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Panipat News: आपातकाल के दौरान जेल में कैदियों की तरह करते थे व्यवहार
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पानीपत। आपातकाल का वह काला दिन आज भी याद है। कैसे लोगों को पकड़-पकड़कर जेलों में डाला जा रहा था। किसी में कुछ बोलने की हिम्मत तक नहीं थी। जो भी कुछ बोलने को आगे आता था उसे ही पकड़कर जेल में ठूस दिया जाता था। यहां भी उनसे एक हत्या के मामलों के बंदी और कैदियों की तरह व्यवहार किया जाता था। इन सबके बावजूद हिम्मत नहीं हारी और न ही किसी की मनमर्जी के आगे घुटने टेके।
ये कहना है कि पूर्व विधायक धर्म सिंह राठी के सुपुत्र एडवोकेट जोगिंद्र पाल राठी का। मूल रूप से समालखा के मनाना गांव निवासी एडवोकेट जोगिंद्र पाल राठी अब मॉडल टाउन में रहते हैं। उन्होंने बताया कि मेरे पिता धर्म सिंह राठी 1957-62 में विधायक रहे हैं। आपातकाल लगते ही 24 जून की रात को सबसे पहले मेरे पिताजी को गिरफ्तार किया गया। यह प्रदेश में संभावित सबसे पहले उनकी गिरफ्तारी थी। वे 19 महीने तक जेल में रहे। उस समय मेरी उम्र 30 वर्ष थी और वकालत करते थे। मैंने अपने पिता की पैरवी करने का प्रयास किया तो अगले दिन यानी 25 जून को मुझे भी गिरफ्तार कर लिया। मुझे पानीपत से गिरफ्तार कर करनाल जेल में ले जाया गया। यहां मेरे व बाकी लोगों के साथ कैदियों की तरह व्यवहार किया जाता था। खाना भी उनकी तरह ही देते थे। कई बार तो उनसे भी बदतर व्यवहार किया जाता था। मैं पांच महीने और मेरे पिता धर्म सिंह राठी 19 महीने तक जेल में बंद रहे। घर में मेरी मां गुलाब कौर अकेली रहीं। उनको भी उनसे मिलने तक नहीं दिया जाता था। मेरी मां उन दिनों के बारे में बताती हैं कि घर से बाहर निकलने में भी डर लगने लगा था। इक्का दुक्का व्यक्ति की हालचाल जानने छुपकर आता था। उनको भी साथ देने पर गिरफ्तार होने का डर लगता था।
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ये कहना है कि पूर्व विधायक धर्म सिंह राठी के सुपुत्र एडवोकेट जोगिंद्र पाल राठी का। मूल रूप से समालखा के मनाना गांव निवासी एडवोकेट जोगिंद्र पाल राठी अब मॉडल टाउन में रहते हैं। उन्होंने बताया कि मेरे पिता धर्म सिंह राठी 1957-62 में विधायक रहे हैं। आपातकाल लगते ही 24 जून की रात को सबसे पहले मेरे पिताजी को गिरफ्तार किया गया। यह प्रदेश में संभावित सबसे पहले उनकी गिरफ्तारी थी। वे 19 महीने तक जेल में रहे। उस समय मेरी उम्र 30 वर्ष थी और वकालत करते थे। मैंने अपने पिता की पैरवी करने का प्रयास किया तो अगले दिन यानी 25 जून को मुझे भी गिरफ्तार कर लिया। मुझे पानीपत से गिरफ्तार कर करनाल जेल में ले जाया गया। यहां मेरे व बाकी लोगों के साथ कैदियों की तरह व्यवहार किया जाता था। खाना भी उनकी तरह ही देते थे। कई बार तो उनसे भी बदतर व्यवहार किया जाता था। मैं पांच महीने और मेरे पिता धर्म सिंह राठी 19 महीने तक जेल में बंद रहे। घर में मेरी मां गुलाब कौर अकेली रहीं। उनको भी उनसे मिलने तक नहीं दिया जाता था। मेरी मां उन दिनों के बारे में बताती हैं कि घर से बाहर निकलने में भी डर लगने लगा था। इक्का दुक्का व्यक्ति की हालचाल जानने छुपकर आता था। उनको भी साथ देने पर गिरफ्तार होने का डर लगता था।
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