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Panipat News: हल्की बूंदाबांदी के बाद बढ़ी उमस
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पानीपत। मानसून का दौर शुरू होने के 25 दिन बीत जाने के बावजूद क्षेत्र में तेज बारिश न होने से किसानों का धान रोपाई का कार्य प्रभावित हो रहा है। धान रोपाई पर बारिश का इंतजार भारी पड़ता जा रहा है। मानसून का इंतजार सूखे में बीत रहा है। धान के खेत सूख चुके हैं, उनमें बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। किसान बारिश के इंतजार में टकटकी लगाए आसमान की ओर नजर गड़ाए हुए हैं लेकिन मानसून जैसे रूठ गया हो। बारिश न होने से धान रोपाई कर चुके किसानों के पसीने छूट रहे हैं। बारिश के इंतजार में किसान हताश हो चुके हैं।
बारिश के इंतजार में किसान धान रोपित खेतों को भरने के लिए डीजल पंपों की मदद ले रहे हैं। हालांकि वीरवार सुबह शहरी क्षेत्र में करीब 30 मिनट की हल्की बारिश ने लोगों को कुछ राहत दी लेकिन उसके बाद बढ़ी उमस ने जनजीवन का हाल बेहाल कर दिया है। शुक्रवार को भी दिनभर भीषण उमसभरी गर्मी का असर बना रहा जिससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। गुुरुवार से शुक्रवार शाम तक उमस ने जो रूप दिखाया, उसने किसानों सहित आमजन के पसीने छूटा दिए। उमस का प्रचंड रूप ऐसा था कि अधिकतम तापमान 35 डिग्री होने के बावजूद 46 डिग्री तापमान का अहसास हो रहा था। पंखा चलने के बावजूद आमजन पसीने से तरबतर हो रहे थे। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 35 डिग्री जबकि न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा की गति करीब 10 किलोमीटर प्रति घंटा और वातावरण में नमी की मात्रा 71 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं, आगामी सप्ताह तेज बारिश के आसार बने हुए हैं जिससे किसानों व आमजन को राहत मिल सकती है।
बॉक्स
क्या कहते हैं किसान
किसान भीम सिंह, बलबीर जागलान, राकेश कुमार ने बताया कि धान के खेतों में पड़ी दरारों को भरना मुश्किल है। ट्यूबवेल या डीजल पंप से खेत भरने के कुछ घंटे बाद ही खेत का पानी सूख जाता है। बारिश के बिना धरती प्यासी हो चुकी है। धरती की प्यास को केवल बारिश ही बुझा सकती है। मूसलाधार बारिश के बाद ही धरती की प्यास बूझ सकती है, तभी खेतों की दरार बंद हो सकती हैं। हालांकि जिले के कुछ हिस्सों में मूसलाधार बारिश ने किसानों को राहत भी दी है। लेकिन वह राहत कुछ समय के लिए रही है। अधिकतर क्षेत्र में बारिश न होने से किसानों की धान रोपाई को लेकर मुश्किल बढ़ी हुई हैं।
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वर्जन-
इस बार जिले में करीब 75 हजार हेक्टेयर में धान की फसल लगाई जाएगी। मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक आगामी दिनों में बारिश के प्रबल आसार बने हुए हैं जिसके बाद धान रोपाई में तेजी आएगी। बारिश होने से रोपित धान की फसल को फायदा होगा।
- डॉ. आदित्य डबास, उपनिदेशक, कृषि विभाग, पानीपत।
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बारिश के इंतजार में किसान धान रोपित खेतों को भरने के लिए डीजल पंपों की मदद ले रहे हैं। हालांकि वीरवार सुबह शहरी क्षेत्र में करीब 30 मिनट की हल्की बारिश ने लोगों को कुछ राहत दी लेकिन उसके बाद बढ़ी उमस ने जनजीवन का हाल बेहाल कर दिया है। शुक्रवार को भी दिनभर भीषण उमसभरी गर्मी का असर बना रहा जिससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। गुुरुवार से शुक्रवार शाम तक उमस ने जो रूप दिखाया, उसने किसानों सहित आमजन के पसीने छूटा दिए। उमस का प्रचंड रूप ऐसा था कि अधिकतम तापमान 35 डिग्री होने के बावजूद 46 डिग्री तापमान का अहसास हो रहा था। पंखा चलने के बावजूद आमजन पसीने से तरबतर हो रहे थे। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 35 डिग्री जबकि न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा की गति करीब 10 किलोमीटर प्रति घंटा और वातावरण में नमी की मात्रा 71 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं, आगामी सप्ताह तेज बारिश के आसार बने हुए हैं जिससे किसानों व आमजन को राहत मिल सकती है।
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क्या कहते हैं किसान
किसान भीम सिंह, बलबीर जागलान, राकेश कुमार ने बताया कि धान के खेतों में पड़ी दरारों को भरना मुश्किल है। ट्यूबवेल या डीजल पंप से खेत भरने के कुछ घंटे बाद ही खेत का पानी सूख जाता है। बारिश के बिना धरती प्यासी हो चुकी है। धरती की प्यास को केवल बारिश ही बुझा सकती है। मूसलाधार बारिश के बाद ही धरती की प्यास बूझ सकती है, तभी खेतों की दरार बंद हो सकती हैं। हालांकि जिले के कुछ हिस्सों में मूसलाधार बारिश ने किसानों को राहत भी दी है। लेकिन वह राहत कुछ समय के लिए रही है। अधिकतर क्षेत्र में बारिश न होने से किसानों की धान रोपाई को लेकर मुश्किल बढ़ी हुई हैं।
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इस बार जिले में करीब 75 हजार हेक्टेयर में धान की फसल लगाई जाएगी। मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक आगामी दिनों में बारिश के प्रबल आसार बने हुए हैं जिसके बाद धान रोपाई में तेजी आएगी। बारिश होने से रोपित धान की फसल को फायदा होगा।
- डॉ. आदित्य डबास, उपनिदेशक, कृषि विभाग, पानीपत।