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मनुष्य का दोबारा जन्म पाना बेहद मुश्किल : उपेंद्र मुनि
Fri, 03 Oct 2025 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Fri, 03 Oct 2025 12:13 AM IST
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प्रवचनों का आनंद लेते श्रद्धालु।
संवाद न्यूज एजेंसी
समालखा। नई स्थानक में उपेंद्र मुनि ने कहा कि दुर्लभ मानव जीवन का अर्थ है कि मनुष्य का जन्म पाना अत्यंत मुश्किल है। क्योंकि कई योनिओं में भटकने के बाद मनुष्य जीवन मिलता है और यह दोबारा मिलना बहुत कठिन होता है। जैसे पेड़ से पत्ता गिर जाए, तो दोबारा नहीं जुड़ता, वैसे ही मनुष्य जीवन एक बार मिलने के बाद आसानी से नहीं मिलता। इसलिए इस जीवन को व्यर्थ न गंवाकर सत्संग, सेवा और भक्ति जैसे पुण्य के कार्य करने चाहिए। जिससे आत्मा का उद्धार हो सके और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल सके। लाखों योनिओं में भटकने के बाद ही जीव मनुष्य योनि में प्रवेश करता है। यह एक बहुत ही दुर्लभ अवसर होता है। मनुष्य के पास बुद्धि और विवेक होता है, जिससे वह अपने कर्मों से ईश्वर प्राप्ति या मोक्ष की दिशा में बढ़ सकता है। बाकी योनियों में यह क्षमता सीमित होती है। मनुष्य ही एकमात्र योनि है जिसमें जीव सत्संग, सेवा और ईश्वर की भक्ति जैसे पुण्य कर्म करके भवसागर से पार जा सकता है। मनुष्य को अपने इस दुर्लभ जीवन का सदुपयोग करते हुए विवेक से काम लेना चाहिए। उपेंद्र मुनि ने आह्वान किया कि दिवाली पर पटाखे न बजाएं, अपने बच्चों को कोई अच्छे उपहार दो, घर में सामान लेकर आएं।
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समालखा। नई स्थानक में उपेंद्र मुनि ने कहा कि दुर्लभ मानव जीवन का अर्थ है कि मनुष्य का जन्म पाना अत्यंत मुश्किल है। क्योंकि कई योनिओं में भटकने के बाद मनुष्य जीवन मिलता है और यह दोबारा मिलना बहुत कठिन होता है। जैसे पेड़ से पत्ता गिर जाए, तो दोबारा नहीं जुड़ता, वैसे ही मनुष्य जीवन एक बार मिलने के बाद आसानी से नहीं मिलता। इसलिए इस जीवन को व्यर्थ न गंवाकर सत्संग, सेवा और भक्ति जैसे पुण्य के कार्य करने चाहिए। जिससे आत्मा का उद्धार हो सके और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल सके। लाखों योनिओं में भटकने के बाद ही जीव मनुष्य योनि में प्रवेश करता है। यह एक बहुत ही दुर्लभ अवसर होता है। मनुष्य के पास बुद्धि और विवेक होता है, जिससे वह अपने कर्मों से ईश्वर प्राप्ति या मोक्ष की दिशा में बढ़ सकता है। बाकी योनियों में यह क्षमता सीमित होती है। मनुष्य ही एकमात्र योनि है जिसमें जीव सत्संग, सेवा और ईश्वर की भक्ति जैसे पुण्य कर्म करके भवसागर से पार जा सकता है। मनुष्य को अपने इस दुर्लभ जीवन का सदुपयोग करते हुए विवेक से काम लेना चाहिए। उपेंद्र मुनि ने आह्वान किया कि दिवाली पर पटाखे न बजाएं, अपने बच्चों को कोई अच्छे उपहार दो, घर में सामान लेकर आएं।