फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Panipat News ›   Folk songs and folk dances are not seen in the month of Saavan

Panipat News: सावन के महीने में लोकगीत और लोकनृत्य नजर नहीं आते

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 13 Jul 2025 02:41 AM IST
विज्ञापन
Folk songs and folk dances are not seen in the month of Saavan
पानीपत। सावन का महीना महिलाओं के साथ किसानों के लिए भी विशेष महत्व रखता है। पहले जहां महिलाएं सावन में उपवास रखने के साथ ही झूला झूलती थीं वैसे ही किसान सावन में प्रकृति के साथ जुड़ाव महसूस करते हैं। इस समय चारों तरफ हरियाली छाई रहती है। लेकिन समय के साथ धीरे-धीरे सब बदल रहा है। महिलाओं में सावन का महत्व कम होता जा रहा है। सावन के महीने में लोकगीत गाए जाते थे और लोकनृत्य किए जाते थे लेकिन अब लोकगीत और लोकनृत्य नजर नहीं आते।
विज्ञापन

सेक्टर 13-17 की 72 वर्षीय कंचन सागर ने बताया कि पहले लोग सावन में प्रकृति के साथ अधिक जुड़े रहते थे। खेती-किसानी और तीज-त्योहारों पर ज्यादा ध्यान देते थे। अब शहरीकरण और आधुनिक जीवनशैली के कारण सावन का उत्सव पहले जैसा नहीं रहा लेकिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना और व्रत-उपवास का महत्व अभी भी बना हुआ है। पहले सावन में बारिश का मौसम होता था और लोग प्रकृति के साथ अधिक समय बिताते थे। खेती-किसानी के काम में व्यस्त रहते थे और बारिश के पानी से होने वाले फायदों और नुकसानों से परिचित थे। तीज, कजरी तीज जैसे त्योहारों को उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता था। सावन के महीने में लोकगीत गाए जाते थे और लोकनृत्य किए जाते थे। सावन के सोमवार का व्रत रखना एक महत्वपूर्ण धार्मिक गतिविधि थी और लोग भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते थे।
विज्ञापन


अब सावन में कम ही लोग करते हैं सात्विक भोजन
उग्राखेड़ी गांव की 31 वर्षीय प्रीति मलिक ने बताया कि अब शहरीकरण और बदलती जीवनशैली में बहुत बदलाव आ गया है। शहरीकरण और आधुनिक जीवनशैली के कारण लोग प्रकृति से कम जुड़े हुए हैं और सावन के त्योहार को पहले की तरह नहीं मनाते। सोशल मीडिया के माध्यम से लोग सावन के त्योहार और भगवान शिव की पूजा-अर्चना के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। सावन के सोमवार का व्रत रखना अभी भी एक महत्वपूर्ण धार्मिक गतिविधि है लेकिन इसे मनाने का तरीका थोड़ा बदल गया है। पहले सावन में लोग मुख्य रूप से फल, दूध, दही और साबूदाना जैसे फलाहारी चीजें खाते थे लेकिन अब सावन में भी लोग विभिन्न प्रकार के व्यंजन साबूदाना खिचड़ी, आलू की टिक्की और लौकी या कद्दू की सब्जी आदि खाते हैं। पहले सावन के महीने में लोग धार्मिक और आध्यात्मिक कारणों से सात्विक भोजन करते थे लेकिन अब लोग अपनी पसंद और सुविधा के अनुसार भोजन करते हैं। समय के साथ लोग रहने-सहने के तौर-तरीकों के साथ रीति-रिवाज को भी बदल रहे हैं। आज अपने बड़े बुजुर्गों से पुराने समय की सुनते हैं तो काफी अच्छा लगता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्रस्तुति : प्रीति मलिक, उग्राखेड़ी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed