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Panipat News: हनुमान स्वरूप ने किया व्रत का पारण, अधिकतर सभा गंगा स्नान को पहुंचीं
Sun, 05 Oct 2025 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Sun, 05 Oct 2025 12:38 AM IST
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हनुमान स्वरूप से आशीर्वाद लेते भक्तजन। स्वयं
- फोटो : mathura
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। हनुमान स्वरूप ने श्रीराम राज्याभिषेक के बाद शनिवार को व्रत का पारण कर लिया। करीब सौ सभाओं के सदस्य गंगा स्नान के लिए हरिद्वार व ऋषिकेश पहुंचे। वहीं कुछ सभा के सदस्यों ने यहीं पर व्रत का पारण किया। हनुमान स्वरूप 41, 21, 11 और पांच दिन के व्रत पर बैठे थे।
हनुमान स्वरूप ने इससे पहले शुक्रवार को श्रीराम के राज्यभिषेक में शामिल हुए और फिर रातभर फेरी लगाई। कई हनुमान सभा ने शनिवार तड़के तक फेरी लगाई। हनुमान स्वरूप ने दूर-दूर जाकर लोगों को अपना आशीर्वाद दिया। शोभायात्रा विशेष आकर्षण का केंद्र रही। हनुमान सभा से जुटे विक्की बतरा और रमेश कुमार ने बताया कि हनुमान स्वरूप निकालने की परंपरा 85 वर्ष पहले 1940 में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लैय्या शहर में शुरू की थी। राम भक्त ढालूराम और दुलीचंद लैय्या से बंटवारे के बाद पानीपत में हनुमान स्वरूप की परंपरा शुरू की। इसके बाद साल दर साल हनुमान स्वरूप की संख्या बढ़ती चली गई। अब करीब 1500 हनुमान सभा हैं। कई कॉलोनियों में दो से तीन हनुमान सभा बैठती हैं।
व्रत रख हनुमान स्वरूप करते धारण
सुभाष चंद्र ने बगताया कि हनुमान भक्त 40, 21 और 11 दिन का व्रत रखते हैं। वे इसके बाद ही हनुमान का स्वरूप धारण करते हैं। इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। जमीन या लकड़ी के तख्त पर सोते हैं। पूरा दिन एक बार अन्न ग्रहण करते हैं। नंगे पैर रहते हैं। हनुमान स्वरूप ने दुर्गा अष्टमी पर शहर में भ्रमण शुरू किया था। दशहरा पर रावण के पुतलों के दहन पर पहुंचे थे। इसके बाद घरों में आशीर्वाद दिया। लोग आशीर्वाद लेने के लिए आमंत्रित करते हैं।
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पानीपत। हनुमान स्वरूप ने श्रीराम राज्याभिषेक के बाद शनिवार को व्रत का पारण कर लिया। करीब सौ सभाओं के सदस्य गंगा स्नान के लिए हरिद्वार व ऋषिकेश पहुंचे। वहीं कुछ सभा के सदस्यों ने यहीं पर व्रत का पारण किया। हनुमान स्वरूप 41, 21, 11 और पांच दिन के व्रत पर बैठे थे।
हनुमान स्वरूप ने इससे पहले शुक्रवार को श्रीराम के राज्यभिषेक में शामिल हुए और फिर रातभर फेरी लगाई। कई हनुमान सभा ने शनिवार तड़के तक फेरी लगाई। हनुमान स्वरूप ने दूर-दूर जाकर लोगों को अपना आशीर्वाद दिया। शोभायात्रा विशेष आकर्षण का केंद्र रही। हनुमान सभा से जुटे विक्की बतरा और रमेश कुमार ने बताया कि हनुमान स्वरूप निकालने की परंपरा 85 वर्ष पहले 1940 में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लैय्या शहर में शुरू की थी। राम भक्त ढालूराम और दुलीचंद लैय्या से बंटवारे के बाद पानीपत में हनुमान स्वरूप की परंपरा शुरू की। इसके बाद साल दर साल हनुमान स्वरूप की संख्या बढ़ती चली गई। अब करीब 1500 हनुमान सभा हैं। कई कॉलोनियों में दो से तीन हनुमान सभा बैठती हैं।
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व्रत रख हनुमान स्वरूप करते धारण
सुभाष चंद्र ने बगताया कि हनुमान भक्त 40, 21 और 11 दिन का व्रत रखते हैं। वे इसके बाद ही हनुमान का स्वरूप धारण करते हैं। इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। जमीन या लकड़ी के तख्त पर सोते हैं। पूरा दिन एक बार अन्न ग्रहण करते हैं। नंगे पैर रहते हैं। हनुमान स्वरूप ने दुर्गा अष्टमी पर शहर में भ्रमण शुरू किया था। दशहरा पर रावण के पुतलों के दहन पर पहुंचे थे। इसके बाद घरों में आशीर्वाद दिया। लोग आशीर्वाद लेने के लिए आमंत्रित करते हैं।
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