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महिला खिलाड़ियों का आज भी हो रहा है शोषण
अमर उजाला, पानीपत
Updated Fri, 14 Mar 2014 11:32 PM IST
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पानीपत। वह स्वाभिमान से जीना चाहती, खेलना चाहती है और देश के लिए मेडल भी लाना चाहती है, लेकिन इस पुरुष समाज में उसका स्वाभिमान, खेलने की इच्छा और सपने सब दबकर रहे हैं। वह शोषण का लगातार शिकार हो रही है और खेल के मैदान पर चाहकर भी अपनी प्रतिभा को नहीं दिखा पा रही।
ये कहना है कि कबड्डी खिलाड़ी पद्मश्री डॉ. सुनील डबास का। वे शुक्रवार को एसडी पीजी कॉलेज में आयोजित वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता में बतौर मुख्य अतिथि पहुंची थी। डॉ. डबास ने बताया कि एक समय कहावत थी कि पढ़ोगे, लिखोगे तो बनोगे नवाब और खेलोगे, कूदोगे तो बनोगे खराब। पर आज यह कहावत उलट हो गई है। आज खेलकूद में आगे आने वाले युवा भी नवाब बन रहे हैं।
प्रदेश सरकार की खेलों की पॉलिसी भी सराहनीय है, लेकिन खेलों में महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर प्रदेश की नहीं देश भी फिसड्डी रहा है। यहां पर महिला कोच की नियुक्ति नहीं का रही। इसका महिला खिलाड़ियों की सोच पर विपरीत असर पड़ता है। वे अपनी समस्याओं को पुरुष कोच के सामने नहीं रख पाती। कुछ महिला खिलाड़ी खुला माहौल न मिल पाने से पीछे हट जाती हैं। प्रदेश व देश में एक ही हॉस्टल में लड़कियों, लड़के और कोच रह रहे हैं। ऐसे में वे शोषण की शिकार हो रही हैं।
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बढ़ रही यौन उत्पीड़न की घटनाएं
डॉ. सुनील डबास ने बताया कि यौन उत्पीड़न की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। लड़कियों को मजबूरीवश कैंप और खेल को छोड़ना पड़ता है। कुछ को कैरियर की चाह में इस सबको अनदेखा करना पड़ता है। खेलों में शोषण बढ़ रहा है और उनकी कोई सुनवाई नहीं हो पाती।
यह सब इंटरनेशनल और नेशनल ही नहीं, बल्कि स्टेट और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में भी होता है। इससे अभिभावक भी परेशान रहते हैं और कुछ लोग तो अपने बच्चों को आगे नहीं आने देते।
बुरके वाले देश में सफल आयोजन
उन्होंने बताया कि ईरान में ज्यादातर महिलाएं बुरका पहनती है, लेकिन इस देश की महिलाओं ने एशिया टूर्नामेंट का पुरुषों का सहयोग लिए बिना सफल आयोजन किया था। यहां आयोजन समिति में महिलाएं ही थी। देश में इसके उलट हो रहा है। यहां पर महिलाओं के आयोजन को पुरुष ही संभालते हैं।
इसको लेकर होना चाहिए मूवमेंट
डॉ. सुनील डबास ने बताया कि महिलाओं और खिलाड़ियों के शोषण को लेकर न्याय होना चाहिए और इसको लेकर मूवमेंट लाने की जरूरत है। वे हर बार महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर अपनी राय देती हैं और कई बार अपनी मांगों को उठा चुकी है। यहां पर फाइल पहियों से चलती हैं और एक नियम बनने में बहुत ज्यादा समय लगता है।
एमपी माजरा को कबड्डी नर्सरी मिली
डॉ. सुनील डबास ने बताया कि प्रदेश में पहली महिला कबड्डी नर्सरी झज्जर के गांव एमपी माजरा में बनी है। रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने 25 फरवरी को एकेडमी दी है। इससे ग्रामीण आंचल की खिलाड़ी अपनी प्रतिभा को चमका सकेंगी।
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ये कहना है कि कबड्डी खिलाड़ी पद्मश्री डॉ. सुनील डबास का। वे शुक्रवार को एसडी पीजी कॉलेज में आयोजित वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता में बतौर मुख्य अतिथि पहुंची थी। डॉ. डबास ने बताया कि एक समय कहावत थी कि पढ़ोगे, लिखोगे तो बनोगे नवाब और खेलोगे, कूदोगे तो बनोगे खराब। पर आज यह कहावत उलट हो गई है। आज खेलकूद में आगे आने वाले युवा भी नवाब बन रहे हैं।
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प्रदेश सरकार की खेलों की पॉलिसी भी सराहनीय है, लेकिन खेलों में महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर प्रदेश की नहीं देश भी फिसड्डी रहा है। यहां पर महिला कोच की नियुक्ति नहीं का रही। इसका महिला खिलाड़ियों की सोच पर विपरीत असर पड़ता है। वे अपनी समस्याओं को पुरुष कोच के सामने नहीं रख पाती। कुछ महिला खिलाड़ी खुला माहौल न मिल पाने से पीछे हट जाती हैं। प्रदेश व देश में एक ही हॉस्टल में लड़कियों, लड़के और कोच रह रहे हैं। ऐसे में वे शोषण की शिकार हो रही हैं।
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बढ़ रही यौन उत्पीड़न की घटनाएं
डॉ. सुनील डबास ने बताया कि यौन उत्पीड़न की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। लड़कियों को मजबूरीवश कैंप और खेल को छोड़ना पड़ता है। कुछ को कैरियर की चाह में इस सबको अनदेखा करना पड़ता है। खेलों में शोषण बढ़ रहा है और उनकी कोई सुनवाई नहीं हो पाती।
यह सब इंटरनेशनल और नेशनल ही नहीं, बल्कि स्टेट और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में भी होता है। इससे अभिभावक भी परेशान रहते हैं और कुछ लोग तो अपने बच्चों को आगे नहीं आने देते।
बुरके वाले देश में सफल आयोजन
उन्होंने बताया कि ईरान में ज्यादातर महिलाएं बुरका पहनती है, लेकिन इस देश की महिलाओं ने एशिया टूर्नामेंट का पुरुषों का सहयोग लिए बिना सफल आयोजन किया था। यहां आयोजन समिति में महिलाएं ही थी। देश में इसके उलट हो रहा है। यहां पर महिलाओं के आयोजन को पुरुष ही संभालते हैं।
इसको लेकर होना चाहिए मूवमेंट
डॉ. सुनील डबास ने बताया कि महिलाओं और खिलाड़ियों के शोषण को लेकर न्याय होना चाहिए और इसको लेकर मूवमेंट लाने की जरूरत है। वे हर बार महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर अपनी राय देती हैं और कई बार अपनी मांगों को उठा चुकी है। यहां पर फाइल पहियों से चलती हैं और एक नियम बनने में बहुत ज्यादा समय लगता है।
एमपी माजरा को कबड्डी नर्सरी मिली
डॉ. सुनील डबास ने बताया कि प्रदेश में पहली महिला कबड्डी नर्सरी झज्जर के गांव एमपी माजरा में बनी है। रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने 25 फरवरी को एकेडमी दी है। इससे ग्रामीण आंचल की खिलाड़ी अपनी प्रतिभा को चमका सकेंगी।