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Panipat News: जन्म-मुत्यु शाखा में मिलीं अनियमितता
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पानीपत। मेयर कोमल सैनी ने नगर निगम की जन्म-मुत्यु शाखा में अनियमितता पकड़ी है। उनके सामने प्राथमिक रूप से सामने आया कि कर्मचारी सीएचसी संचालकों की फाइल पहले पास करते हैं, जबकि सीधे फाइल जमा कराने वालों को 10 से 15 दिन तक इंतजार में बैठना पड़ता है।
वहीं एजेंट अपने नजदीकियों के बता पार्षदों से एक साथ कई-कई आवेदनों पर हस्ताक्षर करा लाते हैं। मेयर ने अधिकारियों और कर्मचारियों को बेहतर व्यवस्था का हिस्सा बनने के बात कही। मेयर कोमल सैनी ने बुधवार को सफाई शाखा की बैठक लेनी थी लेकिन डीएमसी अरुण भार्गव के न होने पर वह बैठक स्थगित कर दी।
उन्हाेंने जन्म-मुत्यु प्रमाण पत्र शाखा के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ बैठक की। उनसे जन्म, मृत्यु प्रमाण पत्र और डोमोसाइल के बारे में रिपोर्ट ली। मेयर ने कहा कि प्रमाण पत्र और डोमोसाइल के लिए लोग अक्सर चक्कर काटते हैं।
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ऐसे करते हैं गड़बड़ी ः जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र और डोमोसाइल में कर्मचारियों से लेकर अधिकारी तक संलिप्त हैं।
मेयर कोमल सैनी के सामने भी मामले आ चुके हैं। एक जानकार ने बताया कि कर्मचारी व सीधे आवेदनों की बजाय सीएचसी संचालकों के आवेदन पहले बनाते हैं।
सीएससी संचालक लोगों से इसके लिए धनराशि भी लेते हैं। जबकि नगर निगम में सीधे फाइल जमा कराने पर कोई चार्ज नहीं लगता है। सीएससी संचालकों की फाइल को उसी दिन मंजूर कर देते हैं, जबकि लोगों के सीधे जमा कराने वालों के प्रमाण पत्र 10 से 15 दिन में देते हैं।
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वहीं एजेंट अपने नजदीकियों के बता पार्षदों से एक साथ कई-कई आवेदनों पर हस्ताक्षर करा लाते हैं। मेयर ने अधिकारियों और कर्मचारियों को बेहतर व्यवस्था का हिस्सा बनने के बात कही। मेयर कोमल सैनी ने बुधवार को सफाई शाखा की बैठक लेनी थी लेकिन डीएमसी अरुण भार्गव के न होने पर वह बैठक स्थगित कर दी।
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उन्हाेंने जन्म-मुत्यु प्रमाण पत्र शाखा के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ बैठक की। उनसे जन्म, मृत्यु प्रमाण पत्र और डोमोसाइल के बारे में रिपोर्ट ली। मेयर ने कहा कि प्रमाण पत्र और डोमोसाइल के लिए लोग अक्सर चक्कर काटते हैं।
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ऐसे करते हैं गड़बड़ी ः जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र और डोमोसाइल में कर्मचारियों से लेकर अधिकारी तक संलिप्त हैं।
मेयर कोमल सैनी के सामने भी मामले आ चुके हैं। एक जानकार ने बताया कि कर्मचारी व सीधे आवेदनों की बजाय सीएचसी संचालकों के आवेदन पहले बनाते हैं।
सीएससी संचालक लोगों से इसके लिए धनराशि भी लेते हैं। जबकि नगर निगम में सीधे फाइल जमा कराने पर कोई चार्ज नहीं लगता है। सीएससी संचालकों की फाइल को उसी दिन मंजूर कर देते हैं, जबकि लोगों के सीधे जमा कराने वालों के प्रमाण पत्र 10 से 15 दिन में देते हैं।