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3000 बंदरों को पकड़ने की वन सरंक्षक पंचकूला ने दी मंजूरी
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पानीपत। नगर निगम को शहर से बंदर पकड़कर कलेसर के लाल डांग जंगल में छोड़ने की अनुमति मिल गई है। यह अनुमति मुख्य वन सरंक्षक पंचकूला ने मंडलीय वन जीव अधिकारी रोहतक को दी है। रोहतक जोन के अधीन पानीपत होने के कारण इसे पानीपत भेजा गया है। इस अनुमति के बाद निगम एक बार फिर बंदर पकड़ने का टेंडर लगा सकता है। वन सरंक्षक पंचकूला मुख्यालय से की ओर से केवल तीन हजार बंदरों को पकड़ कलेसर के जंगल में छोड़ने की अनुमति दी है। बशर्तें उनको रिपोर्ट देनी होगी कि बंदर कहां से पकड़कर कहां छोड़े गए हैं।
बता दें कि इससे पहले भी नगर निगम की ओर से दो बार बंदर पकड़ने का टेंडर लगाकर शहर को बंदरों से मुक्त कराने का अभियान चलाया जा चुका है लेकिन दोनों बार ठेेकेदार काम अधर में ही छोड़ चुके हैं। दोनों बार टेंडर लेने वाले ठेकेदारों ने निगम अधिकरियों पर पेमेंट न देने का आरोप लगाया था। जिसके बाद काम शुरू ही नहीं हो पाया। वहीं, अब तक निगम यमुनानगर के कलेसर के जंगल में करीब 500 बंदर छोड़ चुका है, जिसका टेंडर करीब 1300 रुपये प्रति बंदर निर्धारित किया गया था। इसमें बंदर के खाने पीने से लेकर उसके रहने तक की व्यवस्था ठेकेदार को करनी थी।
सीनियर डिप्टी मेयर दुष्यंत भट्ट ने बताया कि इस बारे में निगम अधिकारियों से विचार विमर्श किया जाएगा कि टेंडर किस प्रकार लगाना है और इसकी रूपरेखा क्या होगी।
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बता दें कि इससे पहले भी नगर निगम की ओर से दो बार बंदर पकड़ने का टेंडर लगाकर शहर को बंदरों से मुक्त कराने का अभियान चलाया जा चुका है लेकिन दोनों बार ठेेकेदार काम अधर में ही छोड़ चुके हैं। दोनों बार टेंडर लेने वाले ठेकेदारों ने निगम अधिकरियों पर पेमेंट न देने का आरोप लगाया था। जिसके बाद काम शुरू ही नहीं हो पाया। वहीं, अब तक निगम यमुनानगर के कलेसर के जंगल में करीब 500 बंदर छोड़ चुका है, जिसका टेंडर करीब 1300 रुपये प्रति बंदर निर्धारित किया गया था। इसमें बंदर के खाने पीने से लेकर उसके रहने तक की व्यवस्था ठेकेदार को करनी थी।
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सीनियर डिप्टी मेयर दुष्यंत भट्ट ने बताया कि इस बारे में निगम अधिकारियों से विचार विमर्श किया जाएगा कि टेंडर किस प्रकार लगाना है और इसकी रूपरेखा क्या होगी।
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