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उद्योगों को आठ घंटे ही चलाने की दी अनुमति
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पानीपत। दो दिनों में 200 से अधिक एक्यूआई देखते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोयले से संचालित उद्योगों को आठ घंटे ही चलने की अनुमति दी है। अगर कोई उद्योग आठ घंटे से अधिक चलते मिला तो उस पर कार्रवाई होगी। इसके अलावा उद्योगों को सप्ताह में पांच ही दिन चलाया जाएगा। दो दिन उद्योगों को बंद रखना होगा।
गौरतलब है कि पानीपत में करीब दो हजार उद्योग कोयले पर चलते हैं। करीब 75 उद्योगों में ही पीएनजी व एलपीजी की सप्लाई है। सीपीसीबी की टीमें फील्ड में उद्योगों की मॉनीटरिंग भी कर रही हैं। उद्यमियों का कहना है कि पानीपत का एक्यूआई पिछले दो दिन से बढ़ा है इसलिए पानीपत के लिए फैसला जल्दी में लिया गया है जबकि पानीपत को इस नियम में शामिल करने के लिए थोड़ा इंतजार करना चाहिए था।
इन नियमों के लागू होने से कंबल, चादर, डाइंग व प्रिंटिंग के कारोबार पर खासा प्रभाव पड़ेगा। उत्पादन 50 प्रतिशत तक कम होगा। उद्योग प्रभावित होने से मिंक कंबल, चादर व डाइंग का कारोबार प्रभावित हो रहा है। ऐसे में जो ऑर्डर खरीदारों से मिले हैं, उन्हें समय पर पूरा नहीं किया जा सकेगा, इससे उद्यमियों को नुकसान भी होगा।
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एनसीआर में होने का पानीपत को हो रहा है नुकसान
पानीपत को एनसीआर में होने का नुकसान हो रहा है। सोनीपत, फरीदाबाद, गुरुग्राम, दिल्ली, नोयडा व गाजियाबाद में एक्यूूआई 200 से अधिक है। पानीपत का एक्यूआई पिछले दो दिन में 200 से अधिक हुआ है। उससे पहले एक सप्ताह तक एक्यूआई औसतन 180 रहा है। एक बार प्रदूषण का स्तर ग्रीन जोन में भी आया है। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर के लिए आदेश जारी किए हैं, इसलिए पानीपत को एनसीआर में होने का नुकसान हो रहा है।
दो घंटे में तो बॉयलर गर्म होता है, सरकार करे हस्तक्षेप
पानीपत का एक्यूूआई 200 से कम है। फिर भी पानीपत के लिए आठ घंटे बॉयलर चलाने के निर्देश दिए हैं। दो दिन उद्योगों को बंद रखा जाएगा। ऐसे में उद्यमियों को बड़ा नुकसान होगा। समय पर ऑर्डर पूरे नहीं हो सकेंगे। दो घंटे में बॉयलर गर्म होता है। छह घंटे में मात्र 30-40 प्रोडक्शन ही होगा। डाइंग यूनिट का 20-24 घंटे चलना जरूरी है। भीम राणा, अध्यक्ष डायर्स एसोसिएशन
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गौरतलब है कि पानीपत में करीब दो हजार उद्योग कोयले पर चलते हैं। करीब 75 उद्योगों में ही पीएनजी व एलपीजी की सप्लाई है। सीपीसीबी की टीमें फील्ड में उद्योगों की मॉनीटरिंग भी कर रही हैं। उद्यमियों का कहना है कि पानीपत का एक्यूआई पिछले दो दिन से बढ़ा है इसलिए पानीपत के लिए फैसला जल्दी में लिया गया है जबकि पानीपत को इस नियम में शामिल करने के लिए थोड़ा इंतजार करना चाहिए था।
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इन नियमों के लागू होने से कंबल, चादर, डाइंग व प्रिंटिंग के कारोबार पर खासा प्रभाव पड़ेगा। उत्पादन 50 प्रतिशत तक कम होगा। उद्योग प्रभावित होने से मिंक कंबल, चादर व डाइंग का कारोबार प्रभावित हो रहा है। ऐसे में जो ऑर्डर खरीदारों से मिले हैं, उन्हें समय पर पूरा नहीं किया जा सकेगा, इससे उद्यमियों को नुकसान भी होगा।
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एनसीआर में होने का पानीपत को हो रहा है नुकसान
पानीपत को एनसीआर में होने का नुकसान हो रहा है। सोनीपत, फरीदाबाद, गुरुग्राम, दिल्ली, नोयडा व गाजियाबाद में एक्यूूआई 200 से अधिक है। पानीपत का एक्यूआई पिछले दो दिन में 200 से अधिक हुआ है। उससे पहले एक सप्ताह तक एक्यूआई औसतन 180 रहा है। एक बार प्रदूषण का स्तर ग्रीन जोन में भी आया है। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर के लिए आदेश जारी किए हैं, इसलिए पानीपत को एनसीआर में होने का नुकसान हो रहा है।
दो घंटे में तो बॉयलर गर्म होता है, सरकार करे हस्तक्षेप
पानीपत का एक्यूूआई 200 से कम है। फिर भी पानीपत के लिए आठ घंटे बॉयलर चलाने के निर्देश दिए हैं। दो दिन उद्योगों को बंद रखा जाएगा। ऐसे में उद्यमियों को बड़ा नुकसान होगा। समय पर ऑर्डर पूरे नहीं हो सकेंगे। दो घंटे में बॉयलर गर्म होता है। छह घंटे में मात्र 30-40 प्रोडक्शन ही होगा। डाइंग यूनिट का 20-24 घंटे चलना जरूरी है। भीम राणा, अध्यक्ष डायर्स एसोसिएशन