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Panipat News: आरसीएच व एमसीटीसी नंबर के बिना अल्ट्रासाउंड किया तो केंद्र पर होगी कार्रवाई

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jan 2025 01:40 AM IST
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If ultrasound is done without RCH and MCTC number, action will be taken against the center

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पानीपत। अब गर्भवती महिलाओं की प्रजनन व बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) आईडी और मां व शिशु ट्रैकिंग प्रणाली (एमसीटीएस) नंबर के बिना अल्ट्रासाउंड किया गया तो अल्ट्रासाउंड केंद्र पर कार्रवाई की जाएगी। गर्भवतियों को गर्भधारण के तीन माह के भीतर आरसीएच आईडी और मां व एमसीटीएस में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में पंजीकरण कराना होगा ताकि स्वास्थ्य विभाग उन्हें टैक कर उन्हें स्वास्थ्य लाभ दे सके और उनकी संस्थानों में डिलीवरी करवा सके।

यह नियम सरकारी व निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर लागू हो चुका है। इसके लिए महानिदेशक (स्वास्थ्य सेवाएं) की ओर से प्रदेश के सभी सिविल सर्जन को पत्र जारी किया गया है। नियम का पालन न करने वाले अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले यह नियम प्रदेश में सिर्फ करनाल में ही लागू था। इसकी सफलता के बाद अब इस नियम को स्वास्थ्य विभाग ने पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है। नियमानुसार गर्भवतियों का 16 से 20 सप्ताह के अंदर अल्ट्रासाउंड होना अनिवार्य है। इसके अलावा महिला रोग विशेषज्ञ गर्भवती की हालत के अनुसार अल्ट्रासाउंड करवा सकती है।
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अल्ट्रासाउंड के लिए ये दस्तावेज जरूरी

स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि गर्भवती को अल्ट्रासाउंड करवाना है तो उसके पास एक चिकित्सक का मान्य रेफरेंस कार्ड, पहचान पत्र, फोटो होना चाहिए। इसके बाद ही केंद्र गर्भवती का अल्ट्रासाउंड कर सकता है। अब इसमें आरसीएमएच को अनिवार्य कर दिया गया है। इस नंबर के पंजीकरण के बाद ही जांच होगी।
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वर्जन :
जिला सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि जच्चा बच्चा मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से अब आरसीएच और एमसीटीएस पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इससे गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग आसानी से हो सकेगी। अक्सर तीन महीने तक की गर्भावस्था के बारे में नहीं बताया जाता है। इसलिए महिलाएं पंजीकरण करवाने से बचती है, लेकिन अब यह पंजीकरण अनिवार्य होगा। इससे गर्भवती व शिशु के स्वास्थ्य के बारे में भी जानकारी रहेगी। जिले में जो गर्भवती नागरिक अस्पताल या फिर आंगनबाड़ी के जरिये उपचार करवा रही हैं। उन महिलाओं का पंजीकरण हो जाता है, लेकिन निजी अस्पतालों में उपचार करवाने वाली गर्भवती पंजीकृत नहीं हो पाती है। इसलिए यह निर्देश दिए हैं। इससे माताओं और शिशु की मृत्यु दर को कम करने के लिए मदद मिलेगी।
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