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Panipat News: श्रीकृष्ण की बाल लीला और भजनों पर झूमे श्रद्धालु

Sat, 13 Jun 2026 02:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत Updated Sat, 13 Jun 2026 02:58 AM IST
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Devotees swayed to the tunes of bhajans and tales of Shri Krishna's childhood pastimes.
प्राचीन देवी मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा में आरती करते श्रद्धालु। संवाद
माई सिटी रिपोर्टर
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पानीपत। प्राचीन सिद्ध श्री देवी मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन शुक्रवार को श्रीकृष्ण भगवान की बाल लीला का सुंदर वर्णन किया। कथा के बीच भजनों की सुंदर प्रस्तुति को सुन श्रद्धालु झूम उठे। कथा के अंत में 56 भोग का प्रसाद बांटा।
आचार्य लालमणि पांडेय ने कथा के पांचवें दिन पूतना वध के बारे में विस्तार से कहा। उन्होंने कहा कि कंस भगवान श्रीकृष्ण को मारने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे थे। उन्होंने पूतना को श्रीकृष्ण को मारने के लिए भेजा। पूतना ने अपने स्तनों पर जहर लगाकर श्रीकृष्ण को दूध पिलाने के बहाने मारने के लिए आई थी। श्रीकृष्ण भगवान ने उनको मारकर दया दिखाते हुए बैकुंठ धाम भेज दिया। उन्होंने कहा कि भगवान के समान कोई दयालु नहीं होता है। भगवान ने इसी तरह शंकरासुर का उद्धार किया। उन्होंने कहा कि किसी भी भोग को भगवान से ऊपर नहीं मानना चाहिए।
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इसके साथ भगवान श्रीकृष्ण का नामकरण किया गया। बड़े भाई का नाम बलराम और छोटे का श्रीकृष्ण रखा। प्रभु धीरे-धीरे बड़े होकर बाल लीला कर गोपियों को रिझाने लगे। वे गोपियों के घर जाकर माखन खाने लगे। गोपियों को भी पता है कि श्रीकृष्ण भगवान का स्वरूप हैं। श्रीकृष्ण बाल रूप में मिट्टी खाकर ब्रजराज को अपने ह्रदय में रखते हैं। श्रीकृष्ण अपनी मां के वृक्ष पर बांधने के बाद उनके दोनों पुत्रों का उद्धार करते हैं। आचार्य ने रासलीला का वर्णन करते हुए स्पष्ट किया कि भगवान श्रीकृष्ण ने श्री राधारानी से निष्काम प्रेम कर संपूर्ण जगत को पवित्र प्रेम का वास्तविक संदेश दिया है।
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भगवान की प्रत्येक लीला मानव जाति और इस चराचर जगत के कल्याण के लिए ही होती है। उन्होंने सत्संग की महिमा बताते हुए कहा कि भजन और कीर्तन के श्रवण से मनुष्य के भीतर सत्कर्म करने की प्रेरणा जागृत होती है। कलयुग के इस कठिन समय में केवल भगवान की निश्छल भक्ति, नाम सुमिरन और भजन-कीर्तन ही मोक्ष प्राप्ति का एकमात्र सरल रास्ता है। इस धार्मिक और भव्य आयोजन के अवसर पर महावीर बंसल, धनराज बंसल, मुकेश बंसल, शिव कुमार, राम विलास, वृंदावन ट्रस्ट के प्रधान राकेश बंसल, महासचिव हरीश बंसल, जोगिंदर कुंडू, संजय कुमार और बलदेव गांधी मौजूद रहे।
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