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सरसों का भाव गिरने से किसान चिंतित

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Feb 2022 01:21 AM IST
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Farmers worried due to fall in mustard price
पानीपत। फरवरी के अंत में या मार्च में सरसों की फसल के पककर तैयार होने की उम्मीद है। किसानों को बंपर पैदावार की उम्मीद है लेकिन सरसों के गिरते भावों की चिंता सता रही है। किसानों का मानना है कि बंपर पैदावार के बावजूद भाव कम रहे तो नुकसान निश्चित है।
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सरसों के लिए मौसम खुलना बहुत जरूरी है। खेतों में पकी खड़ी सरसों की फसल कटाई लायक हो जाती है। कई दिनों से शीतलहर और बादलों के छाए रहने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। सरसों के व्यापारियों का मानना है कि मौसम खुलने पर सरसों की आवक बढ़ेगी और भाव पहले से कम हैं।
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1500 रुपये प्रति क्विंटल घट गए हैं सरसों के दाम
व्यापारियों की मानें तो सरसों के भाव आवक और मांग पर काफी निर्भर करते हैं। पिछले दिनों जहां सरसों के भाव आठ हजार रुपये प्रति क्विंटल से अधिक बने हुए थे, वहीं अब सरसों के भाव घटकर 6500 से सात हजार रुपये के आसपास बने हुए हैं। उतार-चढाव का दौर इस बार अप्रैल तक चलने की संभावना है। मई में सरसों के भाव स्थिर होने का अनुमान है।
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गत वर्ष किसानों को हुआ था भरपूर मुनाफा
वर्ष 2021 में सरसों के भावों में रिकॉर्ड तेजी से किसानों का भरपूर मुनाफा हुआ था। जहां सरकार का एमएसपी रेट करीब 4800 रुपये प्रति क्विंटल था लेकिन सरसों की मांग बढ़ने से इसके भावों में रिकार्ड तेजी आई थी। न्यूनतम समर्थन मूल्य से ज्यादा भाव पर बाजार में बिकी थी। जिन किसानों ने सरसों का स्टॉक किया था, उन्होंने 9-10 हजार रुपये प्रति क्विंटल बेची थी।

इस बार सरसों की फसल में कीट व अन्य प्रकार नुकसान बहुत कम है। इससे सरसों की बंपर पैदावार होने की संभावना है। दो कारणों से सरसों की फसल रकबे में वृद्धि रही है। पहला फैक्टर है दाम और दूसरा है मौसम। पानीपत में भी सरसों का रकबा 1700 हेक्टेयर से बढ़कर 4 हजार हेक्टेयर पहुंच चुका है। किसानों को चाहिए कि जैसे ही सरसों की फसल तैयार हो तो उसे ज्यादा दिनों तक नमी वाले स्थान में नहीं रखे। - डॉ. वीरेंद्र आर्य, उपनिदेशक, कृषि विभाग, पानीपत।
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