{"_id":"613a60038ebc3ebeb708bc0b","slug":"father-used-to-take-swimming-pool-on-the-pretext-of-bathing-son-won-gold-in-swimming-panipat-news-knl826934151","type":"story","status":"publish","title_hn":"पिता नहाने के बहाने ले जाते थे स्वीमिंग पूल, बेटे ने तैराकी में जीता स्वर्ण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पिता नहाने के बहाने ले जाते थे स्वीमिंग पूल, बेटे ने तैराकी में जीता स्वर्ण
विज्ञापन
पानीपत। वंश पन्नू।
- फोटो : Panipat
नीरज गिरी
पानीपत। महज 11 वर्ष की उम्र में बेटे को पिता नहाने के बहाने स्वीमिंग पूल लेकर जाया करते और आज बेटे ने तैराकी में स्वर्ण जीतकर नाम रोशन कर दिया। तैराक वंश पन्नू के पिता करण पन्नू को तैराकी भले नहीं आती है, लेकिन उनका बेटे को तैराक बनाने में बड़ा योगदान है। वंश ने पिछले माह आयोजित खेलो हरियाणा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। अब वे खेलो इंडिया के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
तैराक वंश पन्नू ने बताया कि पिता घर के पास बाल विकास प्रोग्रेसिव स्कूल के स्वीमिंग पूल में नहाने के नाम पर लेकर जाते थे। धीरे-धीरे उन्होंने तैरने के लिए प्रोत्साहित किया। पहले तो पिता की डांट के डर से कम गहरे पानी में तैरना शुरू किया। इसके बाद स्वीमिंग में मजा आने लगा। पहले गहरे पानी के आसपास भी खड़े होने में डर लगता था, लेकिन पिता ने आत्मविश्वास दिया। इस वक्त वह पांच से छह घंटे खेलो इंडिया के लिए अभ्यास कर रहे हैं। संवाद
यू-ट्यूब पर दिखाते थे तैराकी के वीडियो
पेशे से वकील करण पन्नू बेटे को यू-ट्यूब पर तैराकी के वीडियो दिखाते थे। वीडियो को देखकर तकनीक सीखने के लिए प्रेरित किया। पिता की वजह से बेहतर तकनीक का पता चला। इस दौरान तैराकी की चारों तकनीक सीखीं। वंश का कहना है कि पिता की डांट और प्यार ने जिंदगी को उद्देश्य दिया।
विज्ञापन
तैराकी के साथ ही जिम में बहा रहे पसीना
तैराकी करने के साथ ही वंश जिम में अपनी शारीरिक क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। वंश पन्नू खेलो इंडिया के लिए रोज अभ्यास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले छह महीने से वह जिम में जा रहे थे, जिससे उनकी क्षमता भी बढ़ी और इसका फायदा तैराकी में मिला। इस समय वंश को कोच राजेश तैराकी की बारीकियां सीखा रहे हैं।
विज्ञापन
पानीपत। महज 11 वर्ष की उम्र में बेटे को पिता नहाने के बहाने स्वीमिंग पूल लेकर जाया करते और आज बेटे ने तैराकी में स्वर्ण जीतकर नाम रोशन कर दिया। तैराक वंश पन्नू के पिता करण पन्नू को तैराकी भले नहीं आती है, लेकिन उनका बेटे को तैराक बनाने में बड़ा योगदान है। वंश ने पिछले माह आयोजित खेलो हरियाणा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। अब वे खेलो इंडिया के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
तैराक वंश पन्नू ने बताया कि पिता घर के पास बाल विकास प्रोग्रेसिव स्कूल के स्वीमिंग पूल में नहाने के नाम पर लेकर जाते थे। धीरे-धीरे उन्होंने तैरने के लिए प्रोत्साहित किया। पहले तो पिता की डांट के डर से कम गहरे पानी में तैरना शुरू किया। इसके बाद स्वीमिंग में मजा आने लगा। पहले गहरे पानी के आसपास भी खड़े होने में डर लगता था, लेकिन पिता ने आत्मविश्वास दिया। इस वक्त वह पांच से छह घंटे खेलो इंडिया के लिए अभ्यास कर रहे हैं। संवाद
विज्ञापन
यू-ट्यूब पर दिखाते थे तैराकी के वीडियो
पेशे से वकील करण पन्नू बेटे को यू-ट्यूब पर तैराकी के वीडियो दिखाते थे। वीडियो को देखकर तकनीक सीखने के लिए प्रेरित किया। पिता की वजह से बेहतर तकनीक का पता चला। इस दौरान तैराकी की चारों तकनीक सीखीं। वंश का कहना है कि पिता की डांट और प्यार ने जिंदगी को उद्देश्य दिया।
विज्ञापन
तैराकी के साथ ही जिम में बहा रहे पसीना
तैराकी करने के साथ ही वंश जिम में अपनी शारीरिक क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। वंश पन्नू खेलो इंडिया के लिए रोज अभ्यास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले छह महीने से वह जिम में जा रहे थे, जिससे उनकी क्षमता भी बढ़ी और इसका फायदा तैराकी में मिला। इस समय वंश को कोच राजेश तैराकी की बारीकियां सीखा रहे हैं।