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बॉयोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन ना कराने वाले 23 निजी अस्पताल व नर्सिंग होम को नोटिस जारी
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हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बॉयोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के तहत रजिस्ट्रेशन न कराने पर 23 निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। बोर्ड ने इन अस्पतालों से रजिस्ट्रेशन न कराने का कारण पूछते हुए जल्द रजिस्ट्रेशन कराने के निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि ये अस्पताल और नर्सिंग होम अपने बॉयो मेडिकल अपशिष्ट को कहा नष्ट करते हैं। जिले में कुल 199 निजी अस्पताल और नर्सिंग होम है। 173 अस्पतालों का बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के तहत बोर्ड में रजिस्ट्रेशन है। जिन अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन नहीं है उनको नोटिस जारी किया गया है।
पर्यावरण होता है प्रदूषित
बायो मेडिकल अपशिष्ट संक्रामक होते हैं। इनका व्यवस्थित तरीके से निपटारा नहीं होने से संक्रमण होने की आशंका रहती है। कई बार इन अपशिष्टों को जहां तहां फेंक दिया जाता है या जला दिया जाता है। इसके अलावा नदी नालों में भी प्रवाहित कर दिया जाता है। धीरे धीरे ये अपशिष्ट अन्य ठोस अपशिष्ट के साथ मिल जाते हैं और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं।
बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के तहत इनका रजिस्ट्रेशन जरूरी
मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर बायो मेडिकल अपशिष्टों से होने वाले प्रतिकूल प्रभावों के प्रबंधन के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धार 6, 8 एवं 9 द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करते हुए देश में बायो मेडिकल अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 1998 दिनांक 20 जुलाई 1998 को अधिसूचित किया गया था। यह नियम उन सभी व्यक्तियों पर लागू है जो किसी भी रूप में बायो मेडिकल अपशिष्ट का जनन, संग्रहण, ग्रहण, भंडारण, परिवहन, उपचार, डिस्पोजल या हैंडलिंग करते हैं। इनमें अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक, डिस्पेंसरीपशु मेडिकल संस्थान, पशु घर, पैथोलॉजिकल प्रयोगशालाएं, ब्लड बैंक, आयुष अस्पताल, क्लीनिकल संस्थान, शोध एंव शैक्षणिक संस्थाएं, स्वास्थ्य कैंप, मेडिकल अथवा शल्य कैंप, टीकाकरण कैंप, रक्तदान कैंप, विद्यालयों के प्राथमिक उपचार कक्ष, विधि प्रयोगशालाएं एवं शोघ प्रयोगशालाएं शामिल हैं।
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23 निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनका हमारे पास रजिस्ट्रेशन नहीं है। इस बारे में कैंप लगाकर अस्पतालों को जागरूक भी किया जाएगा।
-संदीप सिंह, रीजनल ऑफिसर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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पर्यावरण होता है प्रदूषित
बायो मेडिकल अपशिष्ट संक्रामक होते हैं। इनका व्यवस्थित तरीके से निपटारा नहीं होने से संक्रमण होने की आशंका रहती है। कई बार इन अपशिष्टों को जहां तहां फेंक दिया जाता है या जला दिया जाता है। इसके अलावा नदी नालों में भी प्रवाहित कर दिया जाता है। धीरे धीरे ये अपशिष्ट अन्य ठोस अपशिष्ट के साथ मिल जाते हैं और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं।
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बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के तहत इनका रजिस्ट्रेशन जरूरी
मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर बायो मेडिकल अपशिष्टों से होने वाले प्रतिकूल प्रभावों के प्रबंधन के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धार 6, 8 एवं 9 द्वारा दी गई शक्तियों का प्रयोग करते हुए देश में बायो मेडिकल अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली 1998 दिनांक 20 जुलाई 1998 को अधिसूचित किया गया था। यह नियम उन सभी व्यक्तियों पर लागू है जो किसी भी रूप में बायो मेडिकल अपशिष्ट का जनन, संग्रहण, ग्रहण, भंडारण, परिवहन, उपचार, डिस्पोजल या हैंडलिंग करते हैं। इनमें अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक, डिस्पेंसरीपशु मेडिकल संस्थान, पशु घर, पैथोलॉजिकल प्रयोगशालाएं, ब्लड बैंक, आयुष अस्पताल, क्लीनिकल संस्थान, शोध एंव शैक्षणिक संस्थाएं, स्वास्थ्य कैंप, मेडिकल अथवा शल्य कैंप, टीकाकरण कैंप, रक्तदान कैंप, विद्यालयों के प्राथमिक उपचार कक्ष, विधि प्रयोगशालाएं एवं शोघ प्रयोगशालाएं शामिल हैं।
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23 निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनका हमारे पास रजिस्ट्रेशन नहीं है। इस बारे में कैंप लगाकर अस्पतालों को जागरूक भी किया जाएगा।
-संदीप सिंह, रीजनल ऑफिसर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड