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Panipat News: कैसे होंगे शहर के बिजली फॉल्ट ठीक, न उपकरण न पर्याप्त कर्मी
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पानीपत। भीषण गर्मी में बिजली के फॉल्ट भला कैसे ठीक होंगे जब बिजली निगम की ओर से फॉल्ट ठीक करने वाली एजेंसी को दिए गए ठेके में ही बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। एजेंसी के पास न तो कर्मचारी पूरे हैं और न ही फॉल्ट ठीक करने के लिए उनके पास उपकरण हैं। यहां तक की खंभों पर चढ़ने के लिए एजेंसी के पास सीढि़यां तक नहीं है। ये सीढ़ी भी लोगों को खरीद कर एजेंसी को देनी पड रही है। ये कर्मचारी फ्यूज के बोर्ड तक नहीं लगा पाते।
एजेंसी के कर्मचारी बिजली की इस तकनीकी लाइन के अकुशल हैं। अब तक दो कर्मचारी तो खंभों से गिरकर चोटिल तक हो चुके हैं। जबकि बिजली निगम की ओर से एजेंसी के धड़ाधड़ बिल पास किए जा रहे हैं। जिससे विशेष तौर पर सिटी डिवीजन और मॉडल टाउन डिवीजन एरिया के लोग बिजली किल्लत से बुरी तरह प्रभावित हैं। जो निगम कार्यालय में धरना देने से लेकर शिकायतें करने तो जाते हैं लेकिन उनका समाधान नहीं हो पाता। बिजली निगम के एसई धर्म सुहाग ने कार्यालय ज्वाइन करने के साथ ही इम्पीरियल कंपनी के पदाधिकारियों के साथ बैठक तो की जो बेनतीजा रही। अधिकारियों ने खुद माना कि एजेंसी की कार्यप्रणाली में काफी लापरवाही है बावजूद एजेंसी पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी। वहीं, कर्मचारी यूनियन नेताओं का कहना है कि एजेंसी काम करने में असफल रही है। इसका टेंडर रद्द कर दिया जाए। इससे जनता परेशान है और बिजली निगम की छवि खराब हो रही है। इन दोनों सब डिवीजन की जिम्मेदारी निगम कर्मचारियों को सौंपी जाए।
बॉक्स
दो साल के लिए 6.96 करोड़ में दिया ठेका, प्रतिमाह 29 लाख का खर्च
बिजली निगम ने सिटी और मॉडल टाउन सब डिवीजन के अंतर्गत ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस का ठेका दिसंबर 2023 को दिल्ली की इम्पीरियल इलेक्टि्क कंपनी को दिया था। जिसमें कंपनी की ओर से 128 कर्मचारी, नौ टू व्हीलर, चार फोर व्हीलर समेत एक स्काई लिफ्टर मशीन उपलब्ध करवानी थी। जबकि स्काई लिफ्टर तो दूर एजेंसी के पास सीढी तक नहीं है। इस पर 29 लाख रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जाना था। जो दो साल के लिए करीब 6.96 करोड़ बनता है।
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इस बजट में एजेंसी को 33 केवी सब स्टेशन को छोड़कर बाकी नेटवर्क की जिसमें 11 केवी और एलटी लाइनें जो मॉडल टाउन और सिटी सब डिवीजन में आती हैं का रखरखाव करना था जो आज तक भी सही ढंग से नहीं हो पाया है।
एजेंसी को मॉडल टाउन सब डिवीजन में पांच और सिटी सब डिवीजन में चार शिकायत केंद्र बनाने थे। इनमें से अब एक शिकायत केंद्र भी नहीं बना है। एजेंसी के कर्मचारियों को परिचालन मंडल कार्यालय पावर कट कार्यालय में ही बैठाया गया है। मॉडल टाउन सब डिवीजन में 67 कर्मचारी और सिटी में 56 कर्मचारी समेत एक इंजीनियर और चार टोलीफोन ऑपरेटर लगाए जाने थे। जो अब तक पूरे नहीं लग पाए हैं।
बिजली निगम के अधिकारियों का कहना है कि एजेंसी ने करीब छह माह से काम शुरू किया है। 6.31 लाख रुपये का एक बिल, 24.38 लाख का दूसरा बिल, 13.31 लाख का तीसरा बिल, 9.76 लाख का चौथा बिल, 9.54 लाख का पांचवां बिल और एक अन्य बिल 97 हजार का बिल पास किया है। यानी अब तक कंपनी को करीब 64 लाख का भुगतान किया जा चुका है।
वर्जन:
खुद खरीद कर दी सीढ़ी- मकौल
एजेंसी के पास न कर्मचारी न तकनीक ओर न सामान है। जिसकी वजह से एजेंसी लाइटें तक ठीक नहीं कर पा रही है। एजेंसी के कर्मचारियों के पास सीढ़ी तक नहीं है। अब अपने पैसे से इनको सीढ़ी खरीद कर दी है। इसकी कई बार शिकायत की जा चुकी है लेकिन अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है।
बलराम मकौल, निवर्तमान पार्षद, वार्ड 18
वर्जन:
रद्द होना चाहिए ठेका- यूनियन
एजेंसी के कर्मचारी व साधन तक पूरे नहीं है। फॉल्ट ठीक करने के काम में एजेंसी पूरी तरह से असफल रही है। इस एजेंसी का टेंडर रद्द होना चाहिए। इससे जनता परेशान हैं और बिजली निगम की छवि खराब हो रही है। इन दोनों सब डिवीजन की जिम्मेदारी निगम कर्मचारियों को सौंपी जाए ताकि लोगों को अघोषित कटों से राहत मिल सके।
जितेंद्र सैनी, राज्य उप्रधान, यूनियन।
वर्जन-
बैठक लेकर दिए निर्देश लेकिन ज्यादा जानकार नहीं- एसई
इम्पीरियल कंपनी वालों के साथ बैठक की थी। उनको सही ढंग से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे संबंधित ज्यादा जानकारी मेरे पास नहीं है। ये जानकारी दूसरे अधिकारी ही दे सकते हैं।
धर्म सुहाग, एसई, बिजली निगम।
वर्जन:
हमारे कर्मचारी पूरे हैं। बीच में कुछ कारण वश कुछ परेशानी हो गई थी लेकिन अब हमारे पास कर्मचारियों और संसाधानों की कोई कमी नहीं है। हमारे कर्मचारी तुंरत प्रभाव से शिकायतों का समाधान भी करते हैं।
राजेश, अतिरिक्त प्रभारी, इम्पीरियल कंपनी।
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एजेंसी के कर्मचारी बिजली की इस तकनीकी लाइन के अकुशल हैं। अब तक दो कर्मचारी तो खंभों से गिरकर चोटिल तक हो चुके हैं। जबकि बिजली निगम की ओर से एजेंसी के धड़ाधड़ बिल पास किए जा रहे हैं। जिससे विशेष तौर पर सिटी डिवीजन और मॉडल टाउन डिवीजन एरिया के लोग बिजली किल्लत से बुरी तरह प्रभावित हैं। जो निगम कार्यालय में धरना देने से लेकर शिकायतें करने तो जाते हैं लेकिन उनका समाधान नहीं हो पाता। बिजली निगम के एसई धर्म सुहाग ने कार्यालय ज्वाइन करने के साथ ही इम्पीरियल कंपनी के पदाधिकारियों के साथ बैठक तो की जो बेनतीजा रही। अधिकारियों ने खुद माना कि एजेंसी की कार्यप्रणाली में काफी लापरवाही है बावजूद एजेंसी पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी। वहीं, कर्मचारी यूनियन नेताओं का कहना है कि एजेंसी काम करने में असफल रही है। इसका टेंडर रद्द कर दिया जाए। इससे जनता परेशान है और बिजली निगम की छवि खराब हो रही है। इन दोनों सब डिवीजन की जिम्मेदारी निगम कर्मचारियों को सौंपी जाए।
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दो साल के लिए 6.96 करोड़ में दिया ठेका, प्रतिमाह 29 लाख का खर्च
बिजली निगम ने सिटी और मॉडल टाउन सब डिवीजन के अंतर्गत ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस का ठेका दिसंबर 2023 को दिल्ली की इम्पीरियल इलेक्टि्क कंपनी को दिया था। जिसमें कंपनी की ओर से 128 कर्मचारी, नौ टू व्हीलर, चार फोर व्हीलर समेत एक स्काई लिफ्टर मशीन उपलब्ध करवानी थी। जबकि स्काई लिफ्टर तो दूर एजेंसी के पास सीढी तक नहीं है। इस पर 29 लाख रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जाना था। जो दो साल के लिए करीब 6.96 करोड़ बनता है।
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इस बजट में एजेंसी को 33 केवी सब स्टेशन को छोड़कर बाकी नेटवर्क की जिसमें 11 केवी और एलटी लाइनें जो मॉडल टाउन और सिटी सब डिवीजन में आती हैं का रखरखाव करना था जो आज तक भी सही ढंग से नहीं हो पाया है।
एजेंसी को मॉडल टाउन सब डिवीजन में पांच और सिटी सब डिवीजन में चार शिकायत केंद्र बनाने थे। इनमें से अब एक शिकायत केंद्र भी नहीं बना है। एजेंसी के कर्मचारियों को परिचालन मंडल कार्यालय पावर कट कार्यालय में ही बैठाया गया है। मॉडल टाउन सब डिवीजन में 67 कर्मचारी और सिटी में 56 कर्मचारी समेत एक इंजीनियर और चार टोलीफोन ऑपरेटर लगाए जाने थे। जो अब तक पूरे नहीं लग पाए हैं।
बिजली निगम के अधिकारियों का कहना है कि एजेंसी ने करीब छह माह से काम शुरू किया है। 6.31 लाख रुपये का एक बिल, 24.38 लाख का दूसरा बिल, 13.31 लाख का तीसरा बिल, 9.76 लाख का चौथा बिल, 9.54 लाख का पांचवां बिल और एक अन्य बिल 97 हजार का बिल पास किया है। यानी अब तक कंपनी को करीब 64 लाख का भुगतान किया जा चुका है।
वर्जन:
खुद खरीद कर दी सीढ़ी- मकौल
एजेंसी के पास न कर्मचारी न तकनीक ओर न सामान है। जिसकी वजह से एजेंसी लाइटें तक ठीक नहीं कर पा रही है। एजेंसी के कर्मचारियों के पास सीढ़ी तक नहीं है। अब अपने पैसे से इनको सीढ़ी खरीद कर दी है। इसकी कई बार शिकायत की जा चुकी है लेकिन अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है।
बलराम मकौल, निवर्तमान पार्षद, वार्ड 18
वर्जन:
रद्द होना चाहिए ठेका- यूनियन
एजेंसी के कर्मचारी व साधन तक पूरे नहीं है। फॉल्ट ठीक करने के काम में एजेंसी पूरी तरह से असफल रही है। इस एजेंसी का टेंडर रद्द होना चाहिए। इससे जनता परेशान हैं और बिजली निगम की छवि खराब हो रही है। इन दोनों सब डिवीजन की जिम्मेदारी निगम कर्मचारियों को सौंपी जाए ताकि लोगों को अघोषित कटों से राहत मिल सके।
जितेंद्र सैनी, राज्य उप्रधान, यूनियन।
वर्जन-
बैठक लेकर दिए निर्देश लेकिन ज्यादा जानकार नहीं- एसई
इम्पीरियल कंपनी वालों के साथ बैठक की थी। उनको सही ढंग से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे संबंधित ज्यादा जानकारी मेरे पास नहीं है। ये जानकारी दूसरे अधिकारी ही दे सकते हैं।
धर्म सुहाग, एसई, बिजली निगम।
वर्जन:
हमारे कर्मचारी पूरे हैं। बीच में कुछ कारण वश कुछ परेशानी हो गई थी लेकिन अब हमारे पास कर्मचारियों और संसाधानों की कोई कमी नहीं है। हमारे कर्मचारी तुंरत प्रभाव से शिकायतों का समाधान भी करते हैं।
राजेश, अतिरिक्त प्रभारी, इम्पीरियल कंपनी।