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Panipat News: प्रतिभा निखार चमक बिखेर रहे कबड्डी खिलाड़ी
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जगमहेंद्र सरोहा
पानीपत। सुताना गांव की मिट्टी में कबड्डी खेलकर युवा अपनी प्रतिभा से राष्ट्रीय पटल पर अपनी चमक बिखेर रहे हैं। यहां करीब 17 साल से सेंटर चल रहा है। इस दौरान सैकड़ों खिलाड़ी यहां प्रतिभा का लोहा मनवाकर कई सरकारी विभागों में तैनात हैं। पांच खिलाड़ी प्रो कबड्डी में खेल रहे हैं।
हरियाणा की कबड्डी टीम का प्रतिनिधित्व कर दो खिलाड़ी आयुष तंवर और अरविंद जूनियर नेशनल में जीत चुके स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर चुके हैं। इनके अलावा युवा पीढ़ी को खेलों में आगे बढ़ा रहे हैं। इस समय सेंटर में करीब 70 खिलाड़ी कबड्डी के टिप्स ले रहे हैं। सुबह छह से आठ और शाम को चार से छह बजे तक प्रशिक्षण दिया जाता है।
हरियाणा पुलिस के एएसआई संदीप कुमार और मदनलाल भी समय निकालकरखिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने में अपना सहयोग देते हैं। सेंटर में कबड्डी खेलकर दो खिलाड़ी स्पोर्ट्स कोटे से सेना में भर्ती हुए हैं। जोनी और अजय ने जूनियर नेशनल में गोल्ड मेडल जीता है। दोनों अब सेना में जवान हैं। कबड्डी सेंटर के खिलाड़ियों के प्रतिनिधित्व में हरियाणा पिछली बार सब जूनियर में रजत और इस बार स्वर्ण पदक जीत चुका है।
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बचपन से कबड्डी में था रुझान
मेरा शुरू से ही कबड्डी खेलने में ध्यान था। सुताना गांव स्थित एकेडमी में शुरू की। मुझे शुरुआत में खेल में कुछ दिक्कत आई। मेरे जूनियर नेशनल में दो कांस्य और एक रजत पदक है। ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में दो और सीनियर नेशनल में तीन पदक जीत चुका हूं। प्रो कबड्डी के उप विजेता रह चुके हैं। मैं प्रो कबड्डी में पटना टीम के कप्तान हैं। - नीरज कुमार, खिलाड़ी।
जूनियर नेशनल में हरियाणा की कबड्डी टीम का कप्तान रह चुका
मैं कबड्डी खेल में आगे बढ़ा। अब प्रो कबड्डी में पटना पायलट टीम का कप्तान हूं। मैं जूनियर नेशनल में हरियाणा की कबड्डी टीम का कप्तान रह चुका हूं। मेरा सीनियर नेशनल में एक कांस्य पदक है। गांव के कबड्डी सेंटर पर बेहतर टिप्स सीखे हैं। इनके आधार पर आगे बढ़ा हूं। यही कारण है कि खेल के मैदान पर किसी को आगे नहीं निकलने देत। - अनुज कुमार, खिलाड़ी।
जयपुर पिंक पैंथर्स टीम में खेला
मैंजयपुर पिंक पैंथर्स टीम में खेलता हूं और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी कांस्य पदक जीत चुका हूं। मेरा शुरू ही खेलों में जाने का मन था। अपने परिजनों को इस बारे में बताया। वे सब इसके लिए तैयार हो गए। गांव के कबड्डी सेंटर पर जाने लगा। मैं कुछ ही दिनों में कबड्डी से बोर सा हो गया। इसके बाद खेल में निशार आने लगा। मैं आज मैदान जमकर खेलता हूं। - अमित, खिलाड़ी।
दबंग दिल्ली टीम में खेल रहा हूं
मैं प्रो कबड्डी में दबंग दिल्ली टीम में खेलता हूं। मैंने गांव के सेंटर पर कबड्डी खेलना सीखा। मेरा सब जूनियर में स्वर्ण और जूनियर में राष्ट्र स्तर पर स्वर्ण पदक है। इसके अलावा ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में एक रजत पदक जीता है। मेरा कबड्डी को लेकर शुरू से ही मन था। गांव में सेंटर होने से पढ़ाई के साथ खेल दोनों में तालमेल बना रहा। उसको अपनी पढ़ाई करने में भी परेशानी नहीं रही। मैं अब रेलवे में नौकरी करता हूं। - अंकित, खिलाड़ी।
बंगलूरू बुल्स में खेल रहा
मैं शुरू से ही कबड्डी खेल रहा हूं। गांव के कबड्डी सेंटर पर अपनी प्रतिभा चमकाई। अब बंगलूरू बुल्स में खेल रहे हैं। मैंने जूनियर नेशनल में एक कांस्य और खेलो इंडिया में एक रजत पदक जीता है। ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में कांस्य पदक जीता है। युवा पीढ़ी को खेलों में आगे आना चाहिए। वे मैदान प बेहतर प्रदर्शन कर खुद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमका सकते हैं। मेरा पिछले दिनों प्रदेश की सरकारी नौकरी में चयन हुआ है। - रोहित, खिलाड़ी।
बेहतर खेल के आधार पर सेना में भर्ती हुआ
मैंने गांव की मिट्टी में जन्म लिया और यही पर बड़ा हुआ। मैंने शुरू से ही कबड्डी खेलना शुरू कर दिया। राष्ट्रीय स्तर पर जूनियर में स्वर्ण पदक है। इनके अलावा कई प्रतियोगिताओं में पदक जीता। कबड्डी खेल पर ही सेना में भर्ती हुआ। अब पूना में तैनात हूं और भारतीय सेना की कबड्डी टीम में खेल रहा हूं। मेरा मानना है कि युवाओं को पढ़ाई के साथ खेलों में आगे आना चाहिए। - जोनी, खिलाड़ी।
स्कूल नेशनल में जीता स्वर्ण
मैंने कबड्डी प्राथमिक कक्षाओं में ही कबड्डी खेलनी शुरू कर दी थी। सुबह व शाम को मैदान पर जमकर प्रैक्टिस करता था। मैंने स्कूल नेशनल में स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ सेना में भर्ती का प्रयास किया। वह खेल कोटे से सेना में भर्ती हो गया। अब अहमदाबाद में तैनात हूं और कबड्डी खेल रहा हूं। मेरा मानना है कि युवा मैदान पर बेहतर खेल का प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन कर सकते हैं। - संजय, खिलाड़ी।
बच्चों की प्रतिभा पहचान कर दें सहयोग
मेरे बेटा रोहित को कबड्डी पसंद थी। मैंने उनको सुताना गांव स्थित कबड्डी सेंटर पर भेजना शुरू किया। वह शुरुआत में ही अच्छा खेलने लगा। हमने उसको पूरी तरह से खेल के मैदान पर छोड़ दिया। उसके खाने पीने पर पूरा ध्यान रखा। मेरे मानना है कि बच्चों की प्रतिभा पहचान कर उसी दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए। इससे युवाओं की प्रतिभा को निखार मिलता है और वे खेलों में देश का नाम रोशन कर सकते हैं। - सुभाष, अभिभावक।
बेटे के लिए कबड्डी का मैदान कराया तैयार
मेरा उनका बेटा अनुज खेलों में जाना चाहता था। मैंने उनको कबड्डी में आगे आने की कही तो वह तैयार हो गया। अनुज आज कबड्डी में शानदार खेल का प्रदर्शन करता है। उनके प्रदर्शन पर पूरे गांंव की तालियां बजती हैं। बेटे को यहां तक पहुंचाने में परिवार का पूरा जोर लगा है। हर अभिभावक अपने बच्चों को आगे लाने का पूरा प्रयास करते हैं। - कृष्णलाल, अभिभावक।
कोच बोले - एकेडमी में मिट्टी और मैट के मैदान
सुताना गांव में 17 साल से कबड्डी की एकेडमी में चला रहे हैं। यहां मिट्टी और मैट के दो तरह के मैदान हैं। खिलाड़ी लगातार मेहनत कर राष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन कर रहे हैं। एकेडमी के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर हर प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं। खेलों इंडिया में भी स्वर्ण और रजत समेत तीन पदक जुड़ चुके हैं। जूनियर नेशनल में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। खिलाड़ी अनुज 2019 में हरियाणा की टीम का कप्तान रहे हैं। सुबह व शाम को दो-दो घंटे युवाओं को कबड्डी का प्रशिक्षण दिया जाता है। कई खिलाड़ी सरकारी नौकरी पा चुके हैं। - प्रवीण कुमार, संचालक, कबड्डी सेंटर सुताना।
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पानीपत। सुताना गांव की मिट्टी में कबड्डी खेलकर युवा अपनी प्रतिभा से राष्ट्रीय पटल पर अपनी चमक बिखेर रहे हैं। यहां करीब 17 साल से सेंटर चल रहा है। इस दौरान सैकड़ों खिलाड़ी यहां प्रतिभा का लोहा मनवाकर कई सरकारी विभागों में तैनात हैं। पांच खिलाड़ी प्रो कबड्डी में खेल रहे हैं।
हरियाणा की कबड्डी टीम का प्रतिनिधित्व कर दो खिलाड़ी आयुष तंवर और अरविंद जूनियर नेशनल में जीत चुके स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर चुके हैं। इनके अलावा युवा पीढ़ी को खेलों में आगे बढ़ा रहे हैं। इस समय सेंटर में करीब 70 खिलाड़ी कबड्डी के टिप्स ले रहे हैं। सुबह छह से आठ और शाम को चार से छह बजे तक प्रशिक्षण दिया जाता है।
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हरियाणा पुलिस के एएसआई संदीप कुमार और मदनलाल भी समय निकालकरखिलाड़ियों की प्रतिभा निखारने में अपना सहयोग देते हैं। सेंटर में कबड्डी खेलकर दो खिलाड़ी स्पोर्ट्स कोटे से सेना में भर्ती हुए हैं। जोनी और अजय ने जूनियर नेशनल में गोल्ड मेडल जीता है। दोनों अब सेना में जवान हैं। कबड्डी सेंटर के खिलाड़ियों के प्रतिनिधित्व में हरियाणा पिछली बार सब जूनियर में रजत और इस बार स्वर्ण पदक जीत चुका है।
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बचपन से कबड्डी में था रुझान
मेरा शुरू से ही कबड्डी खेलने में ध्यान था। सुताना गांव स्थित एकेडमी में शुरू की। मुझे शुरुआत में खेल में कुछ दिक्कत आई। मेरे जूनियर नेशनल में दो कांस्य और एक रजत पदक है। ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में दो और सीनियर नेशनल में तीन पदक जीत चुका हूं। प्रो कबड्डी के उप विजेता रह चुके हैं। मैं प्रो कबड्डी में पटना टीम के कप्तान हैं। - नीरज कुमार, खिलाड़ी।
जूनियर नेशनल में हरियाणा की कबड्डी टीम का कप्तान रह चुका
मैं कबड्डी खेल में आगे बढ़ा। अब प्रो कबड्डी में पटना पायलट टीम का कप्तान हूं। मैं जूनियर नेशनल में हरियाणा की कबड्डी टीम का कप्तान रह चुका हूं। मेरा सीनियर नेशनल में एक कांस्य पदक है। गांव के कबड्डी सेंटर पर बेहतर टिप्स सीखे हैं। इनके आधार पर आगे बढ़ा हूं। यही कारण है कि खेल के मैदान पर किसी को आगे नहीं निकलने देत। - अनुज कुमार, खिलाड़ी।
जयपुर पिंक पैंथर्स टीम में खेला
मैंजयपुर पिंक पैंथर्स टीम में खेलता हूं और ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी कांस्य पदक जीत चुका हूं। मेरा शुरू ही खेलों में जाने का मन था। अपने परिजनों को इस बारे में बताया। वे सब इसके लिए तैयार हो गए। गांव के कबड्डी सेंटर पर जाने लगा। मैं कुछ ही दिनों में कबड्डी से बोर सा हो गया। इसके बाद खेल में निशार आने लगा। मैं आज मैदान जमकर खेलता हूं। - अमित, खिलाड़ी।
दबंग दिल्ली टीम में खेल रहा हूं
मैं प्रो कबड्डी में दबंग दिल्ली टीम में खेलता हूं। मैंने गांव के सेंटर पर कबड्डी खेलना सीखा। मेरा सब जूनियर में स्वर्ण और जूनियर में राष्ट्र स्तर पर स्वर्ण पदक है। इसके अलावा ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में एक रजत पदक जीता है। मेरा कबड्डी को लेकर शुरू से ही मन था। गांव में सेंटर होने से पढ़ाई के साथ खेल दोनों में तालमेल बना रहा। उसको अपनी पढ़ाई करने में भी परेशानी नहीं रही। मैं अब रेलवे में नौकरी करता हूं। - अंकित, खिलाड़ी।
बंगलूरू बुल्स में खेल रहा
मैं शुरू से ही कबड्डी खेल रहा हूं। गांव के कबड्डी सेंटर पर अपनी प्रतिभा चमकाई। अब बंगलूरू बुल्स में खेल रहे हैं। मैंने जूनियर नेशनल में एक कांस्य और खेलो इंडिया में एक रजत पदक जीता है। ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में कांस्य पदक जीता है। युवा पीढ़ी को खेलों में आगे आना चाहिए। वे मैदान प बेहतर प्रदर्शन कर खुद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमका सकते हैं। मेरा पिछले दिनों प्रदेश की सरकारी नौकरी में चयन हुआ है। - रोहित, खिलाड़ी।
बेहतर खेल के आधार पर सेना में भर्ती हुआ
मैंने गांव की मिट्टी में जन्म लिया और यही पर बड़ा हुआ। मैंने शुरू से ही कबड्डी खेलना शुरू कर दिया। राष्ट्रीय स्तर पर जूनियर में स्वर्ण पदक है। इनके अलावा कई प्रतियोगिताओं में पदक जीता। कबड्डी खेल पर ही सेना में भर्ती हुआ। अब पूना में तैनात हूं और भारतीय सेना की कबड्डी टीम में खेल रहा हूं। मेरा मानना है कि युवाओं को पढ़ाई के साथ खेलों में आगे आना चाहिए। - जोनी, खिलाड़ी।
स्कूल नेशनल में जीता स्वर्ण
मैंने कबड्डी प्राथमिक कक्षाओं में ही कबड्डी खेलनी शुरू कर दी थी। सुबह व शाम को मैदान पर जमकर प्रैक्टिस करता था। मैंने स्कूल नेशनल में स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ सेना में भर्ती का प्रयास किया। वह खेल कोटे से सेना में भर्ती हो गया। अब अहमदाबाद में तैनात हूं और कबड्डी खेल रहा हूं। मेरा मानना है कि युवा मैदान पर बेहतर खेल का प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन कर सकते हैं। - संजय, खिलाड़ी।
बच्चों की प्रतिभा पहचान कर दें सहयोग
मेरे बेटा रोहित को कबड्डी पसंद थी। मैंने उनको सुताना गांव स्थित कबड्डी सेंटर पर भेजना शुरू किया। वह शुरुआत में ही अच्छा खेलने लगा। हमने उसको पूरी तरह से खेल के मैदान पर छोड़ दिया। उसके खाने पीने पर पूरा ध्यान रखा। मेरे मानना है कि बच्चों की प्रतिभा पहचान कर उसी दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए। इससे युवाओं की प्रतिभा को निखार मिलता है और वे खेलों में देश का नाम रोशन कर सकते हैं। - सुभाष, अभिभावक।
बेटे के लिए कबड्डी का मैदान कराया तैयार
मेरा उनका बेटा अनुज खेलों में जाना चाहता था। मैंने उनको कबड्डी में आगे आने की कही तो वह तैयार हो गया। अनुज आज कबड्डी में शानदार खेल का प्रदर्शन करता है। उनके प्रदर्शन पर पूरे गांंव की तालियां बजती हैं। बेटे को यहां तक पहुंचाने में परिवार का पूरा जोर लगा है। हर अभिभावक अपने बच्चों को आगे लाने का पूरा प्रयास करते हैं। - कृष्णलाल, अभिभावक।
कोच बोले - एकेडमी में मिट्टी और मैट के मैदान
सुताना गांव में 17 साल से कबड्डी की एकेडमी में चला रहे हैं। यहां मिट्टी और मैट के दो तरह के मैदान हैं। खिलाड़ी लगातार मेहनत कर राष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन कर रहे हैं। एकेडमी के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर हर प्रतियोगिता में हिस्सा लेते हैं। खेलों इंडिया में भी स्वर्ण और रजत समेत तीन पदक जुड़ चुके हैं। जूनियर नेशनल में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। खिलाड़ी अनुज 2019 में हरियाणा की टीम का कप्तान रहे हैं। सुबह व शाम को दो-दो घंटे युवाओं को कबड्डी का प्रशिक्षण दिया जाता है। कई खिलाड़ी सरकारी नौकरी पा चुके हैं। - प्रवीण कुमार, संचालक, कबड्डी सेंटर सुताना।