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Haryana Election: इस सीट से भाजपा मंत्री पर लगाएगी दांव या फिर नए चेहरे को मौका... कांग्रेस का खुलेगा खाता!

Wed, 28 Aug 2024 10:33 AM IST
शाहरुख खान जगमहेंद्र सरोहा, अमर उजाला, पानीपत
जगमहेंद्र सरोहा, अमर उजाला, पानीपत Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 28 Aug 2024 10:33 AM IST
सार

हरियाणा की इस सीट पर भाजपा टिकट के लिए पसोपेश में हैं। मंत्री ढांडा दो बार से जीत दर्ज कर रहे हैं। इस बार नया चेहरा उतर सकता है। कांग्रेस को भी खाता खुलने की उम्मीद है।

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Haryana Election 2024 BJP in dilemma over ticket, Congress hopes to open its account
Haryana Election 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पानीपत ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मजबूत सीट माना जाती रही है। 2009 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर अब तक तीन चुनाव हो चुके हैं। एक बार निर्दलीय ओमप्रकाश जैन और दो बार भाजपा से महिपाल ढांडा जीते हैं। ढांडा सैनी सरकार में पंचायत एवं सहकारिता राज्यमंत्री हैं, जबकि 2009 में निर्दलीय जीतने वाले ओमप्रकाश जैन भी कांग्रेस सरकार में परिवहन मंत्री रहे थे।
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महिपाल ढांडा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहने के साथ छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय रहे हैं। माना जा रहा है कि एकबार फिर उन पर दांव खेला जा सकता है, लेकिन भाजपा का ही एक वर्ग उनके बजाय किसी नए को चेहरा बनाना चाहता है। 
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भाजपा पार्षद रहे विजय जैन पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी में थे, लेकिन पिछले दिनों उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया। इसी कारण पार्टी टिकट देने को लेकर पसापेश में है। वहीं, कांग्रेस में भी दावेदारों की लंबी लिस्ट है। कांग्रेस से 60 नेताओं ने दावेदारी जताई है। 
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इनमें से 15 तो सक्रिय भी हैं। दावेदारों की संख्या देख कांग्रेस को उम्मीद है कि इस बार उसका खाता खुल सकता है। जजपा की टिकट पर पिछली बार 27.42 प्रतिशत वोट पाने वाले देवेंद्र कादियान इस बार समालखा से उतरने की तैयारी में हैं। इनलो में भी कई दावेदार हैं।

चुनावी माहाैल पर रमेश वर्मा और विजय कुमार बताते हैं कि इस बार विधानसभा चुनाव में विकास के साथ रोजगार बड़ा मुद्दा रहेगा। बाहरी कॉलोनियों में पानी निकासी भी बड़ा विषय है।

यहां लाेगों की मूलभूत सुविधाओं में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन अभी काम करने की जरूरत है। सफीदों रोड और पुराना हरिद्वार रोड का निर्माण केवल दावों तक सिमटा रहा। खेल, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभी काफी काम करने की जरूरत है।
 

बाहरी कॉलोनियों के मिश्रित वोटर इस बार भी निर्णायक साबित होंगे
पानीपत ग्रामीण विधानसभा में सामान्य वर्ग के 60 फीसदी, एससी व बीसी-ए 20-20 फीसदी व बीसी-बी की 10 फीसदी मतदाता हैं। इस हलके में करीब 31 गांव और 65 से अधिक कॉलोनियां हैं। गांवों में सामान्य वर्ग का मतदान प्रतिशत अधिक है और बाहरी कॉलोनियों में मिश्रित लोग हैं।

गांवाें के वोट कई बार प्रत्याशियों में बंट जाते हैं, ऐसे में बाहरी कॉलोनियों के वोट चुनाव में निर्णायक साबित होते हैं। इन्हीं कॉलोनियों से हार-जीत तय होती रही है। 2009 में चुनाव जीते ओमप्रकाश जैन की बाहरी कॉलोनियों में पकड़ अच्छी थी। महिपाल ढांडा ने भी उन्हीं की राह पर चलकर बाहरी कॉलोनियों में पकड़ मजबूत बनाई और दो बार जीते।

औद्योगिक सेक्टरों में विकास के साथ सुविधाओं की दरकार
शहर के चारों बड़े औद्योगिक सेक्टर पानीपत ग्रामीण विधानसभा में आते हैं। गांवों में नए विकसित उद्योगों में विकास और सुविधाओं की दरकार है। उद्यमी हर मंच पर अपनी मांग रख चुके हैं।

सेक्टर-29 इंडस्ट्रियल एस्टेट एसोसिएशन के प्रधान श्रीभगवान अग्रवाल ने बताया कि पिछले सालों से सुविधा बढ़ी हैं, लेकिन अभी औद्योगिक सेक्टरों के लिए काम करने की आवश्यकता है।
 

ढांडा दो बार जीते पर मंत्री बनने के बाद बढ़ाई सक्रियता
महिपाल ढांडा को दूसरी पारी के आखिरी दिनों में राज्यमंत्री का दर्जा मिला। वे पिछले करीब 10 साल से विधायक हैं, लेकिन मंत्री बनने के बाद बचे 72 दिनों में हलके में ज्यादा सक्रिय दिखे। कई गांवों दरबार लगाए। प्रत्येक गांव में मिलीं 60 से 70 शिकायतों के समाधान का भरसक प्रयास भी किया।

इससे पहले विधायक के रूप में वे सरकारी विश्राम गृह में दरबार लगाते थे, लेकिन बीच में इसको बंद कर दिया था। अपने कार्यकाल में उन्होंने डाहर गांव में करीब 450 करोड़ रुपये की लागत से नई शुगर मिल लगवाई।

सड़कों के चौड़ीकरण और बिजली सप्लाई के लिए पावर हाउस के उद्घाटन कराए, लेकिन ये सब आचार संहिता में फंसकर रह गए। खोतपुरा गांव की सीएचसी में एम्स दिल्ली का सेंटर लाने का दावा नहीं हो पाया और न ही 26 स्कूलों में स्मार्ट क्लास रूम बन पाए। बाहरी कॉलोनियों में सीवर और पेयजल लाइन पर करोड़ों खर्च करने के साथ दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर यहां पानी निकासी का काफी हद तक समाधान किया गया।
 

ये प्रमुख कार्य किए
- 260 किलोमीटर सीवर लाइन का 240 करोड़ से विस्तार कराया।
-अर्जुन नगर और बरसत रोड पर करीब 89 करोड़ से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनवाए।
-125 किलोमीटर गलियों व नालियों पर 200 करोड़ खर्चे। 10 नए पार्क बनवाए।
-गांव बराना में आईटीआई और खोतपुरा में सीएचसी का निर्माण कराया।
-शोंधापुर गांव में स्टेडियम और इनडोर हाल बनवाया।

इन वादों का पूरा होना बाकी
-औद्योगिक सेक्टर 25 और 29 में कॉमन बॉयलर लगवाना।
-जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) प्रोजेक्ट का निर्माण ।
-औद्योगिक सेक्टरों में बाईपास रोड और आंतरिक सड़कों का निर्माण।
-खोतपुरा गांव में एम्स दिल्ली का सेंटर नहीं आ पाया।

जन्म : 16 सितंबर 1974, मतलौडा खंड के कवी गांव में हुआ।
शिक्षा : आर्य कॉलेज पानीपत से स्नातक की डिग्री प्राप्त की है।
राजनीतिक जीवन : प्रदेश के बड़े जाट नेताओं में से एक। आठवीं कक्षा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल हुए। भाजयुमो में जिला के बाद प्रदेशाध्यक्ष बनें। किसान प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष भी रहे।
 

कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं ला पाए
विकास के दावे खोखले हैं। 10 साल में हलके में कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं आया। शुगर मिल और बस स्टैंड पुरानी योजना हैं। बाहरी कॉलोनियों में विकास का दावा भी पूरा नहीं किया। यहां बारिश होते ही गलियों से निकल पाना मुश्किल हो जाता है।-देवेंद्र कादियान, जजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं उप विजेता 2019 विधानसभा चुनाव।
 

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