{"_id":"60d23f508ebc3e6efb0c297b","slug":"d-panipat-news-knl7406026","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस पर खास: पानीपत के नीरज चोपड़ा यूरोप में रहकर जर्मनी के कोच के साथ कर रहे ओलंपिक के लिए तैयारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस पर खास: पानीपत के नीरज चोपड़ा यूरोप में रहकर जर्मनी के कोच के साथ कर रहे ओलंपिक के लिए तैयारी
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नीरज गिरी
पानीपत। गांव खंडरा के रहने वाले नीरज चोपड़ा ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने के लिए भारत में अभ्यास करने के बाद अब वह यूरोप में जर्मनी के कोच डॉ. क्लाउस बार्टोनिट्ज से भाला फेंकने का अभ्यास कर रहे हैं। पानीपत के नीरज चोपड़ा से पूरे देश को ओलंपिक में स्वर्ण पदक की आस है। नीरज पिछले 15 दिन से यूरोप में रहकर ही तैयारी कर रहे हैं। नीरज को यूरोप जाने के बाद कुछ दिन क्वारंटीन रहना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने ओलंपिक की तैयारी शुरू कर दी है। ओलंपिक की तैयारी के दौरान नीरज अपने घर पर सप्ताह में एक बार ही बात कर पाते हैं।
पानीपत के शिवाजी स्टेडियम में नीरज ने पहली बार जैवलिन को छुआ था। नीरज चोपड़ा ने बताया कि उन्होंने उस समय यह नहीं सोचा था कि वह कभी ओलंपिक भी खेलेंगे। उस समय तो उन्हें यह भी नहीं पता था कि ओलंपिक होता क्या है। जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं जीतने के बाद राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में गोल्ड लाने के साथ ही ओलंपिक का सपना देखा। जिसके लिए वह पिछले पांच साल से तैयारी कर रहे हैं। नीरज का कहना है कि उनकी प्रेरणा माता-पिता और परिवार है।
सेना में भर्ती होने के बाद फिर से जगी थी अंतरराष्ट्रीय खेल की उम्मीद
भारतीय सेना में भर्ती होने के बाद नीरज में फिर से अंतरराष्ट्रीय खेल और ओलंपिक खेलने की उम्मीद जगी। वर्ष 2016 में नीरज ने भारतीय सेना ज्वाइन की थी। इससे पहले नीरज के पास तैयारी के लिए पूरे उपकरण के पैसे नहीं होते थे, लेकिन भारतीय सेना में सूबेदार होने के बाद उनकी तैयारी और भी अच्छी हो गई। 2016 में ही वर्ल्ड यू-2020 में उन्होंने पहला अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल जीता था।
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दायीं कोहनी की चोट से उबरने के बाद ही ओलंपिक के लिया कर दिया था क्वालीफाई
दाई कोहनी में चोट लगने के कुछ महीने बाद ही नीरज ने साउथ अफ्रिका में आयोजित एथलेटिक्स सेंट्रल नार्थ ईस्ट मीट में 87.86 मीटर भाला फेंक कर टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया। इससे पहले कोहनी में चोट की वजह से छह महीने अभ्यास नहीं हो सकता था। कोहनी की सर्जरी कराने के बाद नीरज ने डॉ. क्लाउस से ट्रेनिंग लेने का विकल्प चुना था।
टोक्यो ओलंपिक में बना सकते हैं नया रिकॉर्ड
एशियन गेम्स में 88.06 का नेशनल रिकॉर्ड बनाने वाले नीरज चोपड़ा ने अपना रिकॉर्ड तोड़कर 5 मार्च को ग्रैंड प्रिक्स चैंपियनशिप में नया 88.07 का नया कीर्तिमान स्थापित किया था। उनके कोच डॉ. क्लाउस और पूर्व कोच हॉन को भी उम्मीद है कि वह टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल लाने के साथ ही रिकार्ड भी बनाएंगे।
एशियन से लेकर वर्ल्ड यू-20 में जीत चुुके हैं पदक
आईआईएएफ वर्ल्ड यू-20 चैंपियनशिप गोल्ड मेडल
एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप गोल्ड मेडल
कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडल
एशियन गेम्स चैंपियनशिप गोल्ड मेडल
ग्रैंड प्रिक्स चैंपियनशिप गोल्ड मेडल
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पानीपत। गांव खंडरा के रहने वाले नीरज चोपड़ा ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने के लिए भारत में अभ्यास करने के बाद अब वह यूरोप में जर्मनी के कोच डॉ. क्लाउस बार्टोनिट्ज से भाला फेंकने का अभ्यास कर रहे हैं। पानीपत के नीरज चोपड़ा से पूरे देश को ओलंपिक में स्वर्ण पदक की आस है। नीरज पिछले 15 दिन से यूरोप में रहकर ही तैयारी कर रहे हैं। नीरज को यूरोप जाने के बाद कुछ दिन क्वारंटीन रहना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने ओलंपिक की तैयारी शुरू कर दी है। ओलंपिक की तैयारी के दौरान नीरज अपने घर पर सप्ताह में एक बार ही बात कर पाते हैं।
पानीपत के शिवाजी स्टेडियम में नीरज ने पहली बार जैवलिन को छुआ था। नीरज चोपड़ा ने बताया कि उन्होंने उस समय यह नहीं सोचा था कि वह कभी ओलंपिक भी खेलेंगे। उस समय तो उन्हें यह भी नहीं पता था कि ओलंपिक होता क्या है। जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं जीतने के बाद राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में गोल्ड लाने के साथ ही ओलंपिक का सपना देखा। जिसके लिए वह पिछले पांच साल से तैयारी कर रहे हैं। नीरज का कहना है कि उनकी प्रेरणा माता-पिता और परिवार है।
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सेना में भर्ती होने के बाद फिर से जगी थी अंतरराष्ट्रीय खेल की उम्मीद
भारतीय सेना में भर्ती होने के बाद नीरज में फिर से अंतरराष्ट्रीय खेल और ओलंपिक खेलने की उम्मीद जगी। वर्ष 2016 में नीरज ने भारतीय सेना ज्वाइन की थी। इससे पहले नीरज के पास तैयारी के लिए पूरे उपकरण के पैसे नहीं होते थे, लेकिन भारतीय सेना में सूबेदार होने के बाद उनकी तैयारी और भी अच्छी हो गई। 2016 में ही वर्ल्ड यू-2020 में उन्होंने पहला अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल जीता था।
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दायीं कोहनी की चोट से उबरने के बाद ही ओलंपिक के लिया कर दिया था क्वालीफाई
दाई कोहनी में चोट लगने के कुछ महीने बाद ही नीरज ने साउथ अफ्रिका में आयोजित एथलेटिक्स सेंट्रल नार्थ ईस्ट मीट में 87.86 मीटर भाला फेंक कर टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया। इससे पहले कोहनी में चोट की वजह से छह महीने अभ्यास नहीं हो सकता था। कोहनी की सर्जरी कराने के बाद नीरज ने डॉ. क्लाउस से ट्रेनिंग लेने का विकल्प चुना था।
टोक्यो ओलंपिक में बना सकते हैं नया रिकॉर्ड
एशियन गेम्स में 88.06 का नेशनल रिकॉर्ड बनाने वाले नीरज चोपड़ा ने अपना रिकॉर्ड तोड़कर 5 मार्च को ग्रैंड प्रिक्स चैंपियनशिप में नया 88.07 का नया कीर्तिमान स्थापित किया था। उनके कोच डॉ. क्लाउस और पूर्व कोच हॉन को भी उम्मीद है कि वह टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल लाने के साथ ही रिकार्ड भी बनाएंगे।
एशियन से लेकर वर्ल्ड यू-20 में जीत चुुके हैं पदक
आईआईएएफ वर्ल्ड यू-20 चैंपियनशिप गोल्ड मेडल
एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप गोल्ड मेडल
कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडल
एशियन गेम्स चैंपियनशिप गोल्ड मेडल
ग्रैंड प्रिक्स चैंपियनशिप गोल्ड मेडल