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Panipat News: मुश्किलों का सामना कर पूरे किए सपने, चिकित्सक बन कर रहीं लोगों की सेवा
Tue, 03 Feb 2026 03:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Tue, 03 Feb 2026 03:36 AM IST
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डॉ. नेहा बंसल। संवाद
स्वीटी सांगवान
पानीपत। राष्ट्रीय महिला चिकित्सक दिवस मंगलवार को हैं। यह दिन चिकित्सा क्षेत्र में महिला चिकित्सकों के योगदान को पहचानने और मनाने का दिन है। आज महिलाएं चिकित्सा के क्षेत्र में तेजी से आगे आ रही हैं। इनमें कई मुश्किलों से बीच गुजर कर इस मुकाम पर पहुंची हैं। इनमें जिला नागरिक अस्पताल की चिकित्सक डॉ. सुखदीप कौर और डॉ. नेहा बंसल भी शामिल हैं। उन्होंने बचपन में चिकित्सक बनने का सपना देखा था और जीवन में कठोर मेहनत के बाद आज चिकित्सक बनकर लोगों की सेवा कर रहीं हैं। किसी ने परिवार की बंदिशों को तोड़ा तो किसी ने चिकित्सकों को देखकर मन में उठे चिकित्सक बनने के जुनून को पूरा किया। अब चिकित्सा करके समाजसेवा करने के सपनों को पूरा कर रही हैं।
फोटो कोट्स-
परिवार की पहली लड़की बनी जिसने दूसरे जिले में जाकर की पढ़ाई
मेरा बचपन से चिकित्सक बनने का सपना रहा है। शादी से पहले मेरी मां ने मेरा सहयोग किया लेकिन संयुक्त परिवार होने से परिवार के दूसरे सदस्य नहीं चाहते थे कि मैं घर से बाहर जाकर पढ़ाई करूं या नौकरी करूं। मैं परिवार की पहली ऐसी लड़की बनी जिसने दूसरे जिले में जाकर पढ़ाई की और फिर नौकरी की। मां के सहयोग से मैंने रोहतक, दिल्ली, फरीदाबाद से अपनी पढ़ाई पूरी की उसके बाद निजी अस्पताल में नौकरी की । फिर शादी हो गई। ससुराल वाले नौकरी नहीं करवाना चाहते थे। इसलिए लगातार सात साल पढ़ाई करने के बाद भी मुझे घर-परिवार तक सीमित रहना पड़ा। शादी के लगभग 10 साल बाद मैंने पति के सहयोग से फिर से नौकरी करना शुरू किया। अब मैं जिला नागरिक अस्पताल में फिजियोथेरेपिस्ट के पद पर अपनी सेवा दे रही हूं और मरीजों की दवा में आर्थिक सहायता करके समाजसेवा का अपना सपना पूरा कर रही हूं।
डॉ. नेहा बंसल फिजियोथेरेपिस्ट, जिला नागरिक अस्पताल।
फोटो कोट्स-
दादा की बीमारी देखकर मन में चिकित्सक बन समाजसेवा का जुनून पैदा हुआ
-मेरे दादा को किडनी की बीमारी थी। मैं उस समय पांचवीं कक्षा में पढ़ती थी। एक दिन अचानक दादा की तबीयत खराब हो गई तो परिवार के लोग उन्हें अस्पताल ले गए, मैं भी साथ गई थी। दादा का इलाज करते चिकित्सकों को देखकर मेरे मन में भी चिकित्सक बनने का जुनून पैदा हुआ। मैंने उसी समय मन में ठान लिया था कि मैं बड़ी होकर चिकित्सक बनकर लोगों की सेवा करूंगी। अब मैं पिछले 10 साल से चिकित्सक हूं। पिछले तीन साल से जिला नागरिक अस्पताल में अपनी सेवा दे रही हूं। मैं पानीपत में पहली आपातकालीन फिजिशियन हूं जो गंभीर बीमारियों का इलाज करती हैं। मुझे बीमार या घायल लोगों का इलाज कर उनसे दुआ मिलने पर हिम्मत और सुकून मिलता है।
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डॉ. सुखदीप कौर, आपातकालीन फिजिशियन जिला नागरिक अस्पताल।
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पानीपत। राष्ट्रीय महिला चिकित्सक दिवस मंगलवार को हैं। यह दिन चिकित्सा क्षेत्र में महिला चिकित्सकों के योगदान को पहचानने और मनाने का दिन है। आज महिलाएं चिकित्सा के क्षेत्र में तेजी से आगे आ रही हैं। इनमें कई मुश्किलों से बीच गुजर कर इस मुकाम पर पहुंची हैं। इनमें जिला नागरिक अस्पताल की चिकित्सक डॉ. सुखदीप कौर और डॉ. नेहा बंसल भी शामिल हैं। उन्होंने बचपन में चिकित्सक बनने का सपना देखा था और जीवन में कठोर मेहनत के बाद आज चिकित्सक बनकर लोगों की सेवा कर रहीं हैं। किसी ने परिवार की बंदिशों को तोड़ा तो किसी ने चिकित्सकों को देखकर मन में उठे चिकित्सक बनने के जुनून को पूरा किया। अब चिकित्सा करके समाजसेवा करने के सपनों को पूरा कर रही हैं।
फोटो कोट्स-
परिवार की पहली लड़की बनी जिसने दूसरे जिले में जाकर की पढ़ाई
मेरा बचपन से चिकित्सक बनने का सपना रहा है। शादी से पहले मेरी मां ने मेरा सहयोग किया लेकिन संयुक्त परिवार होने से परिवार के दूसरे सदस्य नहीं चाहते थे कि मैं घर से बाहर जाकर पढ़ाई करूं या नौकरी करूं। मैं परिवार की पहली ऐसी लड़की बनी जिसने दूसरे जिले में जाकर पढ़ाई की और फिर नौकरी की। मां के सहयोग से मैंने रोहतक, दिल्ली, फरीदाबाद से अपनी पढ़ाई पूरी की उसके बाद निजी अस्पताल में नौकरी की । फिर शादी हो गई। ससुराल वाले नौकरी नहीं करवाना चाहते थे। इसलिए लगातार सात साल पढ़ाई करने के बाद भी मुझे घर-परिवार तक सीमित रहना पड़ा। शादी के लगभग 10 साल बाद मैंने पति के सहयोग से फिर से नौकरी करना शुरू किया। अब मैं जिला नागरिक अस्पताल में फिजियोथेरेपिस्ट के पद पर अपनी सेवा दे रही हूं और मरीजों की दवा में आर्थिक सहायता करके समाजसेवा का अपना सपना पूरा कर रही हूं।
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डॉ. नेहा बंसल फिजियोथेरेपिस्ट, जिला नागरिक अस्पताल।
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दादा की बीमारी देखकर मन में चिकित्सक बन समाजसेवा का जुनून पैदा हुआ
-मेरे दादा को किडनी की बीमारी थी। मैं उस समय पांचवीं कक्षा में पढ़ती थी। एक दिन अचानक दादा की तबीयत खराब हो गई तो परिवार के लोग उन्हें अस्पताल ले गए, मैं भी साथ गई थी। दादा का इलाज करते चिकित्सकों को देखकर मेरे मन में भी चिकित्सक बनने का जुनून पैदा हुआ। मैंने उसी समय मन में ठान लिया था कि मैं बड़ी होकर चिकित्सक बनकर लोगों की सेवा करूंगी। अब मैं पिछले 10 साल से चिकित्सक हूं। पिछले तीन साल से जिला नागरिक अस्पताल में अपनी सेवा दे रही हूं। मैं पानीपत में पहली आपातकालीन फिजिशियन हूं जो गंभीर बीमारियों का इलाज करती हैं। मुझे बीमार या घायल लोगों का इलाज कर उनसे दुआ मिलने पर हिम्मत और सुकून मिलता है।
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डॉ. सुखदीप कौर, आपातकालीन फिजिशियन जिला नागरिक अस्पताल।

डॉ. नेहा बंसल। संवाद