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Panipat News: श्याम के दर पर उमड़ी श्रद्धा, हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा
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समालखा (पानीपत)। चुलकाना धाम स्थित प्राचीन श्रीश्याम मंदिर के वार्षिक फाल्गुन महोत्सव के दूसरे दिन एकादशी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। पानीपत समेत प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए। चुलकाना धाम को आने वाले रास्ते बाबा श्याम के जयकारों से गूंजते रहे। समालखा के विधायक मनमोहन भड़ाना ने श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा कराई।
सोमवार को फाल्गुन माह की आमलकी एकादशी और मंगलवार को द्वादशी पर श्याम बाबा के दर्शनों का विशेष महत्व है। सोमवार तड़के विशेष पूजन के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए। दिन चढ़ने के साथ ही श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। चुलकाना आने वाले पांचों रास्तों पर श्रद्धालुओं की लंबी लाइनें नजर आईं। श्रद्धालु देर शाम तक दर्शन के लिए लाइन में लगे रहे। विधायक मनमोहन भड़ाना ने हेलीकॉप्टर से मंदिर परिसर सहित पूरे गांव पर फूलों की वर्षा की।
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फाल्गुनी द्वादशी पर पूजा का विशेष महत्व
श्रीश्याम मंदिर सेवा समिति के प्रधान रोशन लाल छौक्कर व संयुक्त सचिव सुरेश कुमार ने बताया कि मंगलवार को फाल्गुनी द्वादशी की मान्यता अधिक है। इसी दिन महाभारत के युद्ध के उपरांत भगवान श्रीकृष्ण ने योद्धा बर्बरीक को अपने सबसे प्रिय नाम श्रीश्याम के नाम से अलंकृत किया था। चुलकाना धाम मंदिर में भी इसी दिन बाबा की विशेष पूजा होती है। बाबा के कुलगुरु की मान्यता वाले परिवार द्वादशी पर पूजा अर्चना करते है। इस दिन भक्त खीर, चूरमा, दूध, अनाज, आटा व गुड़ का प्रसाद चढ़ाते हैं। इसके अलावा नवजात के बाल चढ़ाने व नवविवाहित जोड़ों की जात दिए जाने की परंपरा है। श्रीश्याम बाबा का प्रतिदिन कोलकाता के फूलों से विशेष श्रृंगार किया जा रहा है।
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सोमवार को फाल्गुन माह की आमलकी एकादशी और मंगलवार को द्वादशी पर श्याम बाबा के दर्शनों का विशेष महत्व है। सोमवार तड़के विशेष पूजन के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए। दिन चढ़ने के साथ ही श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। चुलकाना आने वाले पांचों रास्तों पर श्रद्धालुओं की लंबी लाइनें नजर आईं। श्रद्धालु देर शाम तक दर्शन के लिए लाइन में लगे रहे। विधायक मनमोहन भड़ाना ने हेलीकॉप्टर से मंदिर परिसर सहित पूरे गांव पर फूलों की वर्षा की।
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फाल्गुनी द्वादशी पर पूजा का विशेष महत्व
श्रीश्याम मंदिर सेवा समिति के प्रधान रोशन लाल छौक्कर व संयुक्त सचिव सुरेश कुमार ने बताया कि मंगलवार को फाल्गुनी द्वादशी की मान्यता अधिक है। इसी दिन महाभारत के युद्ध के उपरांत भगवान श्रीकृष्ण ने योद्धा बर्बरीक को अपने सबसे प्रिय नाम श्रीश्याम के नाम से अलंकृत किया था। चुलकाना धाम मंदिर में भी इसी दिन बाबा की विशेष पूजा होती है। बाबा के कुलगुरु की मान्यता वाले परिवार द्वादशी पर पूजा अर्चना करते है। इस दिन भक्त खीर, चूरमा, दूध, अनाज, आटा व गुड़ का प्रसाद चढ़ाते हैं। इसके अलावा नवजात के बाल चढ़ाने व नवविवाहित जोड़ों की जात दिए जाने की परंपरा है। श्रीश्याम बाबा का प्रतिदिन कोलकाता के फूलों से विशेष श्रृंगार किया जा रहा है।
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