{"_id":"6834c92f07bd44e53e0013a0","slug":"gurus-grace-is-the-basis-of-divine-experiences-vishwananda-panipat-news-c-45-1-sknl1005-136240-2025-05-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुरु की कृपा दिव्य अनुभूतियों का आधार : विश्वानंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुरु की कृपा दिव्य अनुभूतियों का आधार : विश्वानंद
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा नई अनाज मंडी में संकल्प नाम से आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान गुरू की कृपा को दिव्य अनुभूतियों का आधार बताया गया।
संस्थान के संस्थापक एवं संचालक दिव्य गुरु आशुतोष के शिष्य स्वामी विश्वानंद ने जीवन में गुरु कृपा का महत्व समझाते हुए कहा कि जब परम पिता परमात्मा साकार स्वरूप में धरती पर आता है तो वह अपनी कृपा से संपूर्ण मानव जाति को सींचता है लेकिन यदि मानव ही अपने संकीर्ण दृष्टिकोण के दायरे से बाहर निकलकर उसकी कृपा का अनुभव ही ना करना चाहे तो स्वयं परमात्मा भी उसका उद्धार नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा कि सत्संग का संदेश मिलना, पूर्ण संत की शरण में जाना, ब्रह्म ज्ञान से जुड़ना और ध्यान साधना में उतरकर परमात्मा के परम प्रकाश स्वरूप का दर्शन करना, इन दिव्य अनुभूतियों का आधार केवल गुरू की कृपा ही हो सकती है, क्योंकि गुरूकृपा का आधार लिए बिना पुरुषार्थ का परिणाम क्षणिक सुख दायक तो हो सकता है लेकिन स्थाई नहीं हो सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन
संस्थान के संस्थापक एवं संचालक दिव्य गुरु आशुतोष के शिष्य स्वामी विश्वानंद ने जीवन में गुरु कृपा का महत्व समझाते हुए कहा कि जब परम पिता परमात्मा साकार स्वरूप में धरती पर आता है तो वह अपनी कृपा से संपूर्ण मानव जाति को सींचता है लेकिन यदि मानव ही अपने संकीर्ण दृष्टिकोण के दायरे से बाहर निकलकर उसकी कृपा का अनुभव ही ना करना चाहे तो स्वयं परमात्मा भी उसका उद्धार नहीं कर सकता।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि सत्संग का संदेश मिलना, पूर्ण संत की शरण में जाना, ब्रह्म ज्ञान से जुड़ना और ध्यान साधना में उतरकर परमात्मा के परम प्रकाश स्वरूप का दर्शन करना, इन दिव्य अनुभूतियों का आधार केवल गुरू की कृपा ही हो सकती है, क्योंकि गुरूकृपा का आधार लिए बिना पुरुषार्थ का परिणाम क्षणिक सुख दायक तो हो सकता है लेकिन स्थाई नहीं हो सकता।
विज्ञापन