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Panipat News: मतलौडा, रेर कलां और खंडरा समेत 9 क्षेत्रों में फ्री जोन खत्म
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जगमहेंद्र सरोहापानीपत। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक विस्तार से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने मतलौडा, रेर कलां और खंडरा समेत 9 क्षेत्रों में पहले से चले आ रहे फ्री जोन को खत्म कर इन्हें नियंत्रित क्षेत्र घोषित किया है।
विभाग ने 16 सितंबर को इसका नोटिफिकेशन जारी किया। अब इन क्षेत्रों में नए उद्योग स्थापित करने के लिए चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) की मंजूरी लेना जरूरी होगा।
नियंत्रित क्षेत्र घोषित करने का उद्देश्य अनियोजित निर्माण और भूमि के अनियंत्रित उपयोग को नियंत्रित करना है। पानीपत में करीब 37 हजार औद्योगिक इकाइयां हैं। शहरी क्षेत्र में औद्योगिक विस्तार के लिए जमीन सीमित होने के कारण पिछले कुछ वर्षों में उद्यमियों ने आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों का रुख किया।
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पहले छाजपुर, निंबरी और यमुना से लगते क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयां स्थापित की गईं। इन क्षेत्रों में फ्री जोन खत्म होने के बाद उद्यमियों ने मतलौडा तहसील के आसन कलां, खंडरा, मतलौडा, रेर कलां और लोहारी समेत आसपास के क्षेत्रों में जमीन खरीदकर इकाइयां लगानी शुरू कीं।
उद्यमियों के अनुसार, इन क्षेत्रों में करीब 200 उद्योग स्थापित हो चुके हैं और कई अन्य इकाइयों की योजना बनाई जा रही थी।
पड़ोसी राज्यों के विकल्प पर भी विचार
कुछ उद्यमी नई इकाइयों के लिए उत्तर प्रदेश का विकल्प तलाश रहे हैं। उद्यमियों के अनुसार, वहां जमीन और औद्योगिक मंजूरियों को लेकर उन्हें आकर्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में उत्तर प्रदेश के अधिकारियों और पानीपत के कुछ उद्योगपतियों के बीच फरीदाबाद, गुरुग्राम और नोएडा में बैठकें हो चुकी हैं। हालांकि, कितने उद्यमी वास्तव में अपनी इकाइयां दूसरे राज्य में ले जाएंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
n नए नियमों से प्रक्रिया मुश्किल, उद्यमियों ने जताई चिंता
उद्यमी रमेश गुप्ता और आशीष कुमार ने कहा कि अब सीएलयू की मंजूरी, फीस और विभिन्न विभागों की प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। उनका कहना है कि इससे नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने में समय और लागत बढ़ सकती है। हालांकि, इन दावों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि नए उद्योग पूरी तरह रुक जाएंगे। सीएलयू प्रक्रिया पूरी करने के बाद नियमों के तहत औद्योगिक गतिविधियां जारी रह सकती हैं।
सरकार से प्रक्रिया सरल करने की मांग
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स पानीपत चैप्टर के प्रधान विनोद धमीजा ने कहा कि उद्यमियों ने सीएलयू प्रक्रिया को सरल करने और इसे सिंगल विंडो के माध्यम से पूरा करने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रक्रिया आसान होने से नए निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है। वहीं, नियंत्रित क्षेत्र का नोटिफिकेशन भूमि के नियोजित उपयोग और अनियंत्रित औद्योगिक विस्तार को नियंत्रित करने के लिए लागू किया गया है। नए निवेश पर इसका वास्तविक असर सीएलयू प्रक्रिया और आगे मिलने वाली मंजूरियों के आधार पर स्पष्ट होगा।
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विभाग ने 16 सितंबर को इसका नोटिफिकेशन जारी किया। अब इन क्षेत्रों में नए उद्योग स्थापित करने के लिए चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) की मंजूरी लेना जरूरी होगा।
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नियंत्रित क्षेत्र घोषित करने का उद्देश्य अनियोजित निर्माण और भूमि के अनियंत्रित उपयोग को नियंत्रित करना है। पानीपत में करीब 37 हजार औद्योगिक इकाइयां हैं। शहरी क्षेत्र में औद्योगिक विस्तार के लिए जमीन सीमित होने के कारण पिछले कुछ वर्षों में उद्यमियों ने आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों का रुख किया।
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पहले छाजपुर, निंबरी और यमुना से लगते क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयां स्थापित की गईं। इन क्षेत्रों में फ्री जोन खत्म होने के बाद उद्यमियों ने मतलौडा तहसील के आसन कलां, खंडरा, मतलौडा, रेर कलां और लोहारी समेत आसपास के क्षेत्रों में जमीन खरीदकर इकाइयां लगानी शुरू कीं।
उद्यमियों के अनुसार, इन क्षेत्रों में करीब 200 उद्योग स्थापित हो चुके हैं और कई अन्य इकाइयों की योजना बनाई जा रही थी।
पड़ोसी राज्यों के विकल्प पर भी विचार
कुछ उद्यमी नई इकाइयों के लिए उत्तर प्रदेश का विकल्प तलाश रहे हैं। उद्यमियों के अनुसार, वहां जमीन और औद्योगिक मंजूरियों को लेकर उन्हें आकर्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में उत्तर प्रदेश के अधिकारियों और पानीपत के कुछ उद्योगपतियों के बीच फरीदाबाद, गुरुग्राम और नोएडा में बैठकें हो चुकी हैं। हालांकि, कितने उद्यमी वास्तव में अपनी इकाइयां दूसरे राज्य में ले जाएंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
n नए नियमों से प्रक्रिया मुश्किल, उद्यमियों ने जताई चिंता
उद्यमी रमेश गुप्ता और आशीष कुमार ने कहा कि अब सीएलयू की मंजूरी, फीस और विभिन्न विभागों की प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। उनका कहना है कि इससे नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने में समय और लागत बढ़ सकती है। हालांकि, इन दावों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि नए उद्योग पूरी तरह रुक जाएंगे। सीएलयू प्रक्रिया पूरी करने के बाद नियमों के तहत औद्योगिक गतिविधियां जारी रह सकती हैं।
सरकार से प्रक्रिया सरल करने की मांग
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स पानीपत चैप्टर के प्रधान विनोद धमीजा ने कहा कि उद्यमियों ने सीएलयू प्रक्रिया को सरल करने और इसे सिंगल विंडो के माध्यम से पूरा करने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रक्रिया आसान होने से नए निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है। वहीं, नियंत्रित क्षेत्र का नोटिफिकेशन भूमि के नियोजित उपयोग और अनियंत्रित औद्योगिक विस्तार को नियंत्रित करने के लिए लागू किया गया है। नए निवेश पर इसका वास्तविक असर सीएलयू प्रक्रिया और आगे मिलने वाली मंजूरियों के आधार पर स्पष्ट होगा।