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Panipat News: पेट की खातिर 20 प्रतिशत महिलाएं नहीं करा पातीं स्तनपान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 01 Aug 2024 07:02 AM IST
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Kalash Yatra taken out for the consecration of the idol
पानीपत। अत्याधुनिक युग में नवजातों के लिए स्तनपान भी बड़ी चुनौती बन गई है। जिले की लगभग 20 प्रतिशत महिलाएं कामकाजी होने के कारण अपने नवजात शिशुओं को स्तनपान नहीं करा पाती। इनमें ज्यादातर मजदूरी करने वाली महिलाएं शामिल हैं, जो भरण पोषण की खातिर कारखानों में काम करती हैं और नवजात को घर छोड़ जाती हैं।
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प्राइवेट और सरकारी कार्यालयों में भी ब्रेस्ट फीडिंग के लिए अलग से कक्ष और क्रैच की सुविधा नहीं है। वह बच्चों को बोतल में दूध पिलाती हैं। इससे बच्चों को मां से मिलने वाले जरूरी कारक नहीं मिल पाते। कई ऐसे मामले भी सामने आते हैं कि महिलाएं शारीरिक बनावट को बच्चों की सेहत से ज्यादा तबज्जो देतीं हैं और वह समय से पहले ही बच्चे का दूध छुड़वा देती हैं। इस स्थिति के चलते बच्चे का शारीरिक विकास औसतन कम होता है। स्वास्थ्य विभाग आज से आठ अगस्त स्तनपान सप्ताह मना रहा है। इस दौरान महिलाओं को स्तनपान के प्रति जागरूक किया जाएगा। डॉक्टरों के मुताबिक स्तनपान कराने से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम होता है। स्वास्थ्य विभाग, पानीपत से मिले आंकड़ों के मुताबिक जिले की करीब 15 हजार महिलाएं (नवजात से दो साल के शिशु की मां) स्तनपान करा रही हैं। प्रसव के बाद पहले घंटे में स्तनपान की दर अभी भी लगभग 50 फीसद ही है। छह माह तक केवल स्तनपान की दर महज 40 प्रतिशत है।
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गायनोकोलोजिस्ट डॉ. लिपिका ने बताया कि कोलोस्ट्रम (शिशु के जन्म के पहले घंटे में मिलने वाला दूध) में वृद्धि कारक तत्व होते हैं। यह प्रोटीन से भरपूर होता है। शिशु को डायरिया, संक्रमण (कोविड-19 संक्रमण सहित) कई रोगों से बचाता है। बच्चों के लिए स्तनपान बेहद जरूरी है। यह बच्चों को बीमारियों से भी बचाता है। उनकी महिलाओं से अपील है कि बच्चों को नियमित रूप से अपना दूध पिलाएं।
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स्तनपान के फायदे-



-शिशु को डायरिया रोग होने की संभावना कम होती है।



-मां के दूध शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।



-मां और बच्चे के मध्य भावनात्मक लगाव बढ़ता है।



-शिशु कुपोषण और सूखा रोग का शिकार नहीं होता।



-मां को स्तन कैंसर की संभावना कम हो जाती है।



-मां को पुरानी शारीरिक संरचना वापस प्राप्त होती है
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