{"_id":"68c9b3b376eb46271307ac6a","slug":"god-is-present-in-every-particle-acharya-lalmani-panipat-news-c-244-1-pnp1007-143884-2025-09-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"भगवान कण-कण में व्याप्त : आचार्य लालमणि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भगवान कण-कण में व्याप्त : आचार्य लालमणि
Wed, 17 Sep 2025 12:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Wed, 17 Sep 2025 12:30 AM IST
विज्ञापन
कथा सुनाते आचार्य लालमणि महाराज। स्रोत : सोशल मीडिया
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। सेक्टर 13-17 में श्रीमद्भागवत कथा का मंगलवार को तीसरा दिन रहा। कथा दोपहर तीन से शाम सात बजे तक चली। तीसरे दिन कथाव्यास आचार्य लालमणि पांडेय ने जड़भरत महाराज की कथा सुनाई। आचार्य लालमणि पांडेय ने बताया कि जड़भरत महाराज को एक मृग में आसक्ति होने के कारण दो जन्म लेने पड़े। इसलिए किसी भी व्यक्ति को किसी भी व्यक्ति या वस्तु में आसक्ति नहीं करनी चाहिए।
भगवान का नाम लेने से व्यक्ति को नरक में नहीं आना पड़ता। अजामीर ने भगवान नारायण के नाम का जप किया था तो उसे बैकुंड की प्राप्ति हुई थी। व्यक्ति को जीवन में नारायण का नाम जपना चाहिए। हिरण्कश्यप नाम के दैत्य को नरसिंह भगवान ने मारकर प्रहलाद की रक्षा की थी। भगवान अपने भक्तों की रक्षा अवश्य करते हैं। व्यक्ति को भगवान की भक्ति करनी चाहिए क्योंकि भगवान कण-कण में व्याप्त हैं। कथा के बाद महिला मंडली ने भगवान कृष्ण के भजनों पर सामूहिक नृत्य किया और भगवान के भजनों का गुणगान किया। तायल परिवार के सदस्य ने बताया कि 17 सितंबर बुधवार को कृष्ण जन्मोत्सव, 19 को रुक्मिणी विवाह और 21 को हवन व प्रसाद कार्यक्रम किया जाएगा।
विज्ञापन
पानीपत। सेक्टर 13-17 में श्रीमद्भागवत कथा का मंगलवार को तीसरा दिन रहा। कथा दोपहर तीन से शाम सात बजे तक चली। तीसरे दिन कथाव्यास आचार्य लालमणि पांडेय ने जड़भरत महाराज की कथा सुनाई। आचार्य लालमणि पांडेय ने बताया कि जड़भरत महाराज को एक मृग में आसक्ति होने के कारण दो जन्म लेने पड़े। इसलिए किसी भी व्यक्ति को किसी भी व्यक्ति या वस्तु में आसक्ति नहीं करनी चाहिए।
भगवान का नाम लेने से व्यक्ति को नरक में नहीं आना पड़ता। अजामीर ने भगवान नारायण के नाम का जप किया था तो उसे बैकुंड की प्राप्ति हुई थी। व्यक्ति को जीवन में नारायण का नाम जपना चाहिए। हिरण्कश्यप नाम के दैत्य को नरसिंह भगवान ने मारकर प्रहलाद की रक्षा की थी। भगवान अपने भक्तों की रक्षा अवश्य करते हैं। व्यक्ति को भगवान की भक्ति करनी चाहिए क्योंकि भगवान कण-कण में व्याप्त हैं। कथा के बाद महिला मंडली ने भगवान कृष्ण के भजनों पर सामूहिक नृत्य किया और भगवान के भजनों का गुणगान किया। तायल परिवार के सदस्य ने बताया कि 17 सितंबर बुधवार को कृष्ण जन्मोत्सव, 19 को रुक्मिणी विवाह और 21 को हवन व प्रसाद कार्यक्रम किया जाएगा।
विज्ञापन