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Panipat News: महिला विरोधी सोच को खत्म करना जरूरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 20 Apr 2024 06:17 AM IST
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It is necessary to end anti-women thinking
संवाद न्यूज एजेंसी
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पानीपत। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आर्य पीजी महाविद्यालय में शुक्रवार को महिला सशक्तिकरण विषय पर अपराजिता कार्यक्रम किया गया। कार्यक्रम मे विभिन्न संकायों के करीब 90 विद्यार्थी शामिल हुए। मुख्य वक्ता महिला सेल की प्रभारी डॉ. मीनल तालस, इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विजय सिंह, जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश गाहल्याण और मनोविज्ञान विभाग की प्राध्यापिका खुशबू रही। प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता मुख्यातिथि रहे।

मुख्य वक्ता डॉ. मीनल तालस ने कहा कि लोगों को जगाने के लिए महिलाओं का जागृत होना जरूरी है। महिला एक बार जब अपना कदम उठा लेती है, कभी पीछे नहीं हटती। उनके आगे आने से परिवार के साथ गांव, समाज व देश आगे बढ़ता है। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सबसे पहले समाज में उनके अधिकारों और मूल्यों को मारने वाली उन सभी राक्षसी सोच को मारना जरूरी है।
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इनमें दहेज प्रथा, अशिक्षा, यौन हिंसा, असमानता, भ्रूण हत्या, महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा, बलात्कार, वेश्यावृत्ति, मानव तस्करी आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में पढ़ने वाली सभी छात्राओं को अपने अधिकारों के विषय में अवश्य पता होना चाहिए। साथ ही समाज में होने वाले गलत व्यवहार के प्रति सजग होकर लड़ना चाहिए।
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प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता ने कहा कि महिला सशक्तिकरण शब्द का प्रयोग समाज में महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने के लिए है। उनको इसके अर्थों को समझना होगा। इसमें कई नीतिगत उपाय कर महिलाओं का आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण शामिल है। डॉ. विजय सिंह ने वर्तमान समय में लड़कियों के शिक्षित होने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर लड़कियां शिक्षित होंगी तो वे अपने अधिकारों के प्रति सजग होंगी।
प्रो. दिनेश गाहल्याण ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का तात्पर्य महिला को शक्तिशाली बनाकर उन्हें स्वयं निर्णय लेने में सक्षम बनाना है। वर्षों से पुरुषों के हाथों महिलाओं को बहुत कष्ट सहना पड़ा है। पिछली शताब्दियों में, उन्हें लगभग अस्तित्वहीन माना जाता था। प्रो. खुशबू ने कहा कि महिला सशक्तिकरण शब्द का प्रयोग समाज में महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने और सभी मौजूदा लिंग भेदों को कम करने के लिए उठाए गए कदमों को इंगित करने के लिए किया जाता है।

व्यापक अर्थ में, इसमें कई नीतिगत उपाय करके महिलाओं का आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण शामिल है। बालिकाओं की अनिवार्य शिक्षा और यह सुनिश्चित करना कि उनमें से प्रत्येक को स्कूल भेजा जाए, महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। एक शिक्षित महिला अपनी जरूरतों के साथ-साथ अपने परिवार की जरूरतों का भी अच्छे से ख्याल रख सकती है। इस अवसर पर डॉ. राजेश टूर्ण, प्रो. अंकुर मित्तल, प्राध्यापिका प्रियांशा आदि मौजूद रहीं।
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