, विनोद त्रिखा, जेपी शर्मा, ईश्वर लाल उपमन्यु, पिंकल शर्मा, सोनू शर्मा, सुनील भार्गव, ईश शर्मा आदि उपस्थित थे।
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सर्वप्रथम संजय शर्मा ने आज की युवा पीढ़ी के शास्त्रों की जानकारी का अभाव और महापुरुषों के चरित्रों से अनभिज्ञता के बारे में विचार रखे। तत्पश्चात युधिष्ठिर शर्मा ने वर्तमान परिस्थिति में ब्राह्मणों की दशा के बारे में बताते हुए कहा कि जब तक भारत में शास्त्र और शस्त्र की पूजा की जाती रहेगी, तब तक हमारी संस्कृति अक्षुण्ण रहेगी।
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अशोक शर्मा ने कहा इंटरनेट के जमाने में सब शास्त्रों को जानते हैं लेकिन शस्त्र पूजा समय की आवश्यकता है। यह भारत देश तभी तक है, जब तक यहां सनातन धर्म है। जब धर्म नष्ट हो जाएगा, तब निस्संदेह यह देश तो क्या विश्व भी नहीं बचेगा।
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विजय शर्मा ने संस्कृत शिक्षा के संबंध में प्रश्न उठाया। कहा कि आज के समय में संस्कृत के माध्यम से वेद शिक्षा ग्रहण करने पर रोजगार के साधनों का अभाव है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह इस संबंध में शिक्षा नीति बनाए।
पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि संतोष को भले ही शास्त्रों में एक धन माना गया है लेकिन आज के समय में तभी न्याय मिलता है जब उसकी मांग की जाए। ब्राह्मण समाज के पीछे रहने का कारण उसका परंपरागत रूप से उसका संतोषी जीवन जीना भी है।
पं. निरंजन पाराशर ने कहा कि एक 10 सदस्यीय शिष्ट मंडल बनाया जाए जो सरकार से मिलकर मांग करे कि संस्कृत में धार्मिक विषयों को विश्वविद्यालय से संबद्धता मिलनी चाहिए। क्योंकि आज के समय में पूरे देश में ऐसे संस्थान न के बराबर हैं जहां संस्कृत भाषा में शास्त्रों के अध्ययन को मान्यता मिली हो।
अंत में डॉ. महेंद्र शर्मा ने परशुराम के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने शास्त्र के साथ आवश्यकता पड़ने पर शस्त्र भी उठाया। इस विषय में अपने भाइयों एवं परिवार से विवाद होने के कारण वह महेंद्र पर्वत पर एकांत साधना में चले गए। अन्यायी और अत्याचारी राजाओं को दंडित करते हुए उन्होंने 21 बार धरती को मुक्ति दिलवाकर धर्म की स्थापना की।
इस मौके पर रमेश शास्त्री, अश्विनी भारद्वाज, मदन लाल शर्मा, लालचंद गोस्वामी, चंद्रशेखर शर्मा, सतनारायण शर्मा, जितेंद्र गुप्ता, दैवेंद्र तूफान, विजय वशिष्ठ, नवीन वैद्य, विकास टुटेजा, राजेंद्र टुटेजा, विजय गौड़, विनोद त्रिखा, जेपी शर्मा, ईश्वर लाल उपमन्यु, पिंकल शर्मा, सोनू शर्मा, सुनील भार्गव, ईश शर्मा आदि उपस्थित थे।