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Panipat News: मन उदास, मरने के ख्याल आएं तो चिकित्सक को दिखाएं

Wed, 10 Sep 2025 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत Updated Wed, 10 Sep 2025 12:31 AM IST
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If you are depressed or have thoughts of dying, consult a doctor
दीपेन्द्र कुमार
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पानीपत। अकेलापन और सोशल मीडिया तक सिमटे रिश्तों से जिंदगी की डोर इतनी कमजोर हो चुकी है कि थोड़े से तनाव में ही लोग मौत को गले लगा रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि यदि मन उदास और बार-बार मौत के ख्याल आते हैं तो तुरंत मनोचिकित्सक को दिखाएं। मनोचिकित्सा विभाग में इस तरह के मामले तेजी से बढ़े हैं। औसतन प्रतिमाह छह से सात केस पहुंच रहे हैं। चिकित्सक उनकी काउंसिलिंग कर उन्हें अवसाद से बाहर लाने में मदद करते हैं।
जिले की बात करें तो कुछ समय से आत्महत्या की प्रवृति तेजी से बढ़ी है। स्वास्थ्य विभाग में तैनात मनोचिकित्सक डॉ. मोना नागपाल ने बताया कि उनके पास माह में पांच-छह केस ऐसे आते हैं जिनमें व्यक्ति खुद कहता है कि उनकी मरने की इच्छा हो रही है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले उनके पास एक 17 साल के छात्र को लेकर परिजन आए थे। जब छात्र की काउंसिलिंग की तो उसने बताया था कि क्लास में कम नंबर आने के बाद से उसकी जीने की इच्छा खत्म हो गई। छात्र बार-बार मरने की बात कर रहा था। मामले को गंभीरता से लेते हुए छात्र की काउंसिलिंग कराई और उपचार किया। कुछ दिन के बाद वह सामान्य हो गया। उनके पास इस तरह के मामले समय समय पर आते रहते हैं।
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आत्महत्या करने वालों में ज्यादातर प्रवासी श्रमिक
औद्योगिक नगरी पानीपत में कुछ समय में आत्महत्या के मामले भी बढ़े हैं। जून से अगस्त माह तक 57 से अधिक व्यक्तियों ने आत्महत्या की है। जिनमें पुरुषों की संख्या 45 से अधिक है। यही नहीं मरने वालों में ज्यादातर संख्या प्रवासी श्रमिक वर्ग की है जो घरों से दूर अकेले रहकर फैक्टरियों में काम कर रहे हैं। डॉ. मोना नागपाल ने बताया कि आत्महत्या के पीछे कई कारण होते हैं। लेकिन ज्यादातर मामलों में अकेलापन, सोशल मीडिया, नशे की प्रवृति और क्लेश अहम कारण हैं। लोगों की जिंदगी में सोशल मीडिया हावी हो गया है। घरों में सदस्य एक साथ होते हुए भी अपने-अपने फोन में लगे रहते हैं। जिससे वे अकेलापन का शिकार हो जाते हैं। सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय होने से मन में भेदभाव भी बढ़ जाता है। इसके साथ ही नशा और गृह क्लेश भी आत्महत्या के लिए जिम्मेदार हैं।
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किसी की तुलना करने से बचें
डॉ. नागपाल ने बताया कि परिवार में एक-दूसरे का सम्मान करें और समय दें। किसी की तुलना करने से बचें। सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा सक्रिय न करें। बच्चों के उदास होने पर उनसे बात करें और उदासी का कारण जानने का प्रयास करें। मानसिक तनाव के संकेत मिलने पर बिना किसी झिझक के मनोचिकित्सक के पास जाकर उपचार कराएं।
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