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भूजल का इस्तेमाल करना है तो लगाना होगा डिजिटल जल प्रवाह मीटर
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भूजल दोहन को रोकने के लिए केंद्रीय भूजल प्राधिकरण ने सभी ट्यूबवेल या बोरवेल पर डिजिटिल जल प्रवाह मीटर लगाना अनिवार्य कर दिया है। साथ ही टेलीमेट्री सिस्टम भी लगाना होगा। इसके बाद ही किसी को भूजल निकालने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिल सकेगी। ऐसा नहीं करने वाले भूजल का प्रयोग नहीं कर सकेंगे।
प्राधिकरण की ओर से जारी किए गए नोटिस में कहा गया है कि ट्यूबवेल या बोलवेल में जहां से पानी निकल रहा है, यानी पाइप में डिजिटिल जल प्रवाह मीटर लगाना होगा। जिससे पता चलेगा कि ट्यूबवेल कितना पानी निकाल रहा है। साथ ही पाइप में ही टेलीमेट्री सिस्टम लगना होगा, जो डिजिटिल जल प्रवाह मीटर के आंकड़ों को अपने पास सुरक्षित करेगा। इसके जरिए ट्यूबवेल से निकाले जा रहे भूजल की मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी। जल प्रवाह मीटर और टेलीमेट्री लगाने के बाद 30 दिन के अंदर केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की वेबसाइट पर इसकी जानकारी देनी होगी, जिसके बाद एनओसी जारी की जाएगी।
कई ट्यूबवेल से निकाल रहे भूजल तो निकासी बिंदू पर लगेगा मीटर और सिस्टम
नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर किसी एक परिसर में भूजल निकालने के लिए कई ट्यूबवेल का इस्तेमाल हो रहा है, जहां सभी ट्यूबवेल के पानी की निकासी होती है, उस एक बिंदु पर टेलीमेट्री सिस्टम और डिजिटिल जल प्रवाह मीटर लगाना होगा। जिससे सभी ट्यूबवेल के निकल रहे पानी को एक ही जगह पर मापा जा सके।
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पानीपत में गिरते भूजल स्तर के हालात
पिछले दो दशक में हरियाणा में भूजल स्तर 10.18 मीटर तक नीचे गया है, जबकि पानीपत में ही बीते 22 सालों में भूजल स्तर 13.84 मीटर से 22.97 मीटर पर जा चुका है। बीते दो सालों में भूजल स्तर करीब 1.80 मीटर नीचे गिर चुका है। जिले के कई क्षेत्रों में भूजल स्तर 200 फीट से भी नीचे चला गया है। बता दें कि धान की रोपाई विधि में प्रति हेक्टेयर करीब 15 लाख लीटर अर्थात प्रति एकड़ करीब 6 लाख लीटर पानी खर्च होता है।
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प्राधिकरण की ओर से जारी किए गए नोटिस में कहा गया है कि ट्यूबवेल या बोलवेल में जहां से पानी निकल रहा है, यानी पाइप में डिजिटिल जल प्रवाह मीटर लगाना होगा। जिससे पता चलेगा कि ट्यूबवेल कितना पानी निकाल रहा है। साथ ही पाइप में ही टेलीमेट्री सिस्टम लगना होगा, जो डिजिटिल जल प्रवाह मीटर के आंकड़ों को अपने पास सुरक्षित करेगा। इसके जरिए ट्यूबवेल से निकाले जा रहे भूजल की मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी। जल प्रवाह मीटर और टेलीमेट्री लगाने के बाद 30 दिन के अंदर केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की वेबसाइट पर इसकी जानकारी देनी होगी, जिसके बाद एनओसी जारी की जाएगी।
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कई ट्यूबवेल से निकाल रहे भूजल तो निकासी बिंदू पर लगेगा मीटर और सिस्टम
नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर किसी एक परिसर में भूजल निकालने के लिए कई ट्यूबवेल का इस्तेमाल हो रहा है, जहां सभी ट्यूबवेल के पानी की निकासी होती है, उस एक बिंदु पर टेलीमेट्री सिस्टम और डिजिटिल जल प्रवाह मीटर लगाना होगा। जिससे सभी ट्यूबवेल के निकल रहे पानी को एक ही जगह पर मापा जा सके।
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पानीपत में गिरते भूजल स्तर के हालात
पिछले दो दशक में हरियाणा में भूजल स्तर 10.18 मीटर तक नीचे गया है, जबकि पानीपत में ही बीते 22 सालों में भूजल स्तर 13.84 मीटर से 22.97 मीटर पर जा चुका है। बीते दो सालों में भूजल स्तर करीब 1.80 मीटर नीचे गिर चुका है। जिले के कई क्षेत्रों में भूजल स्तर 200 फीट से भी नीचे चला गया है। बता दें कि धान की रोपाई विधि में प्रति हेक्टेयर करीब 15 लाख लीटर अर्थात प्रति एकड़ करीब 6 लाख लीटर पानी खर्च होता है।