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Panipat News: जय जगन्नाथ-जय जगन्नाथ के जयकारों से गूंजा शहर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 21 Jun 2023 01:57 AM IST
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Jai Jagannath - The city echoed with the chants of Jai Jagannath
पानीपत। जगन्नाथ मंदिर पंचायत अग्रवाल वैश्य समाज ने मंगलवार को 29वां वार्षिक रथयात्रा उत्सव मनाया। उत्सव के तीसरे दिन जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ को गर्भगृह से बाहर लाकर व्यासपीठ पर विराजमान कराया। मुख्यातिथि सांसद संजय भाटिया, विधायक प्रमोद विज, भाजपा जिलाध्यक्ष डाॅ. अर्चना गुप्ता, पार्षद विजय जैन, उद्योगपति सत्यनारायण कंसल, सैशन जज डाॅ. निलिमा शांगला ने पूजा की। इसके बाद सिंंहासन, चवर, जुए, घोड़ी की बोली कराकर श्रद्धालुओं द्वारा लाए गए छप्पन भोग प्रसाद का भोग लगाया गया।
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मंदिर परिसर से शुरू हुई यात्रा अमर भवन चौक, धारी चौक, गुड़मंडी बाजार, कलंदर चौक, वीर भवन चुंगी से जगन्नाथ विहार, श्रीराम चौक, पुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी से होते हुुए देवी मंदिर पहुंची। रास्ते में श्रद्धालुओं को कंधों पर भगवान जगन्नाथ का रथ खींचते हुए जय जगन्नाथ के जयघोष लगाए। देवी मंदिर में माता बाला सुंदरी को नारियल चुनरी अर्पित कर प्रतिमाएं वापस देवी मंदिर में स्थापित की गईं। मंदिर समिति से भूषण गुप्ता, कन्हैया लाल गुप्ता, दलीप गुप्ता, लालचंद तायल, हितेंद्र कंसल, जयपाल कंसल, प्रदीप तायल, कमल कंसल, नीरज कंसल, हेमराज कंसल, गौरव गुप्ता माैजूद रहे।
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रथयात्रा के संचालन की जिम्मेदारी पवन कंसल, अशोक कैलासी ने निभाई। माटो, ढोल, घोड़ी, गणेश, कच्ची जोड़ी, चार्ली चैपलिन राजस्थान से, राधा-कृष्ण, शंकर-पार्वती के चित्र हिसार से मंगाकर यात्रा का भव्य शृंगार किया गया। जगह-जगह आरती कर प्रसाद बांटा गया । श्रद्धालुओं के लिए ठंडाई, आइसक्रीम, हलवा, कोल्ड ड्रिंक, जलजीरा की छबील लगाई। आखिर में मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद चखा।
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प्रधान राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि यात्रा में हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। पानीपत में 1894 से हर साल ये यात्रा निकाली जा रही है। 1918 में आई महामारी, 1947 में हुए बंटवारे और 1975 में लगी इमरजेंसी में भी यात्रा को निकाला गया था। कोरोना काल में भी परंपरा न टूटे इसलिए पदाधिकारियों ने गाड़ी से भगवान जगन्नाथ की यात्रा कराई थी।

प्रधान राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि पानीपत के कई सदस्य 1890 में लाला बलदेव दास पुरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने गए थे। वहां उन्होंने यात्रा में भाग लिया। इससे प्रेरित होकर वर्ष 1894 में पहली यात्रा जगन्नाथ मंदिर से देवी मंदिर तक शुरू की। तब से हर साल यह यात्रा निकाली जा रही है।
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