खतरा: हेपेटाइटिस बी का हॉटस्पॉट है हरियाणा, रोहतक पीजीआई ने दस साल के अध्ययन के बाद किया खुलासा
अध्ययन के मुताबिक, कुल 4828 मरीजों में 70 फीसदी ग्रामीण और 30 फीसदी शहरी क्षेत्र से हैं। इसके साथ ही 67 फीसदी पुरुष और 33 फीसदी महिलाएं संक्रमित मिलीं।
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पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (पीजीआईएमएस) रोहतक में बीते एक दशक में हेपेटाइटिस-बी के इलाज के लिए आए रोगियों पर एक अध्ययन किया गया। इसमें सामने आया कि हरियाणा हेपेटाइटिस-बी का हॉटस्पॉट है। इस दौरान 4850 हेपेटाइटिस-बी के मरीज इलाज के लिए आए। इनमें से अधिकतर मरीज पानीपत, करनाल, कैथल, सोनीपत और जींद के थे।
अध्ययन में एक सितंबर 2010 से 31 अगस्त 2020 तक इलाज के लिए आए हेपेटाइटिस-बी से संक्रमित 4850 रोगियों की पहचान की गई, जिनमें से 22 संक्रमितों ने अध्ययन में शामिल होने से इनकार कर दिया। अब कुल 4828 रोगियों की विस्तृत जांच में सामने आया कि हेपेटाइटिस-बी प्रदेश की प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है। जागरूकता न होने से लोगों को इस बीमारी की गंभीरता का पता नहीं है।
40 फीसदी मरीजों में संक्रमण की वजह इंजेक्शन, सर्जरी और दांतों का इलाज पाया गया। अध्ययन में लोगों को हेपेटाइटिस-बी के संक्रमण और इसकी वजह से लीवर कैंसर की स्थिति से बचाने के लिए हॉटस्पॉट जिलों में नियमित स्क्रीनिंग पर जोर दिया गया है। पीजीआईएमएस रोहतक के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी एवं माइक्रोबायोलॉजी के हेड डॉ. प्रवीण मल्होत्रा, गाइनाकोलॉजी एवं ऑब्सटेट्रिक्स विभाग से डॉ. वाणी मल्होत्रा, डॉ. उषा गुप्ता और डॉ. योगेश सांवरिया का अध्ययन में योगदान रहा।
ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक मरीज, पुरुष ज्यादा संक्रमित
71 मरीजों में लीवर सिरोसिस और 10 में कैंसर की स्थिति पाई गई
इलाज के दौरान 4828 में से 71 मरीजों में लीवर सिरोसिस की स्थिति पाई गई। इनमें से 10 मरीजों में कैंसर पाया गया। सिरोसिस की स्थिति तक पहुंचे इन 71 मरीजों में से 52 पुरुष और 18 महिलाएं रहीं।
हॉटस्पॉट वाले क्षेत्रों में स्क्रीनिंग से हेपेटाइटिस-बी रोकने में सहायता मिलेगी। जल्द डायग्नोसिस यानी संक्रमण का जल्द पता लगने से हेपेटाइटिस-बी के मरीजों को लीवर सिरोसिस और कैंसर जैसी गंभीर स्थित में पहुंचने से बचाया जाना संभव होगा। - डॉ. प्रवीण मल्होत्रा, हेड, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग, पीजीआईएमएस रोहतक