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-अंग्रेजी दुनियाभर के दिमाग को जोड़ती है, लेकिन हिंदी दिल जोड़ने का काम करती है
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अंग्रेजी दुनियाभर के दिमाग को जोड़ती है, लेकिन हिंदी दिल जोड़ने का काम करती है। विदेशों में बसे लोग भी अपनों से मिलकर अपनी भाषा में बात करना पसंद करते हैं। ये हिंदी की ताकत है, जिसे गूगल और फेसबुक जैसी दुनिया की बड़ी कंपनियां पहचान रही हैं।
भारत ही नही बल्कि दुनिया के अनेकों देशों में हिंदी बोली जाती है। लेकिन हिंदी सिर्फ राष्ट्रभाषा बनकर रह गई है। नई पीढ़ी की हिंदी के मुकाबले अंग्रेजी में ज्यादा रुचि ले रहे हैं।
-विपिन दाहिया
हेल्पिंग यूथ सोसाइटी के अध्यक्ष प्रवीन वर्मा का कहना है कि हमें हिंदी दिवस के दिन से ही नया बदलाव लाना चाहिए, जिसमें अपने घरों से ही शुद्ध हिंदी बोलने का काम किया जाना चाहिए।
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हिंदी कब तक अपने सहचरी के साथ चलेगी
26 जनवरी 1950 को भारत में संविधान लागू हुआ। संविधान के अनुसार 15 वर्षों के बाद यानी 26 जनवरी 1965 को अंग्रेजी भाषा के दासता से मुक्ति मिल जाएगी। लेकिन उससे पहले ही तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भाषा को लेकर दक्षिण भारतीय और पूर्वोत्तर के लोगों की संवेदनाओं को समझते हुए 1963 में जब उनके प्रधानमंत्री रहते ऑफिशल लैंग्विज ऐक्ट पास किया गया तो उसमें प्रावधान था कि 1965 के बाद भी हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी का प्रयोग किया जा सकता है।
-लोकेश झा
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भारत ही नही बल्कि दुनिया के अनेकों देशों में हिंदी बोली जाती है। लेकिन हिंदी सिर्फ राष्ट्रभाषा बनकर रह गई है। नई पीढ़ी की हिंदी के मुकाबले अंग्रेजी में ज्यादा रुचि ले रहे हैं।
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-विपिन दाहिया
हेल्पिंग यूथ सोसाइटी के अध्यक्ष प्रवीन वर्मा का कहना है कि हमें हिंदी दिवस के दिन से ही नया बदलाव लाना चाहिए, जिसमें अपने घरों से ही शुद्ध हिंदी बोलने का काम किया जाना चाहिए।
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हिंदी कब तक अपने सहचरी के साथ चलेगी
26 जनवरी 1950 को भारत में संविधान लागू हुआ। संविधान के अनुसार 15 वर्षों के बाद यानी 26 जनवरी 1965 को अंग्रेजी भाषा के दासता से मुक्ति मिल जाएगी। लेकिन उससे पहले ही तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भाषा को लेकर दक्षिण भारतीय और पूर्वोत्तर के लोगों की संवेदनाओं को समझते हुए 1963 में जब उनके प्रधानमंत्री रहते ऑफिशल लैंग्विज ऐक्ट पास किया गया तो उसमें प्रावधान था कि 1965 के बाद भी हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी का प्रयोग किया जा सकता है।
-लोकेश झा